BRICS Summit 2026: शी जिनपिंग का BRICS के लिए 5-सूत्रीय एक्शन प्लान, भारत के लिए क्यों बढ़ सकती है चिंता?
BRICS Summit 2026: 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने BRICS देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने के लिए पांच सूत्रीय एक्शन प्लान पेश किया। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI, व्यापार और निवेश, डिजिटल उद्योग, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी प्रतिभाओं के विकास पर विशेष जोर दिया गया है।
शी जिनपिंग ने BRICS देशों से औद्योगिक और आपूर्ति श्रृंखलाओं को स्थिर रखने तथा एक बड़े और एकीकृत बाजार की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। चीन की ओर से पेश किए गए इन प्रस्तावों को वैश्विक दक्षिण में BRICS की भूमिका मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, भारत के लिए इस योजना के कुछ पहलू चिंता का कारण बन सकते हैं। इसकी वजह भारत और चीन के बीच व्यापार, तकनीक, निवेश और रणनीतिक भरोसे से जुड़े पुराने मतभेद हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में कुछ सुधार के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन कई क्षेत्रों में भारत अब भी चीनी कंपनियों और तकनीक को लेकर सतर्क है।
क्या है शी जिनपिंग का पांच सूत्रीय प्लान?
1. ओपन-सोर्स और समावेशी AI
शी जिनपिंग ने BRICS देशों के लिए ओपन-सोर्स और समावेशी AI पहल का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत चीन BRICS देशों के लिए एक AI ओपन-सोर्स समुदाय स्थापित करने में नेतृत्व करेगा। इसमें बड़े भाषा मॉडल यानी Large Language Models (LLMs) के विकास और इस्तेमाल में सहयोग, AI से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम और विशेषज्ञ सेमिनार आयोजित करने की बात कही गई है।
इसका उद्देश्य AI के क्षेत्र में एक ऐसा खुला पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है, जिसमें BRICS देश तकनीक और विशेषज्ञता साझा कर सकें। चीन ने इसके साथ वैश्विक AI शासन के लिए व्यापक और सहमति-आधारित व्यवस्था की जरूरत पर भी जोर दिया है।
2. व्यापार और निवेश को आसान बनाने की पहल
दूसरे प्रस्ताव में चीन ने व्यापार और निवेश को आसान बनाने पर जोर दिया। शी ने BRICS देशों के बीच विशेष आर्थिक क्षेत्रों यानी Special Economic Zones (SEZs) की साझेदारी का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत एक स्मार्ट पोर्टल बनाने, नीतियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने और व्यापार तथा निवेश के लिए नए मंच विकसित करने की बात कही गई है।
चीन अगले साल BRICS Forum on Trade in Services आयोजित करने की भी योजना बना रहा है। इसका उद्देश्य BRICS देशों के बीच सेवा क्षेत्र में व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ाना है।
3. डिजिटल उद्योग में सहयोग
तीसरे प्रस्ताव में डिजिटल उद्योग पर ध्यान दिया गया है। चीन ने BRICS देशों के बीच एक डिजिटल इकोसिस्टम क्लाउड प्लेटफॉर्म स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा डिजिटल कौशल प्रशिक्षण, तकनीकी आदान-प्रदान और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल बढ़ाने की बात कही गई है। इस पहल का उद्देश्य BRICS देशों में डिजिटल अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाना और डिजिटल क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना है।
4. स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा
चौथे प्रस्ताव में स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग यानी तकनीक आधारित आधुनिक उत्पादन व्यवस्था पर जोर दिया गया है। चीन ने BRICS देशों को स्मार्ट फैक्ट्रियां विकसित करने में मदद देने और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े मानक तथा नियम विकसित करने में सहयोग की पेशकश की है।
इसका उद्देश्य BRICS देशों की पारंपरिक औद्योगिक क्षमता को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ना और उत्पादन व्यवस्था को अधिक तकनीकी एवं कुशल बनाना है।
5. विज्ञान और तकनीकी प्रतिभाओं का विकास
पांचवें प्रस्ताव में तकनीकी प्रतिभाओं और इंजीनियरों के विकास पर जोर दिया गया है। चीन ने BRICS Engineer Cultivation Alliance बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत इंजीनियरों के प्रशिक्षण, कौशल विकास और योग्यता के मानकों को आपस में जोड़ने की दिशा में काम करने की बात कही गई है।
इसके अलावा विज्ञान और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में BRICS देशों के युवाओं के बीच आदान-प्रदान कार्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। यह पहल BRICS देशों के बीच तकनीकी विशेषज्ञता और मानव संसाधन को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखी जा सकती है।
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता क्या है?
शी जिनपिंग के प्रस्ताव अपने आप में आर्थिक और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित हैं, लेकिन भारत के लिए इनका रणनीतिक पहलू भी महत्वपूर्ण है। भारत और चीन के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद के कारण गहरा अविश्वास पैदा हुआ। हालांकि दोनों देशों ने हाल में संबंध सामान्य करने की दिशा में कदम उठाए हैं, लेकिन निवेश, तकनीक, व्यापार और सुरक्षा के मामलों में भारत अभी भी सावधानी बरत रहा है।
ऐसे में यदि BRICS के भीतर साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म, AI सिस्टम, तकनीकी मानक या औद्योगिक नेटवर्क विकसित होते हैं, तो भारत को यह देखना होगा कि इनमें चीन की भूमिका कितनी बड़ी होगी और इससे भारत की रणनीतिक तथा तकनीकी स्वतंत्रता पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
क्या भारत चीन के प्रस्तावों को खारिज कर सकता है?
BRICS का उद्देश्य आर्थिक, वित्तीय, राजनीतिक और तकनीकी क्षेत्रों में सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है। भारत भी BRICS के माध्यम से व्यापार, स्थानीय मुद्राओं में भुगतान, आपूर्ति श्रृंखलाओं, तकनीक और ग्लोबल साउथ के हितों को आगे बढ़ाने की वकालत करता रहा है।
2026 में भारत की अध्यक्षता में हुए BRICS सम्मेलन के नई दिल्ली घोषणा-पत्र में भी व्यापार, आपूर्ति श्रृंखलाओं, डिजिटल बदलाव, तकनीकी सहयोग और सीमा-पार भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया। साथ ही घोषणा-पत्र में राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और संबंधित देशों के कानूनों के अनुरूप सहयोग की बात कही गई है।
इसलिए भारत के सामने चुनौती चीन के प्रस्तावों को पूरी तरह स्वीकार या खारिज करने की बजाय अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों के अनुरूप सहयोग का दायरा तय करने की होगी।
BRICS में चीन की बढ़ती भूमिका
एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि 2027 में BRICS की अध्यक्षता चीन के पास जाएगी। ऐसे में शी जिनपिंग के प्रस्तावों को केवल मौजूदा सम्मेलन की घोषणाओं के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि आने वाले समय में BRICS के एजेंडे को प्रभावित करने की चीन की कोशिश के तौर पर भी देखा जा सकता है।
चीन AI, डिजिटल तकनीक, विनिर्माण और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी मजबूत स्थिति का इस्तेमाल BRICS के भीतर आर्थिक और तकनीकी सहयोग का नेतृत्व करने के लिए करना चाहता है। Reuters के अनुसार, चीन ने BRICS AI Open Source Zone, विशेष आर्थिक क्षेत्र साझेदारी और 2027 में सेवा व्यापार मंच जैसे प्रस्ताव सामने रखे हैं।
BRICS का बदलता स्वरूप
BRICS अब अपने शुरुआती पांच देशों—ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका—तक सीमित नहीं है। इसका विस्तार ईरान, इंडोनेशिया, मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात तक हो चुका है। इसके अलावा कई अन्य देशों को साझेदार देशों के रूप में जोड़ा गया है। इस विस्तार के साथ BRICS का आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव बढ़ा है, लेकिन साथ ही सदस्य देशों के हितों में अंतर भी बढ़ा है।
भारत और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा, रूस और पश्चिम के बीच तनाव तथा पश्चिम एशिया के अलग-अलग देशों के हितों को देखते हुए BRICS के लिए सभी सदस्यों को एक साझा एजेंडे पर साथ रखना आसान नहीं होगा।
भारत के लिए अवसर भी, चुनौती भी!
शी जिनपिंग का पांच सूत्रीय प्लान भारत के लिए केवल चुनौती नहीं है। AI, डिजिटल उद्योग, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, कौशल विकास और व्यापार जैसे क्षेत्रों में BRICS सहयोग भारत के लिए नए बाजार और तकनीकी अवसर पैदा कर सकता है।
लेकिन भारत के लिए प्राथमिकता यह रहेगी कि सहयोग के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा सुरक्षा, घरेलू उद्योग, तकनीकी आत्मनिर्भरता और व्यापार संतुलन से समझौता न हो। यही वजह है कि चीन के प्रस्तावों को लेकर भारत में उत्साह के साथ-साथ सावधानी भी दिखाई दे सकती है।
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