Protein Deficiency in India: 70% कार्ब्स, कम Protein—दाल-रोटी काफी नहीं! जानें रोज कितना प्रोटीन जरूरी है
Protein Deficiency in India: यह बात कड़वी है, लेकिन सच है—हमारी देसी थाली स्वाद के मामले में नंबर वन है, पर जब बात पोषण यानी न्यूट्रिशन की आती है, तो हम आज भी काफी पीछे हैं। दाल-रोटी, चावल-सब्जी और पराठे का स्वाद हमें तसल्ली देता है, लेकिन शरीर को जो चाहिए—प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स—वो अक्सर हमारी थाली से गायब रहते हैं। यही वजह है कि आज थकान, कमजोरी, बाल झड़ना, कम इम्यूनिटी और लाइफस्टाइल बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।
भारत में प्रोटीन की कमी: एक नजर आंकड़ों पर
Indian Thali Nutrition को लेकर हालिया सर्वे और रिपोर्ट्स (2025–2026) एक चिंताजनक तस्वीर दिखाती हैं। आंकड़ों के अनुसार, एक औसत भारतीय अपने शरीर के प्रति किलो वजन पर सिर्फ 0.6 ग्राम प्रोटीन ही ले रहा है, जबकि जरूरत 0.8 से 1 ग्राम होती है—और एक्टिव लोगों के लिए यह मात्रा और भी ज्यादा होनी चाहिए। शहरी भारत की स्थिति तो और गंभीर है, जहां 10 में से 6 लोग रोजाना प्रोटीन युक्त भोजन नहीं लेते।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि कुल प्रोटीन सेवन का करीब 50% हिस्सा अनाज (चावल, गेहूं, मैदा) से आ रहा है, जबकि विशेषज्ञों के मुताबिक यह 32% से ज्यादा नहीं होना चाहिए। अनाज से मिलने वाला प्रोटीन “लो क्वालिटी” माना जाता है, क्योंकि इससे शरीर को सभी जरूरी अमीनो एसिड पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते।
केवल दाल काफी नहीं है
Low Protein Diet India की समस्या को लेकर अक्सर लोग यह मान लेते हैं—“मैं शाकाहारी हूं, रोज दाल खाता हूं, मेरा प्रोटीन पूरा है।” लेकिन हकीकत यह है कि अकेली दाल एक Complete Protein नहीं होती, क्योंकि इसमें सभी जरूरी अमीनो एसिड मौजूद नहीं होते। इसी वजह से शाकाहारी लोगों में कमजोरी और मसल लॉस ज्यादा देखने को मिलता है।
हालांकि अच्छी खबर यह है कि अगर दाल को सही चीजों के साथ खाया जाए—जैसे दाल + चावल—तो यह मिलकर एक Complete Protein बन जाता है। इसी तरह दाल-रोटी, दाल-बाजरा या दाल-ज्वार जैसे संयोजन भी बेहतर और संतुलित विकल्प माने जाते हैं।
विटामिन B12 और D: छुपा हुआ खतरा
Vitamin Deficiency India आज एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। इकोनॉमिक सर्वे 2026 के अनुसार, भारतीय डाइट में विटामिन और मिनरल्स की भारी कमी साफ तौर पर देखने को मिलती है।
विटामिन B12 की कमी शाकाहारी लोगों में सबसे ज्यादा पाई जाती है। वहीं, विटामिन D की स्थिति और भी चिंताजनक है—करीब 70–80% भारतीय इसकी कमी से जूझ रहे हैं, क्योंकि लोग धूप से बचते हैं और बाहर कम समय बिताते हैं।
इन विटामिन्स की कमी के कारण थकान, शरीर में दर्द, चिड़चिड़ापन और कमजोर इम्यूनिटी जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं।
एक और बड़ी गलती: ओवरकुकिंग
हम सब्जियों को इतना ज्यादा पकाते हैं कि उनके जरूरी विटामिन गर्मी में नष्ट हो जाते हैं। ऊपर से ज्यादा तेल और तड़का—जिससे स्वाद तो बढ़ता है, लेकिन पोषण घट जाता है।
भारतीय डाइट को कैसे सुधारा जाए?
1. प्रोटीन सोर्स बढ़ाएं
- पनीर और टोफू: 100 ग्राम पनीर में लगभग 18–20 ग्राम प्रोटीन।
- सोया चंक्स: इसे “गरीबों का मीट” कहा जाता है—50% तक प्रोटीन।
- दही / हंग कर्ड / ग्रीक योगर्ट: साधारण दही से ज्यादा प्रोटीन।
- अंडे (अगर खाते हैं): सस्ते और सबसे बेहतरीन प्रोटीन सोर्स।
- नट्स और सीड्स: मूंगफली, चिया सीड्स, अलसी।
2. अनाज पर निर्भरता कम करें
पूरी थाली रोटी-चावल से भरने के बजाय सब्जियों, दालों और प्रोटीन का हिस्सा बढ़ाएं।
3. Rainbow Plate अपनाएं
अपनी थाली में कम से कम तीन अलग-अलग रंग की सब्जियां रखें—हरी, लाल, पीली। इससे अलग-अलग विटामिन और मिनरल्स मिलते हैं।
4. विटामिन D और B12 का ध्यान
- हफ्ते में 2–3 बार सुबह की 15–20 मिनट की धूप लें।
- जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स या फोर्टिफाइड फूड लें।
आपको रोज कितना प्रोटीन चाहिए?
प्रोटीन की जरूरत आपके वजन और एक्टिविटी पर निर्भर करती है:
- कम एक्टिव (ऑफिस वर्क): 0.8–1 ग्राम प्रति किलो वजन
- मॉडरेट एक्टिव (वॉक/हल्की एक्सरसाइज): 1.2–1.5 ग्राम
- जिम/हेवी वर्कआउट: 1.6–2 ग्राम
उदाहरण: अगर आपका वजन 70 किलो है और आप सामान्य लाइफस्टाइल जीते हैं, तो आपको करीब 60–65 ग्राम प्रोटीन रोज चाहिए।
एक आम गलतफहमी
“एक कटोरी दाल पी ली, प्रोटीन पूरा हो गया।”
असल में:
- 1 कटोरी दाल: सिर्फ 6–7 ग्राम प्रोटीन
- 1 गिलास दूध: ~8 ग्राम
- 1 अंडा: ~6 ग्राम
- 100 ग्राम पनीर: ~18–20 ग्राम
यानि 60 ग्राम प्रोटीन के लिए पूरे दिन में variety जरूरी है।
जरूरी चेतावनी
अगर आप प्रोटीन बढ़ा रहे हैं, तो पानी ज्यादा पीना बेहद जरूरी है। इससे किडनी पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम होता है।
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