दिल्ली में बुलडोज़र की चोट! एक तरफ अवैध मकान, दूसरी तरफ 100 साल पुरानी मस्जिद एक तरफ अवैध मकान, दूसरी तरफ 100 साल पुरानी मस्जिद
MCD demolition notice mosque: दिल्ली में अवैध निर्माण के खिलाफ चल रही कार्रवाई ने एक बार फिर सैकड़ों लोगों की ज़िंदगी को झकझोर दिया है। दक्षिणी दिल्ली के आली गांव में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने करीब ढाई एकड़ जमीन पर बने अवैध बहुमंजिला भवनों को ढहा दिया। यह जमीन सरिता विहार मेट्रो डिपो की बाउंड्री वॉल से सटी हुई थी, जिसे पहले ही डीडीए द्वारा अधिग्रहित किया जा चुका था।
सोमवार सुबह जब बुलडोज़र और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा, तो वहां का मंजर बेहद भावुक था। जिन मकानों को लोग अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी पूंजी समझते थे, वही कुछ घंटों में मलबे में बदलने लगे। किसी ने अपने बच्चों का भविष्य यहां देखा था, तो किसी ने जीवन भर की जमा-पूंजी इन दीवारों में लगा दी थी।
भूमाफिया का झांसा और लोगों की मजबूरी
डीडीए के अनुसार, इस जमीन को कुछ भूमाफियाओं ने भोले-भाले लोगों को यह कहकर बेच दिया था कि जल्द ही रजिस्ट्री और म्यूटेशन करा दी जाएगी। भरोसे में आकर लोगों ने एग्रीमेंट के आधार पर जमीन खरीदी और दो, चार पांच मंजिला पक्के मकान खड़े कर दिए। इस ढाई एकड़ जमीन पर करीब 30 से ज्यादा मकान बन चुके थे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें कभी यह अंदाजा नहीं था कि जिस जमीन पर वे घर बना रहे हैं, वह सरकारी है। कई परिवारों ने कर्ज लेकर या अपनी सारी जमा-पूंजी लगाकर मकान बनाए थे। कार्रवाई के दौरान महिलाएं रोती दिखीं, बुजुर्ग सदमे में थे और बच्चों के चेहरे पर डर साफ झलक रहा था।
डीडीए का पक्ष: पहले दी गई थी चेतावनी
डीडीए का कहना है कि जमीन पर कब्जे की कोशिशों के दौरान कई बार चेतावनी दी गई थी। वहां बोर्ड भी लगाया गया था, जिसमें साफ लिखा था कि भूमि का स्वामित्व डीडीए के पास है। आरोप है कि वह बोर्ड हटा दिया गया था। इसी वजह से अब जमीन को खाली कराना जरूरी हो गया।
सुबह करीब नौ बजे शुरू हुई तोड़फोड़ की कार्रवाई शाम चार बजे तक चली। डीडीए के मुताबिक, करीब 50 प्रतिशत जमीन खाली करा ली गई है और बाकी हिस्से पर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। लोग पहले से ही अपने घरों से जरूरी सामान निकालकर बाहर रख चुके थे, फिर भी यह मंजर किसी के लिए आसान नहीं था।
दूसरी तरफ तुर्कमान गेट की मस्जिद और बढ़ता तनाव
इसी बीच दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में एक और मामला तूल पकड़ रहा है। यहां स्थित 100 साल से ज्यादा पुरानी फैज-ए-इलाही मस्जिद को सील करने और संभावित डिमोलिशन का नोटिस जारी होने से तनाव का माहौल है। इस मामले में नगर निगम दिल्ली (एमसीडी) और डीडीए की कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने खुद पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर अपील की कि जब तक कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक किसी तरह की तोड़फोड़ न की जाए। उनका कहना है कि मामला अदालत में है और यथास्थिति बनाए रखना जरूरी है।
हाई कोर्ट में मामला, सबकी निगाहें फैसले पर
इस पूरे विवाद पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई होनी थी, लेकिन डीडीए और एमसीडी के वकील पेश नहीं हो सके। अब अदालत ने अगली तारीख पर अनिवार्य रूप से वकीलों को उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। मस्जिद प्रबंधन समिति का दावा है कि यह कोई अवैध निर्माण नहीं, बल्कि ऐतिहासिक इबादतगाह है।
कानून बनाम इंसान
एक तरफ आली गांव में लोग अपने टूटे घरों के मलबे में अपने सपने ढूंढ रहे हैं, तो दूसरी तरफ तुर्कमान गेट में लोग अपनी आस्था को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। सवाल यही है कि कानून का पालन जरूरी है, लेकिन क्या उन लोगों की जिम्मेदारी तय नहीं होनी चाहिए जिन्होंने लोगों को गुमराह किया?
आज दिल्ली में बुलडोज़र सिर्फ दीवारें नहीं गिरा रहा, बल्कि भरोसे, आस्था और इंसानी जिंदगियों को भी झकझोर रहा है। अब सबकी निगाहें अदालतों और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
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