केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के सम्मान और उसके औपचारिक उपयोग को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है।
Vande Mataram guidelines: केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के सम्मान और उसके औपचारिक उपयोग को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी 10 पन्नों के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अब सभी सरकारी कार्यक्रमों, सरकारी शिक्षण संस्थानों के आयोजनों और अन्य औपचारिक अवसरों पर ‘वंदे मातरम’ बजाना अनिवार्य होगा। इसके दौरान उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति का सम्मान में खड़ा होना जरूरी रहेगा।
सरकार का कहना है कि इन निर्देशों का उद्देश्य राष्ट्रगीत के प्रति स्पष्ट प्रोटोकॉल तय करना और राष्ट्रीय एकता की भावना को सुदृढ़ करना है।
पूरा संस्करण अब अनिवार्य
नई Vande Mataram guidelines के तहत अब ‘वंदे मातरम’ का छह पैराग्राफ वाला पूरा संस्करण बजाया जाएगा, जिसकी अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकेंड (190 सेकेंड) है। अब तक प्रचलन में इसके केवल पहले दो पैराग्राफ ही गाए जाते थे।
गीत के पूर्ण संस्करण में भारत माता को दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती के रूप में चित्रित किया गया है। सरकार का मानना है कि मूल रचना को संपूर्णता में प्रस्तुत करना सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
किन अवसरों पर बजेगा ‘वंदे मातरम’
गृह मंत्रालय की Vande Mataram guidelines के अनुसार निम्न अवसरों पर राष्ट्रगीत बजाया जाना अनिवार्य होगा:
- तिरंगा फहराने के समय
- किसी औपचारिक समारोह में राष्ट्रपति के आगमन और प्रस्थान पर
- राष्ट्रपति के राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद में
- राज्यपाल या उपराज्यपाल के राज्य स्तरीय समारोहों में आगमन व प्रस्थान के समय
- नागरिक अलंकरण समारोह (भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण, पद्मश्री)
- परेड के दौरान जब राष्ट्रध्वज लाया जाए
यदि किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों बजाए जाने हों, तो पहले ‘वंदे मातरम’ और उसके बाद ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया जाएगा।
राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ का प्रोटोकॉल
राष्ट्रगान की अवधि 52 सेकेंड निर्धारित है। यह निम्न अवसरों पर बजाया जाएगा:
- राष्ट्रपति, राज्यपाल या उपराज्यपाल को नेशनल सैल्यूट देते समय
- सरकारी परेड और आधिकारिक कार्यक्रमों में
- राष्ट्रपति के राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद में
- सेना या रेजीमेंट को ध्वज प्रदान करते समय
- खेल आयोजनों में
- राजनयिक स्वागत समारोहों में (जहां पहले अतिथि देश का राष्ट्रगान और फिर भारत का राष्ट्रगान बजेगा)
दोनों ही स्थितियों में लोगों को सावधान मुद्रा में खड़े रहना होगा और स्पष्ट व समवेत स्वर में गायन सुनिश्चित करना होगा।
सिनेमा हॉल को मिली छूट
गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है कि ये नियम सिनेमा हॉल पर लागू नहीं होंगे। यानी फिल्मों के प्रदर्शन से पहले ‘वंदे मातरम’ बजाना या दर्शकों का खड़ा होना अनिवार्य नहीं होगा। इससे पहले राष्ट्रगान को लेकर सिनेमाघरों में खड़े होने के मुद्दे पर देशभर में बहस हो चुकी है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
‘वंदे मातरम’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 को की थी। यह 1882 में उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में प्रकाशित हुआ। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे सार्वजनिक मंच से गाया था, जिसके बाद यह स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरक नारा बन गया।
ब्रिटिश शासन के खिलाफ आंदोलनों में ‘वंदे मातरम’ केवल गीत नहीं, बल्कि एक क्रांतिकारी उद्घोष के रूप में उभरा। स्वतंत्रता सेनानियों के लिए यह देशभक्ति का प्रतीक था।
संसद में राजनीतिक बहस
पिछले वर्ष राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संसद के शीतकालीन सत्र में इस विषय पर विशेष चर्चा हुई थी। लोकसभा और राज्यसभा में इसे लेकर तीखी बहस देखने को मिली।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए उठा रही है, खासकर पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के चुनावी संदर्भ में। वहीं भाजपा ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति के तहत राष्ट्रगीत के कुछ हिस्सों को सीमित रखने का आरोप लगाया।
भाजपा ने 1937 में जवाहरलाल नेहरू द्वारा सुभाष चंद्र बोस को लिखे एक पत्र का उल्लेख किया, जिसमें कथित रूप से कुछ पंक्तियों को लेकर संवेदनशीलता की बात कही गई थी।
Vande Mataram guidelines पर प्रधानमंत्री का बयान
8 दिसंबर 2025 को लोकसभा में बहस की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ के साथ ऐतिहासिक अन्याय हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के दबाव में इसके कुछ हिस्सों को अलग कर दिया।
प्रधानमंत्री ने अपने लगभग एक घंटे के भाषण में 121 बार ‘वंदे मातरम’ का उल्लेख किया और इसे राष्ट्रीय सम्मान का विषय बताया।
संवैधानिक स्थिति और सामाजिक प्रतिक्रिया
संविधान में ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान के रूप में आधिकारिक मान्यता प्राप्त है, जबकि ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगीत का दर्जा है। दोनों का महत्व अलग-अलग संदर्भों में स्थापित है।
नई गाइडलाइन पर समाज में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। एक वर्ग इसे सांस्कृतिक पुनर्स्थापना और राष्ट्रीय गौरव से जोड़ रहा है, जबकि कुछ समूह धार्मिक संवेदनशीलता और विविधता के मुद्दे उठा रहे हैं।
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