E-rickshaw rules in Delhi: ई-रिक्शा चालकों को बड़ी राहत! दिल्ली सरकार दे सकती है एक महीने का समय, जानिए पूरी योजना
E-rickshaw rules in Delhi: दिल्ली की सड़कों पर रोज़ाना लाखों लोग ई-रिक्शा का इस्तेमाल करते हैं। यह साधन न सिर्फ सस्ता है, बल्कि हजारों परिवारों की रोज़ी-रोटी का जरिया भी है। लेकिन लंबे समय से गैर-पंजीकृत ई-रिक्शा को लेकर सुरक्षा और ट्रैफिक जाम की शिकायतें सामने आती रही हैं। अब इसी समस्या को सुलझाने के लिए दिल्ली सरकार एक अहम कदम उठाने की तैयारी में है।
एक महीने का समय देने पर विचार
दिल्ली सरकार का परिवहन विभाग गैर-पंजीकृत ई-रिक्शा चालकों को राहत देने के उद्देश्य से पंजीकरण पूरा कराने के लिए एक महीने का समय देने पर विचार कर रहा है। विभाग का मानना है कि अचानक सख्ती से चालकों की आजीविका प्रभावित हो सकती है, इसलिए उन्हें मौका देना जरूरी है ताकि वे नियमों के दायरे में आ सकें।
परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जैसे ही इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी होगा, उसके बाद ई-रिक्शा चालकों को तय समय सीमा के भीतर पंजीकरण कराना होगा। हालांकि, फिलहाल योजना की शुरुआत की तारीख तय नहीं की गई है।
क्यों बढ़ी सख्ती की जरूरत?
ई-रिक्शा को पर्यावरण के अनुकूल परिवहन विकल्प के रूप में शुरू किया गया था, लेकिन समय के साथ इनकी संख्या तेजी से बढ़ती चली गई। कई ई-रिक्शा बिना पंजीकरण, फिटनेस सर्टिफिकेट और तय नियमों के सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
इससे न सिर्फ यातायात जाम की समस्या बढ़ी है, बल्कि सड़क सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। खासकर संकरी सड़कों और व्यस्त इलाकों में ई-रिक्शा के अनियंत्रित संचालन से हादसों की संख्या में इजाफा हुआ है।
आंकड़े क्या कहते हैं?
दिल्ली सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2026 तक 2,04,131 ई-रिक्शा पंजीकृत हैं। लेकिन परिवहन विभाग का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे कई गुना अधिक हो सकती है। यानी बड़ी संख्या में ई-रिक्शा अभी भी बिना किसी वैध दस्तावेज के सड़कों पर चल रहे हैं।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद बढ़ी हलचल
इस मुद्दे पर तब और गंभीरता बढ़ गई जब हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई। यह याचिका एक ऐसे पिता ने दाखिल की थी, जिसकी आठ वर्षीय बेटी की मौत एक गैर-पंजीकृत ई-रिक्शा के पलटने से हो गई थी।
इस मामले में हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया और गैर-पंजीकृत ई-रिक्शा पर सवाल उठाए। इसके बाद परिवहन विभाग ने नियमों को सख्ती से लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाने शुरू किए।
2014 से तय हैं नियम
अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2014 में बनाई गई ई-रिक्शा सेवा योजना के तहत ई-रिक्शा को परिवहन वाहन की श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि इनके लिए पंजीकरण, फिटनेस सर्टिफिकेट और तय मार्गों का पालन करना अनिवार्य है।
ई-रिक्शा के फिटनेस प्रमाण पत्र की अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के तहत दोबारा फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।
236 सड़कों पर प्रतिबंध
परिवहन विभाग ने 11 दिसंबर 2014 को एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें दिल्ली की 236 सड़कों की सूची दी गई है, जहां ई-रिक्शा का चलना और पार्क करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद कई इलाकों में नियमों की खुलेआम अनदेखी देखी जाती है।
सरकार का उद्देश्य क्या है?
सरकार का साफ कहना है कि यह कदम ई-रिक्शा चालकों को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा सुधारने, ट्रैफिक जाम कम करने और यात्रियों की जान बचाने के लिए उठाया जा रहा है। साथ ही सरकार यह भी चाहती है कि नियमों के साथ चालकों की आजीविका भी सुरक्षित रहे।
अगर यह योजना लागू होती है, तो आने वाले समय में दिल्ली की सड़कों पर ई-रिक्शा का संचालन ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित हो सकता है।
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