Sardar Patel Jayanti 2026: सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर देश ने किया नमन, राष्ट्रपति मुर्मू, PM मोदी और अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि
Sardar Patel Jayanti 2026: देशभर में 31 अक्टूबर को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जा रही है। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। देशभर में रन फॉर यूनिटी, एकता की शपथ और विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति ने पटेल चौक पर दी श्रद्धांजलि
राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली के पटेल चौक स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने देश की एकता और अखंडता के लिए सरदार पटेल के योगदान को याद किया।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के एकता नगर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पहुंचकर सरदार पटेल को नमन किया। प्रधानमंत्री ने उन्हें अखंड भारत का शिल्पकार बताते हुए कहा कि सरदार पटेल ने अपना पूरा जीवन एक मजबूत, समृद्ध और समर्थ भारत के निर्माण के लिए समर्पित कर दिया।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर देश की एकता और राष्ट्रीय संकल्प को मजबूत बनाए रखने का संदेश भी दिया।
अमित शाह ने दिखाई ‘रन फॉर यूनिटी’ को हरी झंडी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम से ‘रन फॉर यूनिटी’ को हरी झंडी दिखाई। इस दौरान उन्होंने सरदार पटेल के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए कहा कि आजादी के बाद देश को एकजुट करना बेहद चुनौतीपूर्ण काम था।
अमित शाह ने कहा कि सरदार पटेल ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और दूरदर्शी नेतृत्व के दम पर महज 1,218 दिनों में ऐसा काम कर दिखाया, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल था। उनका प्रयास भारत की राजनीतिक एकता और अखंडता की नींव बना।
क्यों कहा जाता है सरदार पटेल को ‘लौह पुरुष’?
सरदार वल्लभभाई पटेल को भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। 15 अगस्त 1947 को देश की आजादी के समय भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रियासतों का एकीकरण था। उस समय देश में 560 से अधिक रियासतें मौजूद थीं, जिनका भारतीय संघ में विलय कराना आसान नहीं था।
ऐसे मुश्किल दौर में सरदार पटेल ने अपनी राजनीतिक समझ, दृढ़ इच्छाशक्ति और कुशल नेतृत्व के जरिए रियासतों के एकीकरण में निर्णायक भूमिका निभाई। उनके प्रयासों ने स्वतंत्र भारत को एक मजबूत राजनीतिक स्वरूप देने में अहम योगदान दिया। इसी ऐतिहासिक भूमिका के कारण उन्हें ‘भारत का लौह पुरुष’ कहा जाता है।
2014 से मनाया जा रहा है राष्ट्रीय एकता दिवस
सरदार पटेल की जयंती को वर्ष 2014 से हर साल 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में ‘रन फॉर यूनिटी’, राष्ट्रीय एकता की शपथ, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य आयोजन किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य नागरिकों के बीच एकता, भाईचारे और राष्ट्रीय अखंडता की भावना को मजबूत करना है।
सरदार पटेल का जीवन और उनके विचार आज भी देश के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने दिखाया कि भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं की विविधता के बावजूद एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण एकजुट प्रयासों से ही संभव है। उनकी 151वीं जयंती पर देश उन्हें याद करते हुए राष्ट्रीय एकता और अखंडता के संकल्प को दोहरा रहा है।

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