बुढ़ापे में मसल्स कमजोर? जानिए ‘Sarcopenia’ से बचने के आसान उपाय
बढ़ती उम्र के साथ थकान, चलने में दिक्कत, सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना और बार-बार गिरने का डर—ये समस्याएं अक्सर 60 वर्ष के बाद आम हो जाती हैं।
बढ़ती उम्र के साथ थकान, चलने में दिक्कत, सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना और बार-बार गिरने का डर—ये समस्याएं अक्सर 60 वर्ष के बाद आम हो जाती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इसका एक बड़ा कारण है Sarcopenia, यानी उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों (मसल्स) का कमजोर होना और उनका धीरे-धीरे कम होते जाना। अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो यह स्थिति व्यक्ति की स्वतंत्रता और जीवन गुणवत्ता दोनों को प्रभावित कर सकती है।
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Toggleक्या है Sarcopenia और क्यों बढ़ता है खतरा?
Sarcopenia एक ऐसी स्थिति है जिसमें उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों का आकार और ताकत घटने लगती है। 60 साल के बाद शरीर की प्रोटीन को पचाने और उसे मसल्स बनाने में इस्तेमाल करने की क्षमता कम होने लगती है। इसके साथ ही शारीरिक गतिविधि में कमी, हार्मोनल बदलाव और पोषण की कमी इस समस्या को और बढ़ा देती है।
कमजोर मांसपेशियों के कारण संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे गिरने और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि बुजुर्गों में कूल्हे की हड्डी टूटने के मामले अधिक देखे जाते हैं।
ICMR और WHO की क्या है सलाह?
Indian Council of Medical Research (आईसीएमआर) और World Health Organization (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को अपने वजन के प्रति किलो के हिसाब से लगभग 1 ग्राम प्रोटीन रोजाना लेना चाहिए।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी व्यक्ति का वजन 65 किलोग्राम है, तो उसे प्रतिदिन करीब 65 ग्राम प्रोटीन अपने आहार में शामिल करना चाहिए। यह प्रोटीन दाल, पनीर, दूध, दही, अंडा, सोया, चना और अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों से प्राप्त किया जा सकता है।
फर्मेंटेड फूड क्यों हैं फायदेमंद?
दही, इडली, डोसा और ढोकला जैसे खमीर उठे (फर्मेंटेड) खाद्य पदार्थ पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। इनमें मौजूद प्रोबायोटिक्स आंतों की सेहत सुधारते हैं, जिससे शरीर प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से अवशोषित कर पाता है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल फर्मेंटेड फूड खाना ही पर्याप्त नहीं है। इनके साथ पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन लेना और नियमित हल्की कसरत करना जरूरी है, तभी मसल्स की ताकत बनाए रखी जा सकती है।
हल्की कसरत से मिलेगा बड़ा फायदा
डब्ल्यूएचओ की सलाह है कि 65 वर्ष से अधिक आयु के लोग डॉक्टर की सलाह लेकर सप्ताह में कम से कम दो दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज जरूर करें।
कुछ आसान व्यायाम जो घर पर किए जा सकते हैं:
- कुर्सी से 10–15 बार उठना और बैठना
- दीवार के सहारे खड़े होकर पुश-अप करना
- पानी की बोतल या हल्के डंबल से वेट लिफ्टिंग
- रोजाना 20–30 मिनट की तेज चाल से वॉक
ये अभ्यास मसल्स को सक्रिय रखते हैं, संतुलन सुधारते हैं और गिरने के खतरे को कम करते हैं।
विटामिन D और धूप भी जरूरी
विशेषज्ञ बताते हैं कि विटामिन D की कमी भी मांसपेशियों को कमजोर बना सकती है। सुबह की हल्की धूप लेना और डॉक्टर की सलाह से विटामिन D व कैल्शियम सप्लीमेंट लेना लाभकारी हो सकता है। पर्याप्त पानी पीना और संतुलित नींद भी मसल रिकवरी के लिए जरूरी है।
अपनाएं यह आसान दैनिक शेड्यूल
मांसपेशियों को मजबूत रखने के लिए एक सरल दिनचर्या अपनाई जा सकती है:
सुबह: हल्की एक्सरसाइज और प्रोटीन से भरपूर नाश्ता (दूध, अंडा, दाल चीला या इडली)
दोपहर: दाल, पनीर, हरी सब्जी और सलाद
शाम: 20 मिनट की वॉक या स्ट्रेचिंग
रात: हल्का और सुपाच्य भोजन, जैसे खिचड़ी या सूप
समय रहते जागरूकता ही बचाव
Sarcopenia कोई अचानक होने वाली बीमारी नहीं, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ने वाली स्थिति है। सही आहार, पर्याप्त प्रोटीन, फर्मेंटेड फूड, नियमित व्यायाम और चिकित्सकीय सलाह से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है।
बुढ़ापे को सक्रिय और आत्मनिर्भर बनाना संभव है—जरूरत है तो बस सही जानकारी और नियमित देखभाल की।






