कैंची से गला घोंपा, फिर रचा लूट का ड्रामा! Mehak Murder Mystery की पूरी कहानी
Mehak Murder Mystery: हरियाणा के बहादुरगढ़ में हुई 26 वर्षीय बैंक डिप्टी मैनेजर महक कथूरिया की हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। शुरुआत में मामला लूटपाट के बाद हत्या का बताया गया, लेकिन जैसे-जैसे पुलिस जांच आगे बढ़ी, कहानी में कई ऐसे मोड़ आए जिन्होंने इस हत्याकांड को और भी सनसनीखेज बना दिया। आखिरकार सच सामने आया—महक की हत्या किसी लुटेरे ने नहीं, बल्कि उसके अपने पति अंशुल धवन ने की थी।
लूट की कहानी से शुरू हुआ शक
Deputy Manager Murder Case में शुल, जो पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) है, ने पुलिस को बताया कि कुछ अज्ञात लोगों ने उनकी कार को ओवरटेक कर रोका, लूटपाट की और महक की हत्या कर दी। अपने पहले बयान में उसने कहा कि बदमाशों ने मौके पर ही हत्या की, लेकिन बाद में कहानी बदलते हुए दावा किया कि महक का अपहरण कर शव को रजबहे में फेंका गया।
बार-बार बदलते बयानों ने पुलिस का शक गहरा कर दिया। घटनास्थल से सर्जिकल ग्लव्ज मिलने पर मामला और पेचीदा हो गया। एक सीए को सर्जिकल ग्लव्ज की जरूरत क्यों पड़ी? गाड़ी में कैंची क्यों मौजूद थी? ऐसे सवालों ने जांच की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई।
बहन के आरोपों ने खोली नई परत
महक की बहन श्रुति ने शुरुआत से ही अंशुल पर शक जताया। उनका कहना था कि जिस रास्ते से दोनों जा रहे थे, वह उनका नियमित मार्ग नहीं था। अगर गुरुग्राम जाना था तो झज्जर का रास्ता क्यों चुना गया? उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि वारदात के बाद अंशुल ने सबसे पहले अपनी बहन और जीजा को फोन क्यों किया, पुलिस को क्यों नहीं?
श्रुति का दावा था कि हत्या पूरी प्लानिंग के तहत की गई है। उन्होंने कहा, “अगर लूट हुई थी तो गहने पास के रजबहे में कैसे मिले? और ग्लव्ज पहनकर कौन सा लुटेरा हत्या करता है?”
घर में खुशियां, बाहर मौत का सन्नाटा
इस पूरी घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि महक गर्भवती थी। शादी को अभी कुछ ही महीने हुए थे और परिवार में नन्हे मेहमान के आने की तैयारी चल रही थी। मां डिंपल और पिता कृष्ण कुमार ने बताया कि महक हंसते हुए घर से निकली थी। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उसका आखिरी सफर होगा।
मां का रो-रोकर बुरा हाल है। वे कहती हैं, “हमने अपनी फूल सी बच्ची को उसके हवाले किया था। उसने यह भी नहीं सोचा कि वह उसके बच्चे की मां बनने वाली है।”
आखिर क्यों की हत्या?
पुलिस जांच में सामने आया कि अंशुल को अपनी पत्नी के चरित्र पर शक था। इसी शक ने एक पढ़े-लिखे, जिम्मेदार पेशेवर को ऐसा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। रविवार रात हिसार से गुरुग्राम लौटते समय दोनों के बीच कार में बहस हुई। गुस्से में अंशुल ने पहले महक के साथ मारपीट की और फिर गले में कैंची घोंपकर उसकी हत्या कर दी।
हत्या के बाद उसने गहने उतारकर रजबहे में फेंक दिए ताकि मामला लूट जैसा लगे। फिर हाईवे पर गुजर रहे लोगों से मदद मांगकर खुद को निर्दोष दिखाने की कोशिश की। लेकिन झूठ ज्यादा देर तक टिक नहीं पाया।
बदलते बयान बने फांसी का फंदा
अंशुल का सबसे बड़ा दुश्मन उसका अपना बयान बना। हर पूछताछ में कहानी बदलना, घटनास्थल पर संदिग्ध सामान मिलना और परिवार के सवाल—इन सबने पुलिस को सच्चाई तक पहुंचा दिया। सख्ती से पूछताछ करने पर आखिरकार उसने हत्या कबूल कर ली।
एक सवाल जो बाकी है
यह मामला सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि भरोसे के टूटने की कहानी है। पढ़े-लिखे, उच्च पदों पर काम करने वाले लोग भी जब शक और गुस्से के जाल में फंस जाते हैं, तो अंजाम कितना खौफनाक हो सकता है—महक हत्याकांड इसका उदाहरण है।
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