बाघ बेहद कमजोर दिखाई दे रहा है और उसकी हड्डियां साफ नजर आ रही हैं।
Patna Zoo white tiger: हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर एक सफेद बाघ का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में बाघ बेहद कमजोर दिखाई दे रहा है और उसकी हड्डियां साफ नजर आ रही हैं। इसे लेकर दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो पटना जू का है और वहां उचित देखभाल न मिलने के कारण बाघ की हालत ऐसी हो गई है। वीडियो सामने आने के बाद पशु प्रेमियों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है।
हालांकि, जू प्रशासन ने इन दावों को लेकर सतर्क रुख अपनाया है और कहा है कि वायरल वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि बिना पुष्टि के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना ठीक नहीं है।
सोशल मीडिया पर उठे सवाल
वीडियो वायरल होते ही लोगों ने जू प्रशासन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। कई यूजर्स ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि यह वीडियो पटना जू का है, तो यह बेहद गंभीर मामला है और तत्काल पशु चिकित्सा जांच होनी चाहिए। कुछ लोगों ने राज्य प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग भी की है।
पशु अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने भी इस मामले पर नजर रखने की बात कही है। उनका कहना है कि वन्य जीवों की सेहत और पोषण के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
पटना जू प्रशासन का पक्ष
पटना जू प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह पुष्टि नहीं हुई है कि वायरल वीडियो वास्तव में उनके जू का ही है या नहीं। अधिकारियों के अनुसार, “हम अपने सभी जानवरों की विशेष देखभाल करते हैं। उनकी नियमित मेडिकल जांच कराई जाती है और आहार का पूरा ध्यान रखा जाता है।”
जू में वर्तमान में कुल 7 बाघ हैं, जिनमें 4 नर और 3 मादा शामिल हैं। सभी को नियमित रूप से महिष (भैंस) का मांस दिया जाता है। प्रशासन का दावा है कि बाघों के भोजन और स्वास्थ्य मानकों में किसी प्रकार की कमी नहीं है।
ठंड के मौसम में विशेष इंतजाम
सर्दी के मौसम को देखते हुए बाघों के आहार और रहने की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। सामान्य दिनों में जहां सभी बाघों को मिलाकर लगभग 50 किलो मांस दिया जाता है, वहीं ठंड के समय यह मात्रा बढ़ाकर करीब 70 किलो कर दी गई है।
बाघों को दिन में एक बार शाम 4 बजे भोजन दिया जाता है। इसके अलावा शरीर को गर्म रखने और पोषण संतुलन बनाए रखने के लिए अंडा भी आहार में शामिल किया गया है।
नाइट हाउस में लकड़ी के प्लेटफॉर्म बनाए गए हैं ताकि बाघ ठंडे फर्श पर न बैठें। बाड़ों में हीटर भी लगाए गए हैं, जिससे रात के समय उन्हें पर्याप्त गर्माहट मिल सके। दिन में बाघ धूप का आनंद लेते हैं, जबकि रात में हीटर उनकी सुरक्षा का सहारा बनते हैं।
वन्य जीवों के स्वास्थ्य की निगरानी कैसे होती है?
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी चिड़ियाघर में वन्य जीवों की सेहत की नियमित निगरानी बेहद जरूरी होती है। बाघ जैसे बड़े मांसाहारी जीवों के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, साफ-सफाई और तनाव-मुक्त वातावरण आवश्यक है।
आमतौर पर चिड़ियाघरों में पशु चिकित्सकों की टीम नियमित स्वास्थ्य जांच करती है। वजन, गतिविधि स्तर, भोजन की मात्रा और व्यवहार में बदलाव पर खास नजर रखी जाती है। यदि किसी जानवर में कमजोरी या बीमारी के लक्षण दिखते हैं, तो तुरंत उपचार शुरू किया जाता है।
क्या हो सकती है कमजोरी की वजह?
विशेषज्ञ बताते हैं कि बाघों में कमजोरी कई कारणों से हो सकती है—जैसे उम्र, बीमारी, दांतों की समस्या, पाचन संबंधी दिक्कत या तनाव। कभी-कभी कैमरे के एंगल और रोशनी के कारण भी जानवर सामान्य से ज्यादा कमजोर दिख सकते हैं।
फिर भी, वायरल वीडियो ने प्रशासन को सतर्क कर दिया है। यदि वीडियो की पुष्टि पटना जू से जुड़ी होती है, तो विस्तृत जांच की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।
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