AR Rahman के बयान से क्यों मचा विवाद? शंकर महादेवन की प्रतिक्रिया से समझिए पूरा मामला
दिग्गज संगीतकार AR Rahman इन दिनों अपने नए गानों या किसी बड़े म्यूज़िक प्रोजेक्ट की वजह से नहीं, बल्कि अपने एक बयान के कारण सुर्खियों में हैं। फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ती सांप्रदायिकता और इसके चलते काम के अवसरों में कमी को लेकर रहमान की टिप्पणी ने मनोरंजन जगत में बहस छेड़ दी है। यह मामला तब और गरमा गया, जब अब इस पर मशहूर संगीतकार और गायक शंकर महादेवन की प्रतिक्रिया भी सामने आ गई।
क्या कहा था AR Rahman ने?
दरअसल, एआर रहमान ने हाल ही में बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में फिल्म और म्यूज़िक इंडस्ट्री को लेकर कई तीखे सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि बीते कुछ वर्षों में इंडस्ट्री का माहौल बदला है और अब टैलेंट के बजाय अन्य कारणों से काम मिलने लगा है।
रहमान के मुताबिक, “पिछले आठ सालों से मैं महसूस कर रहा हूं कि इंडस्ट्री में काबिलियत के दम पर काम नहीं मिलता। म्यूज़िक इंडस्ट्री की कमान ऐसे लोगों के हाथों में है, जो न तो क्रिएटिव हैं और न ही क्रिएटिविटी को समझते हैं। धर्म भी कम काम मिलने की एक बड़ी वजह बन गया है।”
इतना ही नहीं, रहमान ने विक्की कौशल की फिल्म ‘छावा’ को लेकर भी टिप्पणी की और उसे समाज को बांटने वाली फिल्म बताया। इसी बयान के बाद सोशल मीडिया और इंडस्ट्री में उनके विचारों को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
विवाद बढ़ा तो दी सफाई
रहमान के बयान के बाद उन्हें ट्रोलिंग और आलोचना का भी सामना करना पड़ा। विवाद बढ़ने पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनके शब्दों को गलत संदर्भ में लिया गया है और उनका मकसद किसी धर्म या समुदाय को निशाना बनाना नहीं था। हालांकि, उनकी सफाई के बावजूद यह मुद्दा शांत होता नजर नहीं आया।
शंकर महादेवन ने रखी अपनी बात
अब इस पूरे विवाद पर मशहूर संगीतकार शंकर महादेवन ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। एनडीटीवी से बातचीत के दौरान उन्होंने इस विषय को एक अलग नजरिए से देखने की बात कही।
शंकर महादेवन ने कहा कि इंडस्ट्री को दो हिस्सों में बांटकर देखा जाना चाहिए। “एक वो लोग होते हैं जो संगीत बनाते हैं और दूसरे वो, जो उस संगीत का भविष्य तय करते हैं। ये दोनों बिल्कुल अलग समूह हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि अक्सर ऐसा होता है कि किसी कलाकार की रचना का भविष्य ऐसे लोगों के हाथ में होता है, जिन्हें संगीत की गहरी समझ ही नहीं होती।
“संगीत अपना रास्ता खुद बनाता है”
शंकर महादेवन के अनुसार, “मैं हमेशा यही मानता हूं कि संगीत अपना भविष्य खुद तय करता है। अगर कोई रचना सच्ची है और दिल से बनाई गई है, तो वह देर-सवेर अपनी जगह बना ही लेती है।”
हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर यह नहीं कहा कि वे AR Rahman के बयान से पूरी तरह सहमत हैं या असहमत, लेकिन उनकी बातों से यह साफ झलकता है कि वे इस मुद्दे को व्यक्ति या धर्म से जोड़ने के बजाय सिस्टम की समस्या मानते हैं।
इंडस्ट्री में क्रिएटिव बनाम नॉन-क्रिएटिव की बहस
इस विवाद ने एक बार फिर फिल्म और म्यूज़िक इंडस्ट्री में क्रिएटिव बनाम नॉन-क्रिएटिव कंट्रोल की बहस को हवा दे दी है। कई कलाकार पहले भी यह मुद्दा उठा चुके हैं कि कैसे बिज़नेस फैसले लेने वाले लोग रचनात्मक स्वतंत्रता को सीमित कर देते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव और कॉर्पोरेट कंट्रोल ने इंडस्ट्री की दिशा बदल दी है, जहां कला से ज्यादा मुनाफा प्राथमिकता बन गया है।
रहमान का कद और प्रभाव
AR Rahman न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान रखने वाले संगीतकार हैं। ऑस्कर, ग्रैमी और पद्म पुरस्कारों से सम्मानित रहमान का बयान इसलिए भी ज्यादा अहम हो जाता है, क्योंकि वे इंडस्ट्री के भीतर से सिस्टम पर सवाल उठा रहे हैं।
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