NGO के प्रमुख रियाज फाजिल काजी पर कई युवतियों ने यौन शोषण, मानसिक उत्पीड़न और धार्मिक दबाव जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
Nagpur NGO Case: महाराष्ट्र के Nagpur शहर के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में बच्चों के लिए काम करने वाला एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में आ गया है। NGO के प्रमुख रियाज फाजिल काजी पर कई युवतियों ने यौन शोषण, मानसिक उत्पीड़न और धार्मिक दबाव जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए Nagpur Police ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
FIR दर्ज होते ही गिरफ्तारी
शनिवार रात Mankapur Police Station में दर्ज FIR के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी काजी को हिरासत में ले लिया। रविवार को उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 23 अप्रैल तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच कई पहलुओं से की जा रही है, जिसमें CCTV फुटेज, डिजिटल साक्ष्य और पीड़ितों के बयान अहम भूमिका निभाएंगे।
Nagpur NGO Case की शिकायतकर्ता
मुख्य शिकायतकर्ता 23 वर्षीय महिला है, जो सितंबर 2023 से NGO में एडमिन और HR हेड के रूप में कार्यरत थी। FIR के अनुसार, 18 जुलाई 2024 को उसके जन्मदिन के मौके पर ऑफिस में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद आरोपी ने उसे अपने केबिन में बुलाया।
पीड़िता का आरोप है कि वहां आरोपी ने उसकी मर्जी के खिलाफ उसे गले लगाया और अनुचित व्यवहार किया। उसने यह भी कहा कि नौकरी खोने के डर से वह उस समय विरोध नहीं कर सकी।
महिला ने आगे बताया कि आरोपी बार-बार उसे अकेले में बुलाता और अनुचित तरीके से छूने की कोशिश करता था। एक घटना में आरोपी ने कथित तौर पर CCTV का प्लग निकालकर उसे गले लगाने की कोशिश की।
फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट से निगरानी का आरोप
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी कर्मचारियों पर नजर रखने के लिए फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट का इस्तेमाल करता था। यह अकाउंट उसके और पीड़िता के नाम के कुछ हिस्सों को मिलाकर बनाया गया था।
उसका दावा है कि आरोपी अन्य कर्मचारियों से भी उसके निजी जीवन से जुड़ी जानकारी जुटाता था और लगातार मानसिक दबाव बनाता था।
धार्मिक दबाव के भी आरोप
मामले में केवल यौन उत्पीड़न ही नहीं, बल्कि धार्मिक दबाव के भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। पीड़िता की बड़ी बहन, जो नवंबर 2025 में NGO से जुड़ी थी, ने आरोप लगाया कि आरोपी ने फील्ड विजिट के दौरान एक विशेष धर्म की प्रार्थना करने और खास तरह के कपड़े पहनने के लिए दबाव बनाया।
अन्य कर्मचारियों ने भी आरोप लगाया कि उन्हें उनके धर्म के विपरीत धार्मिक रीति-रिवाज अपनाने के लिए कहा जाता था।
कर्मचारियों का पलायन और बढ़ते सवाल
NGO के कामकाज पर भी अब सवाल उठने लगे हैं। पीड़िता के अनुसार, आरोपी के व्यवहार के कारण कई कर्मचारी नौकरी छोड़ चुके हैं। इनमें 2024 में कार्यरत एक 24 वर्षीय शिक्षिका भी शामिल है।
कुछ कर्मचारियों ने यह भी दावा किया कि उन्हें घूरने, अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने और धार्मिक दबाव झेलने जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
ATS ने शुरू की समानांतर जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए Maharashtra ATS ने भी जांच शुरू कर दी है। ATS NGO की फंडिंग, उसके संपर्कों और घोषित उद्देश्यों से इतर संभावित गतिविधियों की पड़ताल कर रही है।
यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि हाल ही में महाराष्ट्र के अन्य इलाकों में भी इसी तरह के मामले सामने आए हैं, जिनमें यौन उत्पीड़न और धार्मिक दबाव के आरोप शामिल हैं।
18 अप्रैल को सामने आया मामला
जानकारी के अनुसार, 18 अप्रैल को जब पीड़ित समूह NGO के कार्यालय पहुंचा, तो वह बंद मिला। इसके बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क कर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर हरेश कालसेकर ने बताया कि सभी संभावित पीड़ितों से संपर्क किया जा रहा है और उनके बयान दर्ज किए जाएंगे।
आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले हर सबूत की बारीकी से जांच की जाएगी। CCTV फुटेज, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रेल्स को खंगाला जा रहा है।
यदि आरोप साबित होते हैं, तो आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला नागपुर में चर्चा का विषय बना हुआ है और समाज में NGO की कार्यप्रणाली को लेकर भी बहस छिड़ गई है।
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