छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में कोयला खनन परियोजना के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान ड्यूटी पर तैनात एक महिला पुलिस आरक्षक के साथ हुई बर्बरता ने पूरे प्रदेश में आक्रोश पैदा कर दिया है।
Woman police harassment: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में कोयला खनन परियोजना के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान ड्यूटी पर तैनात एक महिला पुलिस आरक्षक के साथ हुई बर्बरता ने पूरे प्रदेश में आक्रोश पैदा कर दिया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह घटना 27 दिसंबर को रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में उस समय हुई, जब ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले बैठा।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, तमनार क्षेत्र में जिंदल पावर लिमिटेड को आवंटित गारे पेलमा सेक्टर-एक कोयला ब्लॉक के विरोध में 14 गांवों के ग्रामीण प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान स्थिति अचानक बिगड़ गई और भीड़ ने पुलिस बल पर पथराव शुरू कर दिया। इसी अफरातफरी में एक महिला आरक्षक भीड़ से अलग होकर पास के एक खेत में अकेली रह गई, जहां कुछ लोगों ने उस पर हमला कर दिया।
क्यों भड़का था विरोध
दरअसल, रायगढ़ जिले के तमनार इलाके में जिंदल पावर लिमिटेड को आवंटित प्रस्तावित गारे पेलमा सेक्टर-एक कोयला ब्लॉक को लेकर ग्रामीण लंबे समय से विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि 12 दिसंबर को हुई जनसुनवाई को रद्द किया जाए, क्योंकि इससे पर्यावरण और उनकी आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा।
27 दिसंबर को प्रदर्शन के दौरान आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया और एक पुलिस बस, एक जीप तथा एक एम्बुलेंस में आग लगा दी। इसके अलावा कई अन्य सरकारी वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया। लिब्रा गांव के पास स्थित जिंदल पावर लिमिटेड के कोल हैंडलिंग प्लांट पर भी भीड़ ने धावा बोला, जहां एक कन्वेयर बेल्ट, दो ट्रैक्टर और अन्य वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया तथा कार्यालय परिसर में तोड़फोड़ की गई।
Raigarh viral video ने झकझोरा
घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है, जिसने लोगों को भीतर तक झकझोर दिया। वीडियो में महिला आरक्षक जमीन पर पड़ी हुई दिखाई दे रही है, वह रो रही है और हाथ जोड़कर हमलावरों से उसे छोड़ देने की गुहार लगा रही है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दो पुरुष उसके कपड़े फाड़ रहे हैं और उससे सवाल-जवाब कर रहे हैं कि वह विरोध स्थल पर क्यों मौजूद थी। महिला आरक्षक बार-बार कहती सुनाई देती है, “भाई, मत फाड़ो… मैं कुछ नहीं करूंगी… मैंने किसी को नहीं मारा।”
वीडियो में एक आरोपी उसके फटे हुए कपड़ों को खींचते हुए नजर आता है, जबकि दूसरा व्यक्ति पूरे घटनाक्रम को मोबाइल फोन में रिकॉर्ड करता दिख रहा है। बाद में एक आरोपी चप्पल हाथ में लेकर महिला को धमकाता और उस पर चिल्लाता भी दिखाई देता है।
पुलिस की कार्रवाई
घटना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक संजीव शुक्ला ने बताया कि महिला आरक्षक के साथ मारपीट और कथित छेड़छाड़ के आरोप में दो स्थानीय निवासियों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि आरोपियों के बयान और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अन्य लोगों की पहचान की जा रही है, जो इस घटना में शामिल हो सकते हैं।
आईजी शुक्ला के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ छेड़छाड़, हत्या के प्रयास, लूट और अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जा रही है तथा दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और जनाक्रोश
महिला आरक्षक के साथ हुई इस घटना को लेकर राजनीतिक हलकों में भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। अखिल भारतीय महिला कांग्रेस ने धुंधले किए गए वीडियो को फेसबुक पर साझा करते हुए प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। पार्टी ने पोस्ट में लिखा कि रायगढ़ में महिला पुलिसकर्मी के साथ बदसलूकी और कपड़े फाड़ने की घटना भयावह है और यदि महिला पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोग इस घटना की निंदा कर रहे हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
अन्य हमले और प्रशासन का कदम
हिंसा के दौरान तमनार थाने की प्रभारी कमला पुसाम पर भी महिलाओं के एक समूह द्वारा कथित तौर पर हमला किया गया, जिसमें उन्हें चोटें आईं। पथराव और झड़पों में दो अधिकारियों सहित कई पुलिसकर्मी घायल हुए।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रायगढ़ प्रशासन ने हिंसा के एक दिन बाद ही यह घोषणा की कि परियोजना के लिए हुई जनसुनवाई को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन का कहना है कि शांति बहाल करना उसकी प्राथमिकता है और कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि हिंसक विरोध किस तरह मानवाधिकारों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
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