भारत और फ्रांस के बीच करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की विशाल रक्षा डील पर सहमति बनने की उम्मीद है।
India France defence deal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों आज मुंबई में महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस मुलाकात के दौरान भारत और फ्रांस के बीच करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की विशाल रक्षा डील पर सहमति बनने की उम्मीद है। कीमत के लिहाज से यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी सैन्य खरीद मानी जा रही है। इस समझौते के तहत भारतीय वायुसेना को 114 राफेल फाइटर जेट मिलेंगे, जिससे देश की हवाई ताकत में बड़ा इजाफा होगा।
बैठक दोपहर 3:15 बजे मुंबई के लोक भवन में आयोजित होगी। इसमें रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, इंडो-पैसिफिक रणनीति, उभरती प्रौद्योगिकियां, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वैश्विक भू-राजनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। दोनों नेता शाम 5:15 बजे ‘भारत-फ्रांस इनोवेशन ईयर 2026’ का औपचारिक उद्घाटन भी करेंगे और उद्योगपतियों, स्टार्टअप संस्थापकों, शोध विशेषज्ञों तथा इनोवेशन से जुड़े प्रतिनिधियों को संबोधित करेंगे।
मैक्रों का चौथा भारत दौरा
राष्ट्रपति बनने के बाद इमैनुएल मैक्रों का यह चौथा भारत दौरा है। इससे पहले वे मार्च 2018 में भारत आए थे। इसके बाद सितंबर 2023 में जी20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने और जनवरी 2024 में गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भारत पहुंचे थे। 17 से 19 फरवरी तक चलने वाले इस दौरे के दौरान वे दिल्ली में आयोजित ‘AI इम्पैक्ट समिट’ में भी हिस्सा लेंगे।
भारत और फ्रांस के बीच 1998 से रणनीतिक साझेदारी है। दोनों देश रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और उच्च प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में घनिष्ठ सहयोग करते रहे हैं। मौजूदा दौरे को इस साझेदारी को नई ऊंचाई देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
India France defence deal में 114 राफेल जेट
नई डील की सबसे खास बात यह है कि 114 विमानों में से 24 अत्याधुनिक ‘सुपर राफेल’ होंगे। इन्हें F-5 वर्जन कहा जा रहा है, जिन्हें फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन विकसित कर रही है। फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास F-3 वेरिएंट के 36 राफेल जेट हैं, जिन्हें 4.5 जेनरेशन फाइटर माना जाता है और इनमें स्टेल्थ क्षमताएं तथा परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता भी है।
नई डील के तहत अधिकांश जेट F-4 वर्जन के होंगे, जिनमें उन्नत एवियोनिक्स, बेहतर रडार और अपग्रेडेड नेटवर्क क्षमताएं शामिल होंगी। F-4 जेट की डिलीवरी 2028-29 से शुरू होने की संभावना है, जबकि 2030 के बाद मिलने वाले जेट F-5 यानी सुपर राफेल होंगे। यूरोपीय मानकों के अनुसार F-5 को और भी उन्नत श्रेणी में रखा जा रहा है। इस सौदे के बाद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास इतने आधुनिक राफेल जेट होंगे।
मेक इन इंडिया के तहत 96 जेट का निर्माण
इस रक्षा समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि 114 में से 96 राफेल जेट भारत में ही निर्मित किए जाएंगे। केवल 18 विमान फ्लाई-अवे कंडीशन में सीधे फ्रांस से मिलेंगे। शेष विमानों का उत्पादन भारत में होगा, जिनमें लगभग 60 प्रतिशत तक स्वदेशी पुर्जों का इस्तेमाल किया जाएगा।
दसॉ एविएशन भारतीय साझेदार के साथ मिलकर उत्पादन करेगी। हाल ही में कंपनी ने अपने जॉइंट वेंचर ‘दसॉ रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड’ (DRAL) में हिस्सेदारी 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 51 प्रतिशत कर ली है। इस परियोजना में इंजन निर्माता साफ्रान और एवियोनिक्स कंपनी थेल्स भी सहयोग करेंगी। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पूरा होने के बाद विमानों में स्वदेशी हिस्सेदारी 55-60 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है।
सभी 114 जेट में भारतीय हथियार, मिसाइल और गोला-बारूद को एकीकृत किया जाएगा। साथ ही सुरक्षित डेटा लिंक सिस्टम लगाया जाएगा, जिससे ये विमान भारतीय रडार और सेंसर नेटवर्क से सीधे जुड़ सकेंगे।
पहले 36 राफेल से मिला अनुभव
भारत पहले ही 2016 में फ्रांस से 36 राफेल जेट खरीद चुका है। उस समय यह सौदा लगभग 7.8 अरब यूरो (करीब 59 हजार करोड़ रुपये) में हुआ था। इन विमानों की डिलीवरी 2019 से शुरू हुई और 2022 तक सभी जेट भारतीय वायुसेना को मिल गए। इन्हें अंबाला और हासीमारा एयरबेस पर तैनात किया गया है। मीटियोर, SCALP और MICA जैसी उन्नत मिसाइलों से लैस ये विमान वायुसेना की मारक क्षमता में बड़ा सुधार लेकर आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उसी अनुभव के आधार पर अब बड़े पैमाने पर यह नई डील की जा रही है।
‘भारत-फ्रांस इनोवेशन ईयर 2026’ पर जोर
दोनों देश वर्ष 2026 को ‘भारत-फ्रांस इनोवेशन ईयर’ के रूप में मना रहे हैं। इसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीपटेक, अंतरिक्ष, रक्षा तकनीक और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है। AI के क्षेत्र में दोनों देश एक साझा और जिम्मेदार रोडमैप पर काम कर रहे हैं।
मैक्रों के साथ 110 से अधिक फ्रांसीसी कंपनियों का प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है, जो मुंबई और बेंगलुरु में भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी पर चर्चा करेगा। वर्तमान में भारत में 1,100 से अधिक फ्रांसीसी कंपनियां सक्रिय हैं, जो करीब 3.5 लाख लोगों को रोजगार दे रही हैं। यह दौरा रक्षा के साथ-साथ तकनीकी और आर्थिक सहयोग को भी नई गति देने वाला माना जा रहा है।
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