गर्मियों के मौसम में फूड पॉइजनिंग के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और हाल की घटनाओं ने इस खतरे को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
गर्मियों के मौसम में फूड पॉइजनिंग के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और हाल की घटनाओं ने इस खतरे को एक बार फिर उजागर कर दिया है। 25 अप्रैल को Mumbai में एक ही परिवार के चार लोगों की डायरिया और उल्टी के कारण मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक, परिवार ने डिनर के बाद देर रात तरबूज खाया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में फूड पॉइजनिंग की पुष्टि हुई है। इसी तरह, Dahod में एक शादी समारोह के बाद 400 से ज्यादा लोग बीमार पड़ गए। सभी को उल्टी-दस्त की शिकायत हुई, जिनमें से कई को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
इन घटनाओं ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर गर्मियों में फूड पॉइजनिंग इतनी तेजी से क्यों बढ़ती है।
गर्मियों में क्यों बढ़ता है फूड पॉइजनिंग का खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में तापमान और नमी बढ़ जाती है, जो बैक्टीरिया और वायरस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बनाती है। Centers for Disease Control and Prevention (CDC) के मुताबिक, 4°C से 60°C के बीच का तापमान ‘डेंजर जोन’ माना जाता है, जहां बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं।
इस दौरान भोजन जल्दी खराब हो जाता है और उसमें हानिकारक कीटाणु पनपने लगते हैं। यही वजह है कि गर्मियों में फूड पॉइजनिंग के मामले ज्यादा सामने आते हैं।
Food poisoning क्या है और कैसे होती है?
फूड पॉइजनिंग दूषित या खराब भोजन खाने से होने वाली बीमारी है। इसमें उल्टी, दस्त, पेट दर्द और बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
इसके मुख्य कारण हैं:
- बासी या अधपका खाना
- गंदे हाथ या बर्तनों से बना भोजन
- दूषित पानी या बर्फ
- कच्चे और पके भोजन को साथ रखना
- लंबे समय तक बाहर रखा खाना
इसके अलावा खुले में बिकने वाला स्ट्रीट फूड भी बड़ा कारण बन सकता है।
किन कीटाणुओं से होता है फूड पॉइजनिंग?
फूड पॉइजनिंग कई तरह के बैक्टीरिया, वायरस और पैरासाइट्स के कारण हो सकती है। बैक्टीरिया जैसे साल्मोनेला और ई. कोलाई, वायरस जैसे नोरोवायरस और हेपेटाइटिस A, और कुछ पैरासाइट जैसे जियार्डिया इसके प्रमुख कारण हैं।
इनके अलावा कुछ टॉक्सिन पैदा करने वाले बैक्टीरिया भी फूड पॉइजनिंग का कारण बनते हैं।
क्या फूड पॉइजनिंग फैलती है?
Food poisoning सीधे तौर पर संक्रामक बीमारी नहीं है, लेकिन अगर इसका कारण बैक्टीरिया या वायरस है, तो यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकती है।
गंदे हाथ, दूषित भोजन या पानी के जरिए संक्रमण फैल सकता है, इसलिए साफ-सफाई रखना बेहद जरूरी है।
लक्षण और खतरे
फूड पॉइजनिंग के आम लक्षण हैं:
- उल्टी
- दस्त
- पेट दर्द
- बुखार
- कमजोरी
अधिकतर मामलों में यह कुछ दिनों में ठीक हो जाती है, लेकिन गंभीर स्थिति में यह जानलेवा भी हो सकती है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए।
किन चीजों से बढ़ता है जोखिम?
कुछ खाद्य पदार्थों में बैक्टीरिया जल्दी पनपते हैं, जैसे:
- कच्चा या अधपका मांस और अंडे
- अनपॉश्चराइज्ड दूध और डेयरी उत्पाद
- कटे हुए फल और सब्जियां
- स्ट्रीट फूड
- लंबे समय तक बाहर रखा खाना
गर्मियों में खासकर कटे फल और खुले में रखा खाना ज्यादा खतरनाक हो जाता है।
बचाव और घरेलू उपाय
फूड पॉइजनिंग से बचने के लिए कुछ सावधानियां जरूरी हैं:
- हमेशा ताजा और गरम खाना खाएं
- खाने से पहले हाथ धोएं
- साफ पानी का उपयोग करें
- कच्चे और पके भोजन को अलग रखें
- बाहर का खाना सोच-समझकर खाएं
अगर Food poisoning हो जाए, तो शरीर को हाइड्रेट रखना जरूरी है। ORS, नारियल पानी और हल्का भोजन लेना फायदेमंद होता है।
कब डॉक्टर के पास जाएं?
अगर ये लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
लगातार उल्टी या दस्त
तेज बुखार
शरीर में पानी की कमी
मल में खून
अत्यधिक कमजोरी
फूड पॉइजनिंग बड़ी समस्या
मुंबई और गुजरात की हालिया घटनाएं यह संकेत देती हैं कि Food poisoning को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। थोड़ी सी लापरवाही गंभीर परिणाम दे सकती है।
गर्मियों में खान-पान और साफ-सफाई का ध्यान रखना ही इस समस्या से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
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