अमेरिकी पाबंदियों के बीच चीन को Nvidia H200 AI chip की मंजूरी, ‘chip war’ में बड़ा मोड़
Nvidia H200 AI chip: अमेरिका और चीन के बीच जारी तकनीकी तनाव और तथाकथित “chip war” के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। 28 जनवरी 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने Nvidia के सबसे उन्नत AI चिप्स H200 के पहले बैच के आयात को मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब एक ओर अमेरिका चीन की तकनीकी प्रगति पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर चीन AI के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ना चाहता है।
रॉयटर्स और ब्लूमबर्ग की रिपोर्टों के मुताबिक, चीन ने सैकड़ों हजार H200 चिप्स के आयात के लिए “हरी झंडी” दे दी है। यह मंजूरी Nvidia के सीईओ जेनसेन हुआंग की मौजूदा चीन यात्रा के दौरान मिली।
किन कंपनियों को मिला फायदा?
शुरुआती बैच मुख्य रूप से चीन की तीन बड़ी इंटरनेट कंपनियों को आवंटित किया गया है। रिपोर्टों में इन कंपनियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार इनमें ByteDance, Alibaba और Tencent शामिल हैं। इसके अलावा, अन्य चीनी टेक कंपनियां और AI स्टार्टअप्स भी इन चिप्स के लिए कतार में हैं।
H200 चिप क्यों है इतना खास?
Nvidia का H200 AI चिप जनरेटिव AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए बेहद अहम माना जाता है। यह चीन को पहले उपलब्ध H20 चिप की तुलना में लगभग 6 गुना ज्यादा शक्तिशाली है।
तकनीकी आंकड़ों के मुताबिक, H200 की प्रोसेसिंग क्षमता करीब 15,832 TPP है, जबकि H20 केवल 2,368 TPP तक सीमित था। यही वजह है कि बड़े AI मॉडल, क्लाउड सर्विसेज और एडवांस्ड रिसर्च के लिए H200 को “गेम चेंजर” माना जा रहा है।
अमेरिका की सख्त शर्तें और 25% शुल्क
हालांकि अमेरिका ने Nvidia को H200 चिप्स चीन में बेचने की अनुमति दी है, लेकिन इसके साथ कड़ी शर्तें भी लगाई गई हैं।
इनमें सबसे अहम है:
- 25% अमेरिकी अधिभार (Surcharge): हर चिप की बिक्री पर अमेरिका 25% शुल्क लेगा।
- निर्यात सीमा: Nvidia चीन को उतने ही चिप्स भेज सकती है, जितने उसने अमेरिका के घरेलू बाजार में बेचे हैं (अधिकतम 50%)।
- सुरक्षा जांच: चिप्स को स्वतंत्र थर्ड-पार्टी लैब से जांचना अनिवार्य होगा।
- सैन्य उपयोग पर रोक: चीन को यह लिखित गारंटी देनी होगी कि इन चिप्स का उपयोग सैन्य या संवेदनशील सरकारी उद्देश्यों में नहीं होगा।
जेनसेन हुआंग की चीन यात्रा क्यों अहम?
Nvidia के CEO जेनसेन हुआंग की यह 2026 की पहली चीन यात्रा है। उन्होंने शंघाई और बीजिंग में कंपनी के कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और शंघाई के Zhangjiang जिले में Nvidia के नए ऑफिस का दौरा किया।
इस दौरान उन्होंने चीनी AI इकोसिस्टम की सराहना करते हुए कहा कि DeepSeek जैसे मॉडल चीन को वैश्विक AI दौड़ में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं।
Huawei पर बढ़ा दबाव
H200 चिप्स की एंट्री से चीन की घरेलू चिप कंपनी Huawei के लिए चुनौती बढ़ गई है।
तकनीकी रूप से Nvidia का H200, Huawei के Ascend 910C से करीब 5–6 गुना ज्यादा शक्तिशाली माना जा रहा है।
हालांकि Huawei “संख्या बनाम शक्ति” की रणनीति पर काम कर रहा है और 2026 तक 6 लाख Ascend चिप्स बनाने का लक्ष्य रखता है, लेकिन Nvidia के CUDA सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म के सामने Huawei का CANN अभी भी कमजोर माना जाता है।
चीनी कंपनियां H200 का इस्तेमाल कहां करेंगी?
- ByteDance: TikTok एल्गोरिदम और अपने LLMs को OpenAI के स्तर तक ले जाने के लिए।
- Alibaba: Qwen3-Max-Thinking मॉडल और Alibaba Cloud को मजबूत करने के लिए।
- Tencent: Hunyuan AI मॉडल, गेमिंग, विज्ञापन और WeChat इकोसिस्टम के लिए।
इसके अलावा, DeepSeek जैसे AI स्टार्टअप्स और कुछ विश्वविद्यालय भी रिसर्च के लिए इन चिप्स में रुचि दिखा रहे हैं।
भारी कीमत, लेकिन बड़ा दांव
एक Nvidia H200 चिप की कीमत $30,000–$40,000 है। 25% अमेरिकी शुल्क जुड़ने के बाद यह कीमत $50,000 (करीब ₹42 लाख) तक पहुंच सकती है।
अगर कोई कंपनी 2 लाख चिप्स खरीदती है, तो कुल सौदा $10 बिलियन (₹84,000 करोड़) से ज्यादा का हो सकता है।
हालांकि इससे कंपनियों का मुनाफा अल्पकाल में प्रभावित हो सकता है, लेकिन वे इसे भविष्य के लिए रणनीतिक निवेश मान रही हैं।
Nvidia के लिए बड़ी राहत
इस मंजूरी से Nvidia को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है, क्योंकि चीन उसका सबसे बड़ा बाजार रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण कंपनी को अब तक अरबों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा था।
कुल मिलाकर, H200 चिप्स की मंजूरी ने साफ कर दिया है कि तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बावजूद, चीन और अमेरिका दोनों फिलहाल पूरी तरह टकराव के बजाय संतुलन की नीति अपनाने को मजबूर हैं।
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