Black plastic health risks: ऑनलाइन खाना मंगाते हैं? तो सावधान! Black plastic बन सकता है ‘साइलेंट किलर’
Black plastic health risks: आज के समय में ऑनलाइन फूड डिलीवरी हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन चुकी है। गरम-गरम खाना कुछ ही मिनटों में घर पहुँच जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस Black plastic में आपका खाना आता है, वही आपकी सेहत के लिए धीरे-धीरे ज़हर बन सकता है?
जनवरी 2026 में सोशल मीडिया क्रिएटर @anujramatri के एक वीडियो के बाद इस मुद्दे ने ज़ोर पकड़ लिया है। उनके वीडियो ने लोगों का ध्यान इस बात पर खींचा कि रेस्टोरेंट्स और फूड डिलीवरी ऐप्स द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला काला प्लास्टिक सिर्फ पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि इंसानों के लिए भी बेहद खतरनाक है।
Black plastic आखिर इतना खतरनाक क्यों है?
1. सेहत पर सीधा हमला
काला प्लास्टिक अक्सर पुराने इलेक्ट्रॉनिक कचरे (E-waste) को रीसायकल करके बनाया जाता है। इसमें लेड, मरकरी जैसी भारी धातुएं और फ्लेम रिटार्डेंट केमिकल्स मौजूद हो सकते हैं।
जब इसमें गरम या तैलीय खाना रखा जाता है, तो प्लास्टिक के केमिकल्स खाने में घुलने लगते हैं। इस प्रक्रिया को लीचिंग कहा जाता है। लंबे समय तक ऐसा खाना खाने से
- हार्मोनल असंतुलन
- दिल से जुड़ी बीमारियाँ
- प्रजनन से जुड़ी समस्याएं
- और यहां तक कि कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है
यानी बाहर से देखने में साधारण लगने वाला ये डिब्बा अंदर से बेहद खतरनाक हो सकता है।
2. पर्यावरण के लिए भी ज़हर
काले प्लास्टिक को रीसायकल करना लगभग नामुमकिन है। इसकी वजह है इसमें इस्तेमाल होने वाला कार्बन ब्लैक पिगमेंट।
रीसायकलिंग प्लांट्स में कचरा अलग करने वाली मशीनें इस रंग को पहचान ही नहीं पातीं। नतीजा यह होता है कि ये डिब्बे
- सीधे लैंडफिल में चले जाते हैं
- या जला दिए जाते हैं
दोनों ही हालातों में यह हवा, मिट्टी और पानी को प्रदूषित करता है।
गरम खाना + प्लास्टिक = साइलेंट किलर
जब रेस्टोरेंट खौलता हुआ खाना सीधे काले प्लास्टिक के डिब्बे में डालते हैं, तो खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
गरमी के संपर्क में आते ही प्लास्टिक के सूक्ष्म कण और जहरीले रसायन खाने में मिल जाते हैं। यह असर तुरंत दिखाई नहीं देता, लेकिन सालों बाद इसका खामियाजा शरीर को भुगतना पड़ता है।
ग्राहक के तौर पर आप क्या कर सकते हैं?
- खाना आते ही उसे स्टील या कांच के बर्तन में निकाल लें
- काले प्लास्टिक के डिब्बों में कभी भी खाना माइक्रोवेव न करें
- रेस्टोरेंट को फीडबैक दें कि आप इस तरह की पैकेजिंग नहीं चाहते
- पास के ढाबे या रेस्टोरेंट से खाना लेते समय अपना टिफिन साथ ले जाएं
छोटे-छोटे कदम भी बड़ा फर्क ला सकते हैं।
रेस्टोरेंट्स और डिलीवरी ऐप्स से क्या मांग होनी चाहिए?
Zomato, Swiggy जैसे प्लेटफॉर्म्स को चाहिए कि
- काले प्लास्टिक का इस्तेमाल करने वाले रेस्टोरेंट्स पर रोक लगाएं
- ईको-फ्रेंडली पैकेजिंग अपनाने वालों को प्रमोट करें
ग्राहकों का दबाव ही सबसे बड़ा बदलाव ला सकता है।
सुरक्षित और बेहतर विकल्प कौन से हैं?
- गन्ने की खोई (Bagasse) से बने डिब्बे
- कागज के कंटेनर
- स्टील या कांच के बर्तन
- एल्यूमिनियम फॉयल कंटेनर (काले प्लास्टिक से बेहतर विकल्प)
निष्कर्ष
काला प्लास्टिक कोई मामूली समस्या नहीं, बल्कि एक साइलेंट हेल्थ क्राइसिस है। जब तक सरकार इस पर सख्त कानून नहीं बनाती, तब तक हमें खुद जागरूक बनना होगा।
याद रखें, सस्ता और सुविधाजनक दिखने वाला पैकेट आपकी सेहत की कीमत पर नहीं होना चाहिए। आज सावधानी बरतेंगे, तभी कल सुरक्षित रहेगा।
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