बदलती लाइफस्टाइल, अनियमित खानपान, ज्यादा कैफीन, मानसिक तनाव और नींद की कमी आज के दौर में इस जरूरी मिनरल की कमी को तेजी से बढ़ा रहे हैं।
अगर आपको अक्सर बिना वजह थकान महसूस होती है, ठीक से नींद नहीं आती, हल्की-सी फिजिकल एक्टिविटी के बाद मांसपेशियों में खिंचाव या ऐंठन होने लगती है, घबराहट रहती है या बार-बार सिरदर्द परेशान करता है, तो यह सिर्फ स्ट्रेस नहीं बल्कि Magnesium deficiency का संकेत भी हो सकता है। बदलती लाइफस्टाइल, अनियमित खानपान, ज्यादा कैफीन, मानसिक तनाव और नींद की कमी आज के दौर में इस जरूरी मिनरल की कमी को तेजी से बढ़ा रहे हैं।
मैग्नीशियम क्यों है शरीर के लिए इतना जरूरी?
मैग्नीशियम शरीर के लिए एक अत्यंत आवश्यक मिनरल है, जो नर्व सिस्टम, मसल फंक्शन, हार्ट बीट, एनर्जी प्रोडक्शन और ब्रेन हेल्थ से सीधे जुड़ा होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, शरीर में होने वाली 300 से ज्यादा एंजाइम प्रक्रियाएं मैग्नीशियम पर निर्भर करती हैं। यही मिनरल मेटाबॉलिज्म को सही रखता है, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को संतुलित करता है और हार्ट को नियमित रूप से धड़कने में मदद करता है।
शरीर का अधिकांश मैग्नीशियम हड्डियों और मांसपेशियों में स्टोर रहता है, जबकि थोड़ी मात्रा खून में होती है। जैसे ही खून में इसका स्तर गिरता है, शरीर के कई जरूरी काम प्रभावित होने लगते हैं। चूंकि शरीर खुद मैग्नीशियम नहीं बना सकता, इसलिए इसे डाइट या सप्लीमेंट के जरिए लेना जरूरी होता है।
Magnesium deficiency से क्या-क्या दिक्कतें हो सकती हैं?
मैग्नीशियम की कमी के शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के होते हैं, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं। सबसे पहले थकान, कमजोरी और मांसपेशियों में जकड़न महसूस होती है। कई लोगों को पैरों में ऐंठन, झनझनाहट या मसल फड़कने की समस्या होने लगती है।
दिमाग पर असर पड़ने से बेचैनी, चिड़चिड़ापन, घबराहट, नींद न आना और सिरदर्द जैसी शिकायतें बढ़ जाती हैं। लंबे समय तक कमी बनी रहने पर हार्ट बीट अनियमित हो सकती है, हाई ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और डायबिटीज कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है। गंभीर मामलों में दौरे पड़ना या बेहोशी जैसी स्थिति भी बन सकती है।
मैग्नीशियम ग्लाइसिनेट क्या है और क्यों है खास?
मैग्नीशियम ग्लाइसिनेट मैग्नीशियम का एक खास रूप है, जिसमें इसे अमीनो एसिड ग्लाइसिन के साथ जोड़ा जाता है। इसे ‘किलेटेड फॉर्म’ कहा जाता है, जो शरीर में बहुत आसानी से अवशोषित हो जाता है। यही वजह है कि यह अन्य मैग्नीशियम सप्लीमेंट्स की तुलना में ज्यादा प्रभावी माना जाता है।
मैग्नीशियम ऑक्साइड जैसे कुछ फॉर्म पचने में कमजोर होते हैं और डायरिया या पेट खराब कर सकते हैं, जबकि ग्लाइसिनेट पेट के लिए ज्यादा सुरक्षित होता है। यह बिना पाचन संबंधी दिक्कतों के ब्लड में पहुंच जाता है और नर्व, मसल्स और दिमाग पर बेहतर असर दिखाता है।
तनाव, एंग्जाइटी और नींद में कैसे करता है मदद
मैग्नीशियम दिमाग में मौजूद GABA न्यूरोट्रांसमीटर को एक्टिव करता है, जो दिमाग को शांत रखने में मदद करता है। इससे ओवरथिंकिंग कम होती है और मानसिक रिलैक्सेशन मिलता है। साथ ही यह स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल को कंट्रोल करता है, जिससे घबराहट और बेचैनी घटती है।
ग्लाइसिन अमीनो एसिड खुद भी नर्वस सिस्टम को शांत करने वाला माना जाता है। इसी वजह से मैग्नीशियम ग्लाइसिनेट लेने से नींद जल्दी आती है, नींद गहरी होती है और बार-बार नींद टूटने की समस्या कम होती है। यह किसी नींद की गोली की तरह बेहोश नहीं करता, बल्कि शरीर को नेचुरल तरीके से रिलैक्स करता है।
कौन से मरीजों के लिए फायदे
मैग्नीशियम इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाने में मदद करता है, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल बेहतर होता है। डायबिटीज के मरीजों में इसकी कमी आम देखी जाती है। यह ब्लड वेसल्स को रिलैक्स करता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद मिलती है।
हार्ट के लिए भी मैग्नीशियम बेहद जरूरी है। यह कैल्शियम चैनल्स को बैलेंस करके हार्ट बीट को नियमित रखता है और कुछ हद तक कोलेस्ट्रॉल प्रोफाइल पर भी सकारात्मक असर डाल सकता है। डॉक्टर की सलाह से लिया जाए तो यह हार्ट पेशेंट्स के लिए सपोर्टिव सप्लीमेंट बन सकता है।
मसल क्रैम्प, माइग्रेन और थकान में असर
मसल क्रैम्प अक्सर तब होते हैं, जब मांसपेशियां रिलैक्स नहीं कर पातीं। मैग्नीशियम ग्लाइसिनेट मसल रिलैक्सेशन में मदद करता है, जिससे ऐंठन और दर्द कम होता है। यह कोशिकाओं के ‘पावरहाउस’ माइटोकॉन्ड्रिया में एनर्जी प्रोडक्शन बढ़ाकर थकान भी घटाता है।
माइग्रेन के मरीजों में भी मैग्नीशियम की कमी आम पाई गई है। यह नर्व सिग्नल्स को स्टेबल करता है और ब्लड वेसल्स को खुला रखता है, जिससे माइग्रेन अटैक की फ्रीक्वेंसी और तीव्रता कम हो सकती है।
हड्डियों, विटामिन-D और किडनी स्टोन से संबंध
मैग्नीशियम विटामिन-D को एक्टिव फॉर्म में बदलने के लिए जरूरी है। बिना मैग्नीशियम के विटामिन-D और कैल्शियम भी ठीक से काम नहीं कर पाते, जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। यह हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम और विटामिन-D के साथ मिलकर काम करता है।
इसके अलावा मैग्नीशियम ऑक्सालेट के अवशोषण को कम करके किडनी स्टोन बनने के खतरे को भी घटा सकता है, खासकर उन लोगों में जिन्हें बार-बार स्टोन की समस्या होती है।
सही डोज, समय और सावधानियां
आमतौर पर 200–400 mg एलिमेंटल मैग्नीशियम प्रतिदिन सुरक्षित मानी जाती है। इसे रात के खाने के बाद या सोने से एक घंटा पहले लेना ज्यादा फायदेमंद होता है। हालांकि किडनी के मरीज, लो ब्लड प्रेशर वाले लोग, गर्भवती महिलाएं और जो लोग कुछ खास दवाएं ले रहे हैं, उन्हें इसे लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
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