रूसी मिलिट्री कमांडरों पर आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने आदेश न मानने के आरोप में अपने ही दो सैनिकों को कड़ाके की ठंड में पेड़ से बांधकर सजा दी
Russian army brutality: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूसी सेना से जुड़ा एक चौंकाने वाला और कथित रूप से अमानवीय वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में रूसी मिलिट्री कमांडरों पर आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने आदेश न मानने के आरोप में अपने ही दो सैनिकों को कड़ाके की ठंड में पेड़ से बांधकर सजा दी। वीडियो में सैनिकों को सिर्फ अंडरवियर में दिखाया गया है और उनके मुंह में जबरन बर्फ ठूंसते हुए नजर आते हैं।
यह वीडियो सामने आने के बाद रूस की सैन्य कार्यशैली और अनुशासन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया यूजर्स इसे “तालिबानी सजा” बताते हुए मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं।
वायरल वीडियो में क्या दिख रहा है?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दो सैनिक एक पेड़ से बंधे हुए नजर आते हैं। आसपास बर्फ जमी हुई है और तापमान बेहद कम बताया जा रहा है। सैनिकों के हाथ पीछे बंधे हैं और वे ठंड से कांपते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में एक वरिष्ठ अधिकारी गुस्से में चिल्लाता हुआ सुनाई देता है और सैनिकों पर आदेशों की अवहेलना का आरोप लगाता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों सैनिकों ने कथित तौर पर माफी भी मांगी। एक सैनिक वीडियो में कहता है, “मुझे माफ कर दीजिए, दोबारा ऐसा नहीं होगा।” लेकिन इसके बावजूद अधिकारी और अधिक आक्रामक हो जाता है और उसके मुंह में बर्फ ठूंसते हुए कहता है, “इसे खाओ।”
वीडियो में अधिकारी यह भी चिल्लाते हुए सुनाई देता है, “इन बेवकूफों ने बिना इजाजत अपनी जगह छोड़ने की कोशिश की और आदेश मानने से इनकार कर दिया। तुम झूठ क्यों बोल रहे हो?”
क्यों दी गई यह सजा?
अमेरिकी मीडिया आउटलेट द न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना उस समय की बताई जा रही है जब दोनों सैनिक अपने कमांडर द्वारा बताए गए स्थान पर समय पर नहीं पहुंच पाए थे। हालांकि, वह स्थान कौन सा था और उन्हें वहां क्यों भेजा गया था, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि युद्ध के दौरान रसद की कमी, भारी नुकसान और लगातार दबाव के कारण रूसी सेना में अनुशासन को सख्ती से लागू किया जा रहा है। ऐसे में आदेश न मानने या मोर्चा छोड़ने की कोशिश को गंभीर अपराध माना जा रहा है।
Russian army brutality पर मानवाधिकार संगठनों की चिंता
वीडियो वायरल होने के बाद कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस घटना की निंदा की है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वीडियो असली है, तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों और युद्ध के नियमों का खुला उल्लंघन हो सकता है।
युद्ध के दौरान सैनिकों को सजा देना सेना के आंतरिक नियमों के तहत आता है, लेकिन सार्वजनिक रूप से इस तरह की क्रूर और अपमानजनक सजा को किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता।
शांति वार्ता के बीच आया वीडियो
यह वीडियो ऐसे समय में सामने आया है जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध खत्म करने के लिए शांति वार्ता की कोशिशें चल रही हैं। हालांकि, दोनों देशों के रुख अब भी बेहद सख्त हैं।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साफ कहा है कि जब तक यूक्रेन अपने कुछ इलाकों पर दावा छोड़ने को तैयार नहीं होता, तब तक रूसी सेना को वापस बुलाने का सवाल ही नहीं उठता।
‘हम कुछ भी नहीं छोड़ेंगे’ – जेलेंस्की
यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने रूस की इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने दिसंबर में पत्रकारों से कहा था,
“हमें कुछ भी देने का कोई अधिकार नहीं है — न हमारे कानूनों के तहत, न अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत और न ही नैतिक रूप से। रूस हम पर दबाव डाल रहा है कि हम अपना इलाका छोड़ दें, लेकिन हम कुछ भी नहीं छोड़ना चाहते। ठीक इसी के लिए हम लड़ रहे हैं।”
युद्ध की थकान और सेना पर दबाव
विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय से चल रहे युद्ध ने दोनों देशों की सेनाओं पर भारी दबाव डाला है। खासतौर पर रूसी सेना को भारी नुकसान, मनोबल में गिरावट और अनुशासन की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में इस तरह के वीडियो सामने आना युद्ध की क्रूर सच्चाई और भीतरू हालात की झलक भी दिखाते हैं।
फिलहाल, रूसी अधिकारियों की ओर से इस वायरल वीडियो को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस पर टिकी हुई हैं कि रूस इस मामले में क्या कदम उठाता है।
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