AI Cancer Detection: 30 मिनट में कैंसर का खुलासा! AI समिट 2026 में भारत की मेडिकल क्रांति
AI Cancer Detection: दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे एआई समिट 2026 में एक ऐसी तकनीक सामने आई है, जिसने हेल्थ सेक्टर में नई उम्मीद जगा दी है। दावा किया जा रहा है कि यह एआई-संचालित स्मार्ट एमआरआई मशीन सिर्फ 30 से 45 मिनट के भीतर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का पता लगा सकती है। अगर यह तकनीक अपने वादों पर खरी उतरती है, तो लाखों मरीजों की जिंदगी बदल सकती है।
क्या है यह नई AI डिवाइस?
India AI Summit 2026 में विप्रो की चीफ टेक्निकल ऑफिसर संध्या अरुण ने एक खास AI-संचालित रोबोटिक MRI मशीन पेश की। उनके मुताबिक, यह मशीन शरीर के अंदर छिपी असामान्यताओं को बेहद शुरुआती चरण में पहचान सकती है। खासतौर पर पेट और मिड-बॉडी से जुड़ी बीमारियों की जांच में इसे काफी प्रभावी बताया जा रहा है।
इस मशीन में चार रोबोटिक आर्म लगी हैं, जो शरीर के अलग-अलग हिस्सों का स्कैन कर सकती हैं। स्कैन के दौरान स्क्रीन पर रियल-टाइम इमेज दिखाई देती है। जैसे ही कोई संदिग्ध ट्यूमर या असामान्यता नजर आती है, एआई तुरंत उसका विश्लेषण कर रिपोर्ट तैयार कर देता है। कंपनी के अनुसार, पूरी प्रक्रिया 30 से 45 मिनट के भीतर पूरी हो जाती है।
मरीजों के लिए क्या फायदा?
सबसे बड़ा फायदा है — जल्दी पहचान। डॉक्टरों का मानना है कि कैंसर जितनी जल्दी पकड़ में आ जाए, इलाज उतना आसान और कम खर्चीला होता है। कई मामलों में अगर शुरुआती स्टेज में पता चल जाए तो सर्जरी की जरूरत भी नहीं पड़ती।
कंपनी का दावा है कि यह मशीन स्कैन समय में करीब 37 प्रतिशत की कमी लाती है और हीलियम की खपत 75 प्रतिशत तक घटाती है। इसका मतलब है कि जांच सस्ती भी हो सकती है। अगर ऐसा होता है, तो ग्रामीण और छोटे शहरों के मरीजों को भी बड़ी राहत मिल सकती है।
भारत का बड़ा कदम: मेडिकल एजुकेशन में भी AI
Artificial Intelligence in Medicine के क्षेत्र में भारत ने सिर्फ नई डिवाइस तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि मेडिकल शिक्षा में भी बड़ा कदम उठाया है। AIIMS Delhi ने World Health Organization (WHO) के सहयोग से एक वैश्विक एआई-आधारित मेडिकल पाठ्यक्रम तैयार किया है। इसका उद्देश्य डॉक्टरों को एआई तकनीक के साथ प्रभावी ढंग से काम करने के लिए तैयार करना है।
एम्स के निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास के अनुसार, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चिकित्सा का भविष्य है, लेकिन यह डॉक्टरों का विकल्प नहीं, बल्कि उनका सहयोगी है।” यानी मशीनें अंतिम फैसले नहीं लेंगी, बल्कि डॉक्टरों की समझ और निर्णय क्षमता को और मजबूत करेंगी।
इस नए पाठ्यक्रम के तहत एमबीबीएस और बीडीएस छात्रों को एआई टूल्स का सही, सुरक्षित और नैतिक उपयोग सिखाया जाएगा। क्योंकि तकनीक जितनी शक्तिशाली होती है, उसकी जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होती है।
बदलती दुनिया, बदलता इलाज
आज एआई मेडिकल इमेजिंग, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और हेल्थ मैनेजमेंट में तेजी से जगह बना रहा है। पहले जहां रिपोर्ट आने में कई दिन लग जाते थे, अब मशीनें मिनटों में विश्लेषण कर सकती हैं। इससे डॉक्टरों को फैसला लेने में मदद मिलती है और मरीज को समय पर इलाज मिल सकता है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि किसी भी नई तकनीक को पूरी तरह अपनाने से पहले व्यापक परीक्षण जरूरी है। हर दावा जमीन पर कितना सफल होता है, यह समय बताएगा। लेकिन इतना तय है कि हेल्थ सेक्टर में एआई की एंट्री एक बड़ी क्रांति की शुरुआत है।
उम्मीद की नई किरण
कैंसर का नाम सुनते ही लोग घबरा जाते हैं। कई बार बीमारी का पता तब चलता है, जब बहुत देर हो चुकी होती है। अगर यह एआई डिवाइस सच में शुरुआती चरण में बीमारी पकड़ने में सक्षम है, तो यह लाखों परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण बन सकती है।
भारत में एआई समिट 2026 सिर्फ तकनीकी प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भविष्य की झलक बनकर सामने आया है। जहां एक ओर स्मार्ट मशीनें इलाज को तेज और सटीक बना रही हैं, वहीं दूसरी ओर मेडिकल शिक्षा में एआई का समावेश डॉक्टरों की नई पीढ़ी को तैयार कर रहा है।
आने वाले सालों में हो सकता है कि अस्पतालों की तस्वीर बदल जाए — जहां मशीन और डॉक्टर मिलकर मरीज को बेहतर और समय पर इलाज दें। फिलहाल, 30 मिनट में कैंसर की पहचान का दावा देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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