Bihar Naxal free claim: तीन लाख के इनामी Suresh Koda ने किया सरेंडर, बिहार ‘नक्सल मुक्त’ होने का दावा
तीन लाख रुपये के इनामी और शीर्ष माओवादी नेता Suresh Koda उर्फ मुस्तकीम के आत्मसमर्पण के बाद पुलिस मुख्यालय ने कहा है कि बिहार अब पूरी तरह ‘नक्सल मुक्त’ हो गया है।
Bihar Naxal free claim: बिहार पुलिस ने राज्य में नक्सल गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे लंबे अभियान के बीच एक बड़ी सफलता का दावा किया है। तीन लाख रुपये के इनामी और शीर्ष माओवादी नेता Suresh Koda उर्फ मुस्तकीम के आत्मसमर्पण के बाद पुलिस मुख्यालय ने कहा है कि बिहार अब पूरी तरह ‘नक्सल मुक्त’ हो गया है। यह दावा बुधवार देर रात जारी आधिकारिक बयान में किया गया।
पुलिस के अनुसार, कोड़ा पर करीब 60 आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनमें कई मामले गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) के तहत भी शामिल थे। सुरेश कोड़ा ने मुंगेर जिले में विशेष कार्यबल (एसटीएफ) के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
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Toggleआत्मसमर्पण के दौरान सौंपे अत्याधुनिक हथियार
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आत्मसमर्पण के समय Suresh Koda ने तीन असॉल्ट राइफल, जिनमें एके-47 और एके-56 जैसे हथियार शामिल हैं, दो इंसास राइफल, 505 कारतूस और कई मैगजीन जमा कराए। इसके अलावा कुछ नकदी भी बरामद की गई।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि किसी एक उग्रवादी के पास इतने अत्याधुनिक हथियारों का होना इस बात का संकेत है कि संगठन में उसकी मजबूत पकड़ और प्रभाव था। पुलिस का मानना है कि उसके आत्मसमर्पण से नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
कौन है Suresh Koda?
मुंगेर जिले के पैसरा गांव का रहने वाला सुरेश कोड़ा पिछले लगभग 25 वर्षों से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय था। पहाड़ी और वन क्षेत्र को अपना ठिकाना बनाकर वह लंबे समय तक पुलिस के लिए चुनौती बना रहा। कई बार अभियान चलाए गए, लेकिन वह हर बार गिरफ्तारी से बच निकलने में सफल रहा।
सूत्रों के अनुसार, कोड़ा माओवादी संगठन की ‘एसएसी’ (स्पेशल एरिया कमेटी) ब्रांच का सक्रिय और प्रभावशाली सदस्य था। स्थानीय स्तर पर उसे संगठन के रणनीतिक संचालन और हथियार प्रबंधन में अहम भूमिका निभाने वाला माना जाता था। उसके नाम का इलाकों में ऐसा खौफ था कि ग्रामीण खुलकर उसके खिलाफ बोलने से कतराते थे।
60 मामलों में वांटेड
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, Suresh Koda पर हत्या, विस्फोट, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, पुलिस बलों पर हमले और रंगदारी जैसे गंभीर आरोपों सहित करीब 60 मामले दर्ज थे। इनमें से कई मामले यूएपीए के तहत भी दर्ज किए गए थे, जो देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े गंभीर अपराधों में लगाया जाता है।
तीन लाख रुपये का इनाम उसकी गिरफ्तारी पर घोषित था। पुलिस का कहना है कि वह राज्य में सक्रिय शीर्ष माओवादी नेताओं में से एक था।
पुनर्वास योजना के तहत मिलेगा लाभ
पुलिस मुख्यालय ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा संचालित ‘आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास योजना’ के तहत Suresh Koda को भी लाभ देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस योजना के तहत घोषित इनाम राशि के अलावा पांच लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। साथ ही, 36 महीनों तक व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए प्रति माह 10,000 रुपये का वजीफा प्रदान किया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य उग्रवादियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन जी सकें। पिछले कुछ वर्षों में इस योजना के तहत कई उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया है।
क्या सच में ‘नक्सल मुक्त’ हुआ बिहार?
बयान में दावा किया गया है कि कोड़ा के आत्मसमर्पण के साथ राज्य में सक्रिय नक्सली नेटवर्क का पूरी तरह सफाया हो गया है। हालांकि सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के दावों की पुष्टि जमीनी स्तर पर सतत निगरानी और विकास कार्यों से ही संभव है।
पिछले एक दशक में बिहार के कई नक्सल प्रभावित जिलों में सुरक्षा बलों ने लगातार अभियान चलाए हैं। साथ ही सड़क, बिजली, शिक्षा और रोजगार से जुड़े विकास कार्यों को भी बढ़ावा दिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि सुरक्षा कार्रवाई और विकास की दोहरी रणनीति ने नक्सल प्रभाव को कमजोर करने में अहम भूमिका निभाई है।
परिवार की प्रतिक्रिया और आगे की राह
आत्मसमर्पण के बाद Suresh Koda ने अपने किए पर पछतावा जताते हुए लोगों से माफी मांगी। उसके भतीजे ने भी कहा कि यह फैसला परिवार और समाज दोनों के लिए सकारात्मक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पुनर्वास योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए और पूर्व उग्रवादियों को रोजगार व सामाजिक स्वीकृति मिले, तो यह शांति बहाली की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।
फिलहाल, सुरेश कोड़ा का आत्मसमर्पण बिहार पुलिस के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि क्या राज्य सचमुच लंबे समय के लिए नक्सल हिंसा से मुक्त रह पाता है या नहीं।







