JEE Main 2026 में गूंजा यूपी और कोटा का नाम! 99.99 परसेंटाइल के साथ रचा इतिहास, मां के त्याग और मेहनत ने दिलाई कामयाबी
JEE Main 2026: देश की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में से एक जेईई मेन 2026 का रिजल्ट जैसे ही जारी हुआ, कई घरों में खुशियों की लहर दौड़ गई। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बड़ौत क्षेत्र के रहने वाले उत्कर्ष ने यूपी में पहला स्थान हासिल कर न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन कर दिया। पूरे देश में उन्होंने 13वीं रैंक हासिल की और 99.99 परसेंटाइल अंक प्राप्त किए। यह उपलब्धि किसी सपने से कम नहीं है।
बड़ौत का बेटा, पूरे प्रदेश का गौरव
JEE Main 2026 Topper उत्कर्ष प्रवेंद्र कॉलोनी के निवासी हैं। उनके पिता दीपेंद्र कुमार खोखर मेरठ की सकौती चीनी मिल में महाप्रबंधक हैं, जबकि माता गीता देवी जनता वैदिक इंटर कॉलेज में शिक्षिका हैं। पढ़ाई का माहौल उन्हें घर से ही मिला। वह लूंब गांव के एलपाइन पब्लिक स्कूल में कक्षा 12वीं के छात्र हैं और बोर्ड परीक्षा के साथ-साथ जेईई मेन की तैयारी भी करते रहे।
उत्कर्ष ने किसी बड़े कोचिंग संस्थान की बजाय ऑनलाइन कोचिंग का सहारा लिया। उन्होंने रोजाना सात से आठ घंटे पढ़ाई की और समय का पूरा उपयोग किया। उनका कहना है, “मैंने एक सख्त टाइम टेबल बनाया और उसी के अनुसार पढ़ाई की। अब मेरा लक्ष्य जेईई एडवांस्ड है और आगे आईआईटी दिल्ली से कंप्यूटर साइंस में बीटेक करना चाहता हूं।”
दिलचस्प बात यह है कि उत्कर्ष इससे पहले 2024 में सीबीएसई बोर्ड की 10वीं परीक्षा में भी जिले में टॉप कर चुके हैं। यानी यह सफलता अचानक नहीं, बल्कि वर्षों की लगातार मेहनत का नतीजा है।
कोटा में जुड़वा भाइयों का कमाल
Student Motivation Story के तहत कोटा से एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। ओडिशा के भुवनेश्वर निवासी जुड़वा भाई—महरूफ अहमद खान और मसरूर अहमद खान—ने जेईई मेन 2026 में 300 में से 285 अंक हासिल कर सभी को चौंका दिया। खास बात यह रही कि दोनों ने बिल्कुल समान स्कोर प्राप्त किया।
दोनों भाइयों का जन्म 7 मई 2008 को हुआ था। बचपन से साथ पढ़ाई, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और एक-दूसरे को आगे बढ़ाने की भावना ने उन्हें मजबूत बनाया। दसवीं कक्षा में भी दोनों ने शानदार प्रदर्शन किया—महरूफ ने 95.2% और मसरूर ने 97.2% अंक हासिल किए।
जेईई एडवांस्ड की तैयारी के लिए दोनों कोटा पहुंचे। दिन में कोचिंग और रात में रिविजन उनकी नियमित दिनचर्या बन गई। लगातार टेस्ट, डाउट सेशन और अनुशासन ने उनके आत्मविश्वास को और भी मजबूत किया।
मां का त्याग बना सबसे बड़ी ताकत
इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा योगदान उनकी मां डॉ. जीनत बेगम का रहा। पेशे से गायनोलॉजिस्ट डॉ. जीनत ने अपने बेटों के सपनों को पूरा करने के लिए सरकारी नौकरी तक छोड़ दी और पिछले तीन वर्षों से कोटा में रहकर उनका मार्गदर्शन किया।
डॉ. जीनत कहती हैं, “बच्चों को सिर्फ पढ़ाई नहीं, भावनात्मक सहयोग और सही माहौल भी चाहिए। जब भी उनके अंक कम आते, मैं उन्हें हिम्मत देती और निराश नहीं होने देती।”
महरूफ और मसरूर पढ़ाई के साथ-साथ विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा ले चुके हैं और करीब 30 गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। अब दोनों का लक्ष्य जेईई एडवांस्ड में सफलता पाकर आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करना है।
सफलता का असली मंत्र
इन तीनों छात्रों की कहानी एक बात साफ करती है – सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। नियमित मेहनत, सही दिशा, समय का प्रबंधन और परिवार का साथ – यही असली मंत्र है।
उत्कर्ष ने दिखाया कि ऑनलाइन पढ़ाई और आत्म-अनुशासन से भी बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। वहीं महरूफ और मसरूर ने साबित किया कि भाईचारे की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और मां का त्याग किसी भी सपने को हकीकत बना सकता है।
आज ये युवा लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनका संदेश साफ है – अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी परीक्षा मुश्किल नहीं।
यह भी पढ़े







