भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति को लेकर तुरंत निर्णय लिया जाए।
Colonel Sofia Qureshi case: भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति को लेकर तुरंत निर्णय लिया जाए। अदालत ने कहा कि विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट आए कई महीने बीत चुके हैं, इसके बावजूद राज्य सरकार अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है, जो कानूनन स्वीकार्य नहीं है।
यह मामला उस वक्त चर्चा में आया था, जब ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की जानकारी देश को देने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह ने कथित तौर पर उन्हें ‘आतंकियों की बहन’ कहा था। इस बयान को न केवल आपत्तिजनक बल्कि एक राष्ट्रीय सैन्य अधिकारी की गरिमा के खिलाफ बताया गया।
SIT रिपोर्ट पर फैसले में देरी पर कोर्ट नाराज
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची भी शामिल थे, ने इस बात पर गंभीर नाराजगी जताई कि राज्य सरकार 19 अगस्त से SIT की रिपोर्ट पर बैठी हुई है। अदालत ने कहा कि कानून सरकार पर निर्णय लेने का दायित्व डालता है और अनिश्चितकाल तक मामले को लंबित रखना स्वीकार्य नहीं हो सकता।
सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की, “आप 19 अगस्त से इस रिपोर्ट पर कोई फैसला नहीं कर रहे हैं। आज 19 जनवरी है। कानून आपसे जवाब मांगता है।”
सीलबंद रिपोर्ट में क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान SIT की सीलबंद रिपोर्ट खोली। रिपोर्ट में विभिन्न पहलुओं की जांच के बाद स्पष्ट रूप से मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए राज्य सरकार से अनुमति मांगी गई है। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि अब तक राज्य सरकार की ओर से इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि मध्य प्रदेश सरकार कानून के अनुरूप जल्द से जल्द मंजूरी के मुद्दे पर उचित कदम उठाए।
Colonel Sofia Qureshi case पर राज्य सरकार की दलील
राज्य सरकार की ओर से यह दलील दी गई कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण SIT की मांग पर निर्णय नहीं लिया गया। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल लंबित होने का बहाना बनाकर संवैधानिक जिम्मेदारियों से बचा नहीं जा सकता।
माफी पर भी कोर्ट असंतुष्ट
मंत्री विजय शाह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल पहले ही सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं और जांच में सहयोग कर रहे हैं। हालांकि अदालत इस तर्क से संतुष्ट नहीं दिखी।
सीजेआई सूर्यकांत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा,
“माफी कहां है? रिकॉर्ड में तो कुछ भी नहीं है। अब तो माफी मांगने में बहुत देर हो चुकी है।”
कोर्ट ने पहले भी विजय शाह की सार्वजनिक और ऑनलाइन माफी को “कानूनी दायित्व से बचने की कोशिश” और “मगरमच्छ के आंसू” करार दिया था।
अन्य आपत्तिजनक बयानों की भी जांच
बेंच ने यह भी नोट किया कि SIT की रिपोर्ट में ऐसे अन्य मामलों का जिक्र है, जिनमें मंत्री विजय शाह पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के आरोप लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने SIT को निर्देश दिया कि वह इन मामलों में प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर अलग से रिपोर्ट पेश करे।
पूरा मामला क्या है?
यह मामला मंत्री विजय शाह द्वारा दिए गए उस बयान से जुड़ा है, जो ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद वायरल हुए एक वीडियो में सामने आया था। वीडियो में वे कथित तौर पर भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते दिखे थे। इस बयान के बाद व्यापक विरोध हुआ और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज FIR की जांच के लिए SIT गठित करने का आदेश दिया था।
बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाते हुए SIT से स्थिति रिपोर्ट मांगी थी।
कर्नल सोफिया कुरैशी कौन हैं?
कर्नल सोफिया कुरैशी भारतीय सेना की वरिष्ठ अधिकारी हैं, जिन्होंने विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ मिलकर ऑपरेशन ‘सिंदूर’ पर मीडिया को जानकारी दी थी। इस ऑपरेशन के बाद वे देशभर में चर्चा का विषय बनीं और उन्हें सेना में महिलाओं की सशक्त भूमिका का प्रतीक माना गया।
अगली सुनवाई पर टिकी नजर
अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सभी की नजरें मध्य प्रदेश सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि सरकार SIT की सिफारिशों के अनुरूप मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देती है या नहीं।
यह मामला न केवल एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की जवाबदेही से जुड़ा है, बल्कि सेना के सम्मान और अभिव्यक्ति की मर्यादा जैसे संवेदनशील मुद्दों को भी सामने लाता है।
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