AIIMS new rules 2026: अब हर बीमारी का इलाज नहीं करेगा एम्स! 2026 से बदले नियम, जानिए किसे मिलेगा इलाज
AIIMS new rules 2026: देश का सबसे बड़ा और भरोसेमंद सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल माना जाता है। यहां हर साल करीब 50 लाख मरीज इलाज के लिए आते हैं। इनमें देश के कोने-कोने से आए गंभीर मरीज भी होते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी पहुंच जाते हैं जिन्हें सिर्फ खांसी, जुकाम या हल्का बुखार होता है।
इसी बढ़ती भीड़ और सीमित संसाधनों को देखते हुए एम्स प्रशासन ने 2026 से इलाज के नियमों में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है।
एम्स निदेशक की साफ अपील
एम्स के निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास ने साफ शब्दों में कहा है कि एम्स सर्दी-खांसी या मामूली बीमारियों के इलाज के लिए नहीं, बल्कि गंभीर और जटिल रोगों के लिए बना है।
उनका कहना है कि जब तक सामान्य बीमारियों का दबाव कम नहीं होगा, तब तक गंभीर मरीजों को समय पर बेहतर इलाज देना मुश्किल रहेगा।
अब किन मरीजों को मिलेगी प्राथमिकता?
नए नियमों के अनुसार, एम्स में इलाज की प्राथमिकता अब इस आधार पर तय होगी:
- ऑनलाइन अपॉइंटमेंट वाले मरीज
- दूसरे अस्पतालों से रेफर होकर आए गंभीर मरीज
- जटिल और सुपर-स्पेशियलिटी इलाज की जरूरत वाले केस
मतलब साफ है—जो मरीज वास्तव में एम्स की विशेषज्ञ सेवाओं के हकदार हैं, उन्हें पहले देखा जाएगा।
सामान्य बीमारियों के मरीजों के लिए क्या सलाह?
एम्स प्रशासन ने साफ कहा है कि खांसी, जुकाम, बुखार, पेट दर्द जैसी सामान्य समस्याओं के लिए मरीजों को अपने स्थानीय सरकारी अस्पताल, जिला अस्पताल या क्लिनिक में इलाज कराना चाहिए।
ऐसे मामलों में एम्स आना न सिर्फ मरीज के लिए परेशानी बढ़ाता है, बल्कि गंभीर मरीजों के इलाज में भी बाधा बनता है।
AIIMS online appointment mandatory
अब एम्स जाने से पहले ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेना बेहद जरूरी हो गया है।
इसके लिए मरीजों को ORS.gov.in वेबसाइट पर जाकर स्लॉट बुक करना होगा।
बिना अपॉइंटमेंट आने वालों को:
- लंबा इंतजार करना पड़ सकता है
- इलाज में प्राथमिकता नहीं मिलेगी
एम्स प्रशासन का मानना है कि इससे अस्पताल में भीड़ कम होगी और सिस्टम ज्यादा व्यवस्थित बनेगा।
रेफरल मरीजों को क्यों मिल रही है खास प्राथमिकता?
डॉ. श्रीनिवास के अनुसार, एम्स की असली जिम्मेदारी रेफरल मरीजों की है।
जब किसी छोटे अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में इलाज संभव नहीं होता, तब मरीज को एम्स रेफर किया जाता है। ऐसे मरीजों को:
- तुरंत देखा जाएगा
- ओपीडी या इमरजेंसी में प्राथमिकता मिलेगी
- बेड और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा जल्दी उपलब्ध कराई जाएगी
डिजिटल सिस्टम होगा और मजबूत
एम्स ने 2026 से अपनी डिजिटल व्यवस्था को और मजबूत करने का फैसला लिया है।
नए बदलावों में शामिल हैं:
- डॉक्टरों की ऑन-कॉल ड्यूटी का ऑनलाइन डैशबोर्ड
- बेड की उपलब्धता की लाइव जानकारी
- इमरजेंसी में किस डॉक्टर से संपर्क करना है, यह साफ दिखेगा
1 अप्रैल से मैन्युअल सिस्टम लगभग खत्म कर दिया जाएगा और डिजिटल डैशबोर्ड ही आधिकारिक माध्यम होगा।
मरीजों और परिजनों के लिए सुविधाएं जारी
एम्स प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि मरीजों और उनके परिजनों की सुविधाओं में कोई कटौती नहीं की जा रही।
अब भी उपलब्ध हैं:
- विश्राम सदन (₹20 प्रतिदिन में ठहरने और खाने की सुविधा)
- फ्री ई-शटल सेवा
- एम्स दिल्ली और NCI झज्जर मिलाकर करीब 1500 बेड
क्या है इन बदलावों का असली मकसद?
इन नियमों का उद्देश्य किसी को इलाज से वंचित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि:
- गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिले
- डॉक्टरों और संसाधनों का सही इस्तेमाल हो
- एम्स की सुपर-स्पेशियलिटी पहचान बनी रहे
निष्कर्ष
2026 से लागू हो रहे ये बदलाव एम्स को और ज्यादा व्यवस्थित, डिजिटल और मरीज-केंद्रित बनाने की दिशा में बड़ा कदम हैं।
अगर लोग सामान्य बीमारियों के लिए स्थानीय अस्पतालों का रुख करें और एम्स सिर्फ गंभीर मामलों के लिए आएं, तो इसका फायदा सबसे ज्यादा उन मरीजों को होगा जिनकी जान सच में दांव पर होती है।
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