Cold Wave Alert India: कोल्ड वेव अलर्ट: दिल-फेफड़े के मरीज रहें सावधान, एम्स ने जारी की गाइडलाइन
Cold Wave Alert India: उत्तर भारत समेत कई राज्यों में ठंड ने अपना असर और तेज कर दिया है। इसी बीच भारतीय मौसम विभाग ने शीतलहर (कोल्ड वेव) को लेकर अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में तापमान और गिर सकता है, जिससे आम लोगों के साथ-साथ पहले से बीमार लोगों के लिए खतरा बढ़ सकता है।
ठंड सिर्फ शरीर को ठिठुराने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह दिल, फेफड़े, डायबिटीज और किडनी के मरीजों के लिए गंभीर और कई बार जानलेवा भी साबित हो सकती है। इसी को देखते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के डॉक्टरों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
ठंड में क्यों बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा?
एम्स के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव नारंग बताते हैं कि सर्दियों में शरीर की रक्त नलियां सिकुड़ जाती हैं। इससे ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ सकता है। हाई बीपी सीधे तौर पर हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा देता है।
अगर ठंड के मौसम में सीने में जकड़न, सांस फूलना, अचानक थकान, चक्कर आना या पैरों में सूजन जैसे लक्षण दिखें, तो इन्हें बिल्कुल नजरअंदाज न करें। समय रहते डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
नमक कम रखें, पानी भरपूर पिएं
डॉक्टरों का कहना है कि ठंड में प्यास कम लगती है, इसलिए लोग पानी पीना कम कर देते हैं। यह आदत खतरनाक हो सकती है। पानी कम पीने से खून गाढ़ा हो जाता है और दिल पर दबाव बढ़ता है।
सर्दियों में अचार, पापड़, नमकीन और प्रोसेस्ड फूड का सेवन भी बढ़ जाता है। इनमें मौजूद ज्यादा नमक बीपी और दिल के मरीजों के लिए नुकसानदेह है। रोजाना बीपी चेक करते रहें और दवाइयों में किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें।
फेफड़े, दमा और सीओपीडी मरीज रहें ज्यादा सतर्क
एम्स के मेडिसिन विभाग के डॉक्टर डॉ. संजीव सिन्हा के अनुसार ठंडी हवा सांस की नलियों को सिकोड़ देती है। इससे दमा और सीओपीडी के मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है।
अगर खांसी, बलगम, सांस लेने में दिक्कत या बार-बार इंफेक्शन होने लगे, तो तुरंत सावधानी बरतें। बाहर निकलते समय नाक और मुंह ढककर रखें, गर्म कपड़े पहनें और सूप या चाय जैसे गर्म तरल लेते रहें।
डायबिटीज और किडनी मरीज भी न करें लापरवाही
एम्स के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजेश खड़गावत कहते हैं कि ठंड को आलस्य का बहाना न बनाएं। रोज हल्की वॉक, घर के अंदर योग या स्ट्रेचिंग करना जरूरी है।
डायबिटीज मरीजों को ब्लड शुगर की नियमित जांच करनी चाहिए, जबकि किडनी मरीजों के लिए समय पर दवाइयां और जांच और भी जरूरी हो जाती है। ज्यादा तला-भुना और नमक वाला खाना ठंड में नुकसान पहुंचा सकता है।
बच्चों और बुजुर्गों पर दें विशेष ध्यान
एम्स के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश लोढ़ा बताते हैं कि छोटे और कम वजन वाले बच्चों पर ठंड का असर जल्दी पड़ता है। बच्चों का सिर, कान और छाती अच्छी तरह ढककर रखें। अगर बच्चा सुस्त दिखे या सांस लेने में परेशानी हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
वहीं जिरियाट्रिक विशेषज्ञ डॉ. अभिजीत राव के अनुसार बुजुर्गों और दमा के मरीजों के लिए ठंड और प्रदूषण मिलकर डबल खतरा बन जाते हैं। सुबह बहुत जल्दी टहलने से बचें। धूप निकलने के बाद, खासकर दोपहर में हल्की वॉक करना ज्यादा सुरक्षित होता है।
थोड़ी सावधानी, बड़ी सुरक्षा
डॉक्टरों का कहना है कि शीतलहर के दौरान थोड़ी सी सतर्कता बड़ी बीमारी से बचा सकती है। गर्म कपड़े पहनें, नमक कम खाएं, पानी भरपूर पिएं, दवाइयां समय पर लें और किसी भी लक्षण को हल्के में न लें। ठंड के इस मौसम में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।
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