चुनाव आयोग द्वारा घोषित अनौपचारिक नतीजों के अनुसार बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को संसद में स्पष्ट बहुमत मिल गया है।
Bangladesh government formation: बांग्लादेश में आम चुनाव के बाद राजनीतिक तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। चुनाव आयोग द्वारा घोषित अनौपचारिक नतीजों के अनुसार बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को संसद में स्पष्ट बहुमत मिल गया है। 300 सदस्यीय संसद में सरकार बनाने के लिए कम से कम 151 सीटों की आवश्यकता होती है और बीएनपी इस आंकड़े को पार करती दिख रही है।
हालांकि बहुमत मिलने के बावजूद नई सरकार के गठन और सत्ता हस्तांतरण की संवैधानिक प्रक्रिया को लेकर कई सवाल सामने आ रहे हैं। खासतौर पर शपथ ग्रहण और सरकार गठन की औपचारिकताओं को लेकर चर्चा तेज है।
कब होगी शपथ? क्या है संवैधानिक समयसीमा
आम तौर पर माना जाता है कि चुनाव परिणाम आने के तीन दिनों के भीतर निर्वाचित सांसदों को शपथ दिला दी जाती है। लेकिन संवैधानिक व्यवस्था थोड़ी अलग है।
संविधान के अनुच्छेद 148 के अनुसार, चुनाव परिणामों को सरकारी गजट में अधिसूचित किए जाने के तीन दिनों के भीतर शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाना अनिवार्य है। यानी चुनाव आयोग द्वारा जारी अनौपचारिक नतीजों के आधार पर शपथ नहीं होती, बल्कि गजट अधिसूचना के बाद प्रक्रिया शुरू होती है।
इस कारण चुनाव परिणामों की घोषणा और गजट अधिसूचना के बीच कुछ समय का अंतर संभव है। अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के प्रेस सचिव ने संकेत दिया है कि शपथ ग्रहण में 18 फरवरी से अधिक देरी होने की संभावना नहीं है। उनके अनुसार आधिकारिक परिणाम जारी होने के तीन दिनों के भीतर ही यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
यदि सब कुछ सुचारू रहा तो चुनाव के लगभग छह दिनों के भीतर नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
शपथ कौन दिलाएगा?
इस बार शपथ ग्रहण को लेकर एक व्यावहारिक समस्या भी सामने आई है। परंपरा के अनुसार संसद के स्पीकर ही निर्वाचित सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाते हैं। लेकिन हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और आंदोलनों के बाद देश में फिलहाल न तो संसद अस्तित्व में है और न ही स्पीकर पद पर कोई है। डिप्टी स्पीकर भी जेल में हैं।
ऐसी स्थिति में संविधान के अनुच्छेद 148 का सहारा लिया जाएगा। इस अनुच्छेद में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि निर्धारित व्यक्ति शपथ नहीं दिला पाता तो वैकल्पिक व्यवस्था लागू होगी।
संविधान के मुताबिक दो विकल्प मौजूद हैं। पहला, राष्ट्रपति किसी उपयुक्त व्यक्ति को शपथ दिलाने के लिए नामित कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर मुख्य न्यायाधीश को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है।
दूसरा विकल्प यह है कि यदि राष्ट्रपति द्वारा नामित व्यक्ति तीन दिनों के भीतर शपथ नहीं दिला पाता, तो अगले तीन दिनों के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त यह जिम्मेदारी निभाएंगे।
अंतरिम सरकार के कानून मंत्रालय के सलाहकार ने स्पष्ट किया है कि सरकार सत्ता हस्तांतरण में अनावश्यक देरी नहीं चाहती। इसलिए प्राथमिकता यह होगी कि राष्ट्रपति किसी व्यक्ति को नामित कर जल्द से जल्द शपथ प्रक्रिया पूरी कराई जाए।
सरकार गठन की औपचारिक प्रक्रिया
निर्वाचित सांसदों के शपथ लेने के बाद अगला चरण सरकार गठन का होता है। इस प्रक्रिया की शुरुआत राष्ट्रपति के स्तर से होती है। राष्ट्रपति बहुमत हासिल करने वाली पार्टी या गठबंधन के नेता को सरकार बनाने का आमंत्रण देते हैं।
संविधान के अनुच्छेद 56 के अनुसार, राष्ट्रपति उस सांसद को प्रधानमंत्री नियुक्त करेंगे जिसे उनके अनुसार संसद के अधिकांश सदस्यों का समर्थन प्राप्त है। बहुमत दल का नेता पहले संसद का नेता चुना जाता है और फिर प्रधानमंत्री पद की शपथ लेता है।
प्रधानमंत्री के साथ मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य भी पद और गोपनीयता की शपथ लेते हैं। शपथ ग्रहण के साथ ही उन्हें अपने-अपने पदों के अधिकार और दायित्व प्राप्त हो जाते हैं।
शपथ के बाद ही कार्यभार संभालना मान्य
संविधान स्पष्ट करता है कि किसी भी निर्वाचित व्यक्ति के लिए कार्यभार संभालने से पहले शपथ लेना अनिवार्य है। शपथ ग्रहण संपन्न होते ही यह माना जाता है कि संबंधित व्यक्ति ने आधिकारिक रूप से पदभार ग्रहण कर लिया है।
इस पूरी प्रक्रिया के जरिए सत्ता का हस्तांतरण संपन्न होता है और नई सरकार औपचारिक रूप से कार्य शुरू करती है।
चुनाव परिणामों के बाद अब निगाहें गजट अधिसूचना, शपथ ग्रहण और राष्ट्रपति द्वारा सरकार गठन के आमंत्रण पर टिकी हैं। यदि संवैधानिक प्रक्रिया तय समयसीमा में पूरी होती है तो बांग्लादेश में नई सरकार जल्द ही जिम्मेदारी संभाल सकती है।
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