Husband Planned Wife Murder: गाजियाबाद से सामने आया यह मामला सिर्फ एक हत्या नहीं है, बल्कि उस सोच का आईना है जहाँ रिश्तों में संवाद की जगह हिंसा, और झगड़ों की जगह साजिश ले लेती है। पत्नी के एक ताने—“गंजा”—से शुरू हुआ घरेलू विवाद धीरे-धीरे इतना ज़हरीला हो गया कि पति ने अपनी ही पत्नी की हत्या की साजिश रच डाली। हैरानी की बात यह रही कि हत्या के बाद वही पति खुद थाने पहुँचा और पड़ोसियों को फँसाने की कोशिश करने लगा।
लेकिन पुलिस जांच ने इस पूरी कहानी को उलट कर रख दिया।
घरेलू झगड़ा, जो बन गया जानलेवा साजिश
पुलिस सूत्रों के अनुसार, पति-पत्नी के बीच लंबे समय से घरेलू तनाव चल रहा था। छोटी-छोटी बातों पर विवाद होता था, ताने दिए जाते थे और बात-बात पर अपमान किया जाता था। पत्नी द्वारा बार-बार पति को “गंजा” कहकर चिढ़ाना आरोपी के भीतर गुस्से और हीन भावना को जन्म दे रहा था।
यह गुस्सा सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं रहा। आरोपी पति ने पत्नी को रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया।
दो बार नाकाम, तीसरी बार पूरी तैयारी
जांच में सामने आया कि आरोपी पति इससे पहले भी दो बार पत्नी की हत्या की कोशिश कर चुका था, लेकिन दोनों बार योजना फेल हो गई। इसके बाद उसने तीसरी बार बेहद सोच-समझकर, पूरी प्लानिंग के साथ वारदात को अंजाम देने का फैसला किया।
इस बार उसने अकेले नहीं, बल्कि पेशेवर अपराधियों की मदद ली।
50 हजार की सुपारी, 15 हजार एडवांस
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, आरोपी ने विनीत, राज और अर्जुन के साथ मिलकर इस हत्या की साजिश रची। हथियार की व्यवस्था विभोर शर्मा नाम के व्यक्ति ने की, जो पहले से ही कई आपराधिक मामलों में वांछित था।
हत्या के लिए 50 हजार रुपये की डील तय हुई, जिसमें से 15 हजार रुपये एडवांस दिए गए। योजना बेहद शातिर थी—हत्या ऐसी दिखे कि शक किसी और पर जाए, और पति खुद को पीड़ित साबित कर सके।
बाजार जाने के बहाने निकले, रास्ते में चली गोली
25 जनवरी 2026 को आरोपी पति अपनी पत्नी को बाजार ले जाने के बहाने मोटरसाइकिल पर बैठाकर घर से निकला। रास्ते में पहले से तय स्थान पर विनीत मौजूद था।
जैसे ही मौका मिला, पत्नी पर गोली चला दी गई।
वारदात के तुरंत बाद पति ने वही किया, जो उसने पहले से तय कर रखा था—वह सीधे थाने पहुँचा और पड़ोसियों पर पुरानी रंजिश के चलते हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा दिया।
कहानी में झोल, पुलिस को हुआ शक
शुरुआत में मामला पड़ोसियों के आपसी विवाद जैसा लग रहा था, लेकिन पुलिस ने सिर्फ बयान पर भरोसा नहीं किया।
डीसीपी ग्रामीण एस.एन. तिवारी के अनुसार—
- आरोपी पति के बयान बार-बार बदल रहे थे
- घटना के समय की टाइमलाइन मेल नहीं खा रही थी
- कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) में संदिग्ध संपर्क सामने आए
- पैसों के लेनदेन के सबूत मिले
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, साफ होता गया कि शिकायतकर्ता खुद ही इस अपराध का मास्टरमाइंड है।
मास्टरमाइंड वही निकला, जो इंसाफ मांग रहा था
पुलिस ने खुलासा करते हुए बताया कि पत्नी की हत्या पति की साजिश थी और पड़ोसियों को फँसाने के लिए थाने में झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया था।
इस मामले में
विनीत राजपूत, विभोर शर्मा, हरिशंकर, राज बैसला और अर्जुन को गिरफ्तार किया गया है।
पेशेवर अपराधी भी शामिल
जांच में यह भी सामने आया कि विभोर शर्मा एक शातिर अपराधी है, जिसके खिलाफ गाजियाबाद और दिल्ली में करीब 20 आपराधिक मामले दर्ज हैं। बाकी आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की भी गहन जांच की जा रही है।
सिर्फ एक हत्या नहीं, समाज के लिए चेतावनी
यह मामला सिर्फ एक महिला की हत्या का नहीं है, बल्कि उस मानसिकता का उदाहरण है जहाँ
- रिश्तों में संवाद खत्म हो जाता है
- अपमान को अहंकार बना लिया जाता है
- और समस्या का हल हत्या में खोजा जाता है
घरेलू विवाद अगर समय रहते नहीं सुलझाए जाएँ, तो वे किस हद तक जा सकते हैं—यह केस उसकी खौफनाक मिसाल है।
सवाल जो बाकी रह जाते हैं
- क्या घरेलू हिंसा को आज भी “घर का मामला” कहकर नजरअंदाज किया जाता रहेगा?
- क्या मानसिक प्रताड़ना को गंभीरता से लेने का वक्त नहीं आ गया?
- और क्या अपराधी वाकई इतने शातिर हो चुके हैं कि खुद पीड़ित बनकर सिस्टम को गुमराह कर सकें?
गाजियाबाद का यह मामला बताता है कि अपराध अब सिर्फ गली-मोहल्लों में नहीं, बल्कि रिश्तों के भीतर पनप रहा है। और अगर समय रहते सच्चाई सामने न आए, तो इंसाफ सबसे पहले मर जाता है।
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