हरियाणा में Shivaji Image Controversy, Washroom Sign पर लगी तस्वीरों से मचा बवाल!
Shivaji Image Controversy: हरियाणा के फरीदाबाद जिले में स्थित एक निजी बैंक्वेट हॉल में लगी कुछ तस्वीरों ने ऐसा विवाद खड़ा कर दिया, जिसने देखते ही देखते सोशल मीडिया पर तूफान ला दिया। मामला शौचालयों के बाहर लगी उन तस्वीरों का है, जिन्हें कई लोगों ने छत्रपति शिवाजी महाराज और रानी पद्मिनी की छवियों से मिलता-जुलता बताया। जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और इंस्टाग्राम पर वायरल हुआ, लोगों में आक्रोश फैल गया।
क्या है पूरा मामला?
वायरल वीडियो में कथित तौर पर पुरुष और महिला शौचालय के दरवाजों पर ऐतिहासिक वेशभूषा में सजी दो तस्वीरें लगी दिखाई दीं। कई यूजर्स ने दावा किया कि ये तस्वीरें 17वीं शताब्दी के मराठा योद्धा Chhatrapati Shivaji Maharaj और रानी पद्मिनी से मिलती-जुलती हैं।
छत्रपति शिवाजी महाराज को भारत में साहस, स्वराज और सुशासन का प्रतीक माना जाता है। वहीं रानी पद्मिनी को सम्मान और बलिदान की ऐतिहासिक कथाओं से जोड़ा जाता है। ऐसे में इन हस्तियों की छवियों का कथित रूप से शौचालय के संकेत के रूप में उपयोग किए जाने की खबर ने लोगों की भावनाओं को आहत किया।
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राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज
इस मामले पर राजनीतिक दलों ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने वीडियो साझा करते हुए इसे “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया और हरियाणा सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
वहीं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने भी इस घटना की निंदा करते हुए इसे सांस्कृतिक अपमान बताया। पार्टी ने कहा कि ऐसे पूजनीय ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के साथ किसी भी तरह की असंवेदनशीलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कुछ नेताओं ने राज्य सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
सोशल मीडिया पर विरोध
वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर हजारों कमेंट्स आने लगे। कई लोगों ने तस्वीरें तुरंत हटाने और सार्वजनिक माफी की मांग की। कुछ यूजर्स ने इसे जानबूझकर की गई हरकत बताया, जबकि कुछ ने कहा कि अगर यह गलती थी तो भी इतनी बड़ी लापरवाही क्यों हुई?
लोगों का कहना था कि जिन ऐतिहासिक हस्तियों को देशभर में सम्मान दिया जाता है, उनकी छवियों का इस्तेमाल इस तरह नहीं किया जाना चाहिए।
रिसॉर्ट की सफाई
बढ़ते विवाद के बीच संबंधित रिसॉर्ट ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर बयान जारी किया। प्रबंधन ने कहा कि तस्वीरों का उद्देश्य किसी विशेष ऐतिहासिक व्यक्तित्व को दर्शाना नहीं था।
उनके अनुसार, यह कलाकृति “प्राचीन वेशभूषा” को दिखाने के लिए लगाई गई थी और केवल सजावट के लिए उपयोग की गई थी।
बयान में यह भी कहा गया कि जैसे ही मामला उनके संज्ञान में आया, एक घंटे के भीतर तस्वीरें हटा दी गईं। साथ ही उन्होंने किसी भी प्रकार की ठेस पहुंचने पर खेद व्यक्त किया।
प्रशासन की चुप्पी
अब तक न तो हरियाणा प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है और न ही बैंक्वेट हॉल के खिलाफ किसी कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। यही वजह है कि विवाद अभी पूरी तरह थमा नहीं है।
क्यों संवेदनशील है यह मुद्दा?
भारत जैसे देश में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीकों का महत्व बेहद गहरा है। कई लोग इन्हें सिर्फ इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आस्था और सम्मान का प्रतीक मानते हैं। ऐसे में किसी भी तरह का कथित दुरुपयोग लोगों की भावनाओं को आहत कर सकता है।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि सार्वजनिक स्थानों पर कला और सजावट करते समय क्या सांस्कृतिक संवेदनशीलता का ध्यान रखा जाता है?
निष्कर्ष
फिलहाल तस्वीरें हटा दी गई हैं और रिसॉर्ट ने माफी भी मांग ली है, लेकिन सोशल मीडिया पर बहस अभी जारी है। कुछ लोग इसे अनजाने में हुई गलती मान रहे हैं, तो कुछ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
साफ है कि ऐतिहासिक हस्तियों से जुड़ा कोई भी मुद्दा बेहद संवेदनशील होता है। ऐसे मामलों में सावधानी और जिम्मेदारी दोनों जरूरी हैं, ताकि सम्मान और भावनाएं दोनों सुरक्षित रह सकें।
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