अरावली पहाड़ियों को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद और अवैध खनन की शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और सख्त रुख अपनाया है
SC on Aravalli hills: अरावली पहाड़ियों को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद और अवैध खनन की शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और सख्त रुख अपनाया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने अरावली क्षेत्र में किसी भी तरह के अवैध खनन पर रोक लगाने का स्पष्ट आदेश देते हुए इस पूरे मामले की जांच के लिए विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति (हाई पावर्ड कमेटी) गठित करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि अरावली जैसे संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्र में लापरवाही के परिणाम दूरगामी और अपूरणीय हो सकते हैं।
चार सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस मामले में अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। कोर्ट ने सभी पक्षों को निर्देश दिया है कि वे प्रस्तावित समिति के गठन के लिए अपने सुझाव दें और विशेषज्ञों के नाम अदालत के समक्ष पेश करें। इनमें वैज्ञानिक, पर्यावरण विशेषज्ञ, वन क्षेत्र के जानकार और अन्य डोमेन एक्सपर्ट शामिल किए जाएंगे।
‘अरावली में अवैध खनन के परिणाम सुधारे नहीं जा सकते’
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि Aravalli hills क्षेत्र में अवैध खनन के दुष्परिणाम ऐसे होते हैं, जिन्हें बाद में ठीक नहीं किया जा सकता। अदालत ने दोहराया कि इस तरह की गतिविधियां न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के अधिकारों पर भी सीधा असर डालती हैं। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अरावली जैसे पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में किसी भी तरह की ढिलाई गंभीर संकट को जन्म दे सकती है।
हाई पावर कमेटी में होंगे अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अरावली को लेकर गठित की जाने वाली हाई पावर्ड कमेटी में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होंगे। इसमें वैज्ञानिकों के साथ-साथ पर्यावरण, वन संरक्षण, भू-विज्ञान और जल संसाधन से जुड़े विशेषज्ञों को जगह दी जाएगी। इस समिति का उद्देश्य अरावली क्षेत्र की स्पष्ट परिभाषा, अवैध खनन की स्थिति और उसके पर्यावरणीय प्रभावों का गहन अध्ययन करना होगा।
स्वतः संज्ञान, नई याचिकाओं पर रोक
Aravalli hills मामले में सुप्रीम कोर्ट स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर अब अलग से नई याचिकाएं दायर करने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने कहा कि सभी संबंधित मुद्दों पर इसी मामले के तहत विचार किया जाएगा, ताकि भ्रम और दोहराव से बचा जा सके।
एमिकस क्यूरी से मांगी गई रिपोर्ट
अदालत ने एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) को भी इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही सभी पक्षों, जिनमें राज्य सरकारें और अन्य हितधारक शामिल हैं, से कहा गया है कि वे समिति के लिए अपने सुझाव और विशेषज्ञों के नाम प्रस्तुत करें।
100 मीटर नियम पर रोक बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने Aravalli hills क्षेत्र से जुड़े 100 मीटर नियम पर अपने पूर्व आदेश में लगाई गई रोक को आगे बढ़ा दिया है। यह रोक उस फैसले पर है, जिसमें जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली मानने की सीमा तय की गई थी। अदालत ने पहले ही स्पष्ट किया था कि इस नियम को लेकर भ्रम और विरोधाभास सामने आए हैं, जिन्हें दूर करना जरूरी है।
रिपोर्ट्स की गलत व्याख्या पर नाराजगी
पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा था कि उसकी टिप्पणियों और रिपोर्ट्स की गलत व्याख्या की जा रही है। इसी कारण अदालत ने स्पष्टीकरण की आवश्यकता जताई थी। कोर्ट का मानना है कि Aravalli hills की परिभाषा और संरक्षण से जुड़े मुद्दों को स्पष्ट किए बिना कोई ठोस नीति लागू नहीं की जा सकती।
अरावली क्यों है इतनी अहम?
अरावली पर्वत श्रृंखला देश की सबसे पुरानी पर्वतमालाओं में से एक है और यह राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और गुजरात तक फैली हुई है। यह क्षेत्र जल संरक्षण, जैव विविधता और रेगिस्तान के फैलाव को रोकने में अहम भूमिका निभाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अरावली में बड़े पैमाने पर खनन और अतिक्रमण से पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे जल संकट और प्रदूषण जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम
कानूनी और पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश Aravalli hills संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हाई पावर्ड कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में सख्त नीतियां और दिशा-निर्देश तय किए जा सकते हैं।
अब सभी की नजरें चार सप्ताह बाद होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि अरावली को लेकर आगे की कार्रवाई किस दिशा में जाएगी और अवैध खनन पर कैसे प्रभावी रोक लगाई जाएगी।
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