इफ़्तार के समय सबसे पहले जिस चीज़ से रोज़ा खोला जाता है, वह है—खजूर।
dates in Ramadan: दुनिया भर में करोड़ों मुसलमान रमज़ान के पवित्र महीने में रोज़ा रखते हैं। सूर्योदय से सूर्यास्त तक खाने-पीने से परहेज़ करने के बाद इफ़्तार के समय सबसे पहले जिस चीज़ से रोज़ा खोला जाता है, वह है—खजूर। यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी पोषण संबंधी वजहें भी हैं।
रमज़ान इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। रोज़ा आत्मअनुशासन, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पैग़ंबर मोहम्मद ने खजूर से रोज़ा खोलने की सलाह दी थी और इस्लामी परंपराओं में इसका विशेष उल्लेख मिलता है।
लंबे रोज़े के बाद शरीर को क्या चाहिए?
पूरा दिन बिना भोजन और पानी के रहने के बाद शरीर को तुरंत ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ऐसे में खजूर एक आदर्श विकल्प माना जाता है। ब्रिटेन में पंजीकृत डाइटीशियन शहनाज़ बशीर के अनुसार, जब रोज़ा खोला जाता है तो शरीर सबसे पहले ग्लूकोज़ की पूर्ति करना चाहता है, क्योंकि यही ऊर्जा का मुख्य स्रोत है।
खजूर में प्राकृतिक शर्करा—ग्लूकोज़, फ्रक्टोज़ और सुक्रोज़—अधिक मात्रा में होती है, जो रक्त में शर्करा का स्तर तेजी से बढ़ाकर तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है। साथ ही इसमें जटिल कार्बोहाइड्रेट भी होते हैं, जो धीरे-धीरे पचते हैं और लंबे समय तक ऊर्जा देते रहते हैं।
पोषण का ‘पावर पैक’
खजूर सिर्फ मीठा फल नहीं, बल्कि पोषण से भरपूर सुपरफूड है। इसमें विटामिन बी6, विटामिन ए और विटामिन के के अलावा आयरन, मैग्नीशियम और पोटैशियम भी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं।
पोटैशियम शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद करता है और कोशिकाओं में पानी खींचने का काम करता है। इसलिए इफ़्तार में खजूर और पानी का साथ लेना शरीर को हाइड्रेट रखने का आसान और प्रभावी तरीका है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे अतिरिक्त इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक की आवश्यकता भी कम हो जाती है।
पाचन के लिए फायदेमंद
रमज़ान के दौरान कब्ज़ और पेट फूलने जैसी समस्याएं आम हो सकती हैं, क्योंकि दिनभर भोजन और पानी न लेने से आंतों की प्राकृतिक गति प्रभावित होती है। खजूर फाइबर का बेहतरीन स्रोत है, जो पाचन तंत्र को सक्रिय रखने में मदद करता है।
ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस रोजाना लगभग 30 ग्राम फाइबर लेने की सलाह देती है। खजूर इस लक्ष्य को पूरा करने में सहायक हो सकता है। फाइबर मल को मुलायम बनाता है और उसे आंतों से आसानी से गुजरने में मदद करता है।
वजन पर क्या पड़ता है असर?
कई लोग मानते हैं कि रोज़ा रखने से वजन अपने आप कम हो जाएगा, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। यदि इफ़्तार के समय अत्यधिक तला-भुना या मीठा भोजन लिया जाए तो वजन बढ़ भी सकता है।
परंपरा के अनुसार, रोज़ा विषम संख्या में खजूर खाकर खोला जाता है और उसके बाद मग़रिब की नमाज़ अदा की जाती है। इससे शरीर को भोजन पचाने का समय मिलता है और अत्यधिक खाने की प्रवृत्ति कम हो सकती है। खजूर में मौजूद फाइबर और प्राकृतिक मिठास भूख को नियंत्रित करने में मदद करती है।
अगर खजूर पसंद न हो तो?
आजकल इंटरमिटेंट फास्टिंग यानी समय-सीमित उपवास दुनियाभर में लोकप्रिय हो रहा है। ऐसे में खजूर केवल रमज़ान तक सीमित नहीं, बल्कि सामान्य डाइट प्लान का भी हिस्सा बन सकता है।
खजूर की सैकड़ों किस्में उपलब्ध हैं—कुछ सख्त और चबाने में भारी, तो कुछ बेहद मुलायम और रसीली। यदि किसी को सीधे खजूर खाना पसंद न हो, तो उसे स्मूदी में मिलाया जा सकता है। दूध, दही और मेवों के साथ ब्लेंड कर इसे पौष्टिक पेय बनाया जा सकता है।
dates in Ramadan की परंपरा
खजूर से रोज़ा खोलने की परंपरा सदियों पुरानी है, लेकिन आधुनिक पोषण विज्ञान भी इसकी उपयोगिता को स्वीकार करता है। धार्मिक आस्था और वैज्ञानिक तथ्यों का यह मेल खजूर को खास बनाता है।
रमज़ान के दौरान संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और संयमित खानपान जरूरी है। खजूर इस संतुलन की शुरुआत का प्रतीक है—जो न केवल आध्यात्मिक बल्कि शारीरिक ऊर्जा भी प्रदान करता है।
इस तरह, खजूर केवल एक फल नहीं, बल्कि रोज़े की थकान मिटाने वाला प्राकृतिक ऊर्जा स्रोत है, जो परंपरा और स्वास्थ्य दोनों का संगम पेश करता है।
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