Rahul Gandhi Acquitted: सुल्तानपुर कोर्ट से राहुल गांधी को बड़ी राहत, अमित शाह पर टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में बरी
Rahul Gandhi Acquitted: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की विशेष MP-MLA अदालत ने 2018 के मानहानि मामले में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बरी कर दिया है। यह मामला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर की गई कथित टिप्पणी से जुड़ा था। अदालत ने शिकायतकर्ता की कानूनी स्थिति और आरोपों से संबंधित साक्ष्यों पर विचार करते हुए राहुल गांधी को राहत दी। इस फैसले के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की संभावना पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
Rahul Gandhi Acquitted: क्या है पूरा मामला?
राहुल गांधी के खिलाफ यह मामला वर्ष 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान की गई एक टिप्पणी से जुड़ा है। उस समय भारतीय जनता पार्टी (BJP) के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह थे। चुनाव प्रचार के दौरान बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में राहुल गांधी ने अमित शाह को लेकर टिप्पणी की थी, जिस पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था।
राहुल गांधी की कथित टिप्पणी को लेकर उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के स्थानीय बीजेपी नेता विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। विजय मिश्रा जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उनका आरोप था कि राहुल गांधी के बयान से अमित शाह की छवि को नुकसान पहुंचा और इस टिप्पणी से बीजेपी से जुड़े लोगों की प्रतिष्ठा भी प्रभावित हुई।
अदालत ने किन आधारों पर राहुल गांधी को बरी किया?
26 अक्टूबर 2026 को सुल्तानपुर की विशेष MP-MLA अदालत ने मामले में अपना फैसला सुनाया। अदालत ने राहुल गांधी को आरोपों से बरी कर दिया। इस फैसले में शिकायतकर्ता विजय मिश्रा की कानूनी स्थिति और कथित बयान के मानहानिकारक होने के सवाल महत्वपूर्ण रहे।
अदालत के 49 पन्नों के फैसले में कहा गया कि शिकायतकर्ता यह साबित नहीं कर सके कि वह इस मामले में कानून के तहत सीधे तौर पर प्रभावित व्यक्ति हैं। कथित टिप्पणी मुख्य रूप से अमित शाह और अधिकतम बीजेपी से संबंधित थी, न कि व्यक्तिगत रूप से विजय मिश्रा से।
अदालत ने यह भी विचार किया कि क्या राहुल गांधी की टिप्पणी से शिकायतकर्ता की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने का पर्याप्त प्रमाण मौजूद था। मामले में पेश किए गए गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपों को साबित हुआ नहीं माना।
2018 से 2026 तक कैसे आगे बढ़ा मामला?
इस मामले की शुरुआत अगस्त 2018 में हुई थी। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी और नवंबर 2023 में अदालत ने राहुल गांधी को मुकदमे का सामना करने के लिए समन जारी किया।
फरवरी 2024 में राहुल गांधी सुल्तानपुर की अदालत में पेश हुए और उन्हें जमानत मिल गई। इसके बाद मामले की सुनवाई जारी रही।
कार्यवाही के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से राहुल गांधी के वॉयस सैंपल की मांग भी की गई, ताकि उसे बेंगलुरु में दिए गए कथित बयान की रिकॉर्डिंग से मिलाया जा सके। हालांकि, निचली अदालत ने इस मांग को खारिज कर दिया। इसके बाद इस फैसले को चुनौती देने की कोशिश भी की गई, लेकिन संबंधित अदालतों से राहत नहीं मिली।
मामले में अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने पहले 13 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाने की तारीख तय की थी। बाद में इसे बदलकर 26 अक्टूबर कर दिया गया। इसी दिन अदालत ने अपना निर्णय सुनाया और राहुल गांधी को बरी कर दिया।
फैसले के बाद क्या बोले दोनों पक्ष?
फैसले के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी देखी गई। अदालत परिसर के बाहर कार्यकर्ताओं ने फैसले का स्वागत किया। राहुल गांधी के वकील ने कहा कि शिकायतकर्ता विजय मिश्रा इस मामले में कानून के तहत प्रभावित व्यक्ति की श्रेणी में नहीं आते थे।
दूसरी ओर, शिकायतकर्ता के वकील ने कहा कि वह अदालत के फैसले की प्रति का अध्ययन करेंगे। इसके बाद अपने मुवक्किल से चर्चा कर आगे की कानूनी कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। शिकायतकर्ता की ओर से भी फैसले को चुनौती देने की संभावना जताई गई है।
इसलिए फिलहाल यह कहना उचित नहीं होगा कि फैसले के खिलाफ अपील निश्चित रूप से दायर की जाएगी। आगे की स्थिति संबंधित पक्षों के निर्णय और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
राहुल गांधी के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
राहुल गांधी देश के प्रमुख विपक्षी नेताओं में शामिल हैं और उनके राजनीतिक बयानों को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में अमित शाह से संबंधित इस पुराने मानहानि मामले में बरी होना उनके लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी राहत है।
हालांकि, इस फैसले को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि अदालत का निर्णय इसी विशेष शिकायत, उसमें लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत साक्ष्यों पर आधारित है। इसे राहुल गांधी के सभी राजनीतिक बयानों पर व्यापक न्यायिक मुहर के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
सुल्तानपुर अदालत के इस फैसले ने करीब आठ साल से चल रहे मामले को नया मोड़ दिया है। अब शिकायतकर्ता की ओर से संभावित अपील और इस संबंध में आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी।

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