दहेज या दान? Arun Panwar Dowry Controversy ने 2026 में सोच को कटघरे में खड़ा किया
Arun Panwar Dowry Controversy: साल 2026 चल रहा है। देश डिजिटल बन चुका है, लोग करोड़ों कमा रहे हैं, सोशल मीडिया पर मोटिवेशन और मॉडर्न सोच की बातें हो रही हैं।
लेकिन इसी दौर में एक बार फिर दहेज प्रथा को लेकर ऐसा विवाद सामने आया है, जिसने समाज की सोच पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
इस बार मामला किसी आम परिवार का नहीं, बल्कि 24 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर वाले मशहूर यूट्यूबर अरुण पंवार से जुड़ा है।
YouTuber Dowry Case India
अरुण पंवार की शादी साल 2025 के आखिर में हुई थी। उस वक्त सब कुछ सामान्य माना गया। लेकिन 2026 की शुरुआत में अचानक उनकी शादी से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।
इन वीडियो में दावा किया गया कि शादी के दौरान
- 71 लाख रुपये नकद
- और 21 तोला सोना
उन्हें “दान” के रूप में दिया गया।
बस यहीं से बहस ने आग पकड़ ली।
सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
जैसे ही ये वीडियो सामने आए, सोशल मीडिया पर लोग दो हिस्सों में बंट गए।
एक तरफ वे लोग थे जो साफ कह रहे थे—“नाम कुछ भी दे दो, अगर शादी के बदले पैसा और सोना लिया जा रहा है, तो वो दहेज ही है।”
दूसरी तरफ कुछ लोग यह तर्क दे रहे थे कि “शादी में दिए गए उपहार स्वेच्छा से होते हैं, हर चीज को दहेज कहना सही नहीं।”
लेकिन मामला यहीं नहीं रुका।
कमाई के बावजूद दहेज क्यों?
इस विवाद को और ज्यादा गंभीर बना दिया एक तथ्य ने। खुद अरुण पंवार की यूट्यूब से मंथली इनकम करीब 20 से 25 लाख रुपये बताई जाती है।
लोगों का सवाल था— जब कमाई इतनी ज्यादा है, तो फिर शादी में इतनी बड़ी रकम और सोना लेने की जरूरत क्यों पड़ी?
यही वजह है कि ट्रोलिंग तेज हो गई।
कई यूजर्स ने इसे “दहेज को दान कहकर जायज ठहराने की कोशिश” बताया।
कानून क्या कहता है?
भारत में Dowry Prohibition Act 1961 के तहत
- दहेज लेना अपराध है
- दहेज देना भी अपराध है
फिर चाहे उसे “गिफ्ट”, “दान” या “रिवाज” कोई भी नाम दे दिया जाए।
यही बात सोशल मीडिया पर बार-बार उठाई जा रही है कि अगर वीडियो में दिखाई गई रकम और सोना सच है,
तो अब तक कोई कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
पत्नी को लेकर भी सवाल
इस पूरे विवाद में अरुण पंवार की पत्नी को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि वह एक योग्य और सफल सर्जन हैं।
लोग सवाल कर रहे हैं—
अगर पढ़े-लिखे, आत्मनिर्भर और प्रोफेशनली सफल लोग भी इस प्रथा को स्वीकार कर लेते हैं, तो समाज से दहेज कैसे खत्म होगा?
कुछ यूजर्स ने चिंता जताई कि कहीं आगे चलकर “और उपहार” या “और उम्मीदों” का दबाव महिला पर न डाला जाए।
ये सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं
यह विवाद सिर्फ अरुण पंवार तक सीमित नहीं है।
यह उस सोच का आईना है, जो आज भी समाज के बड़े हिस्से में जिंदा है।
आज दहेज
- खुलेआम नहीं मांगा जाता
- लेकिन “रिवाज”, “स्टेटस”, “दान” और “इज्जत” के नाम पर लिया जाता है
खासतौर पर पढ़े-लिखे और संपन्न वर्ग में इसे ज्यादा चालाकी से पेश किया जाता है।
समाज पर पड़ने वाला असर
जब प्रभावशाली लोग ऐसा करते हैं, तो आम लोग इसे सही मानने लगते हैं।
लड़कियों के माता-पिता सोचते हैं— “अगर बड़े लोग ले रहे हैं, तो हमें भी देना ही पड़ेगा।”
यही सोच इस बुराई को आगे बढ़ाती है।
अब तक कोई बयान नहीं
फिलहाल इस पूरे मामले पर अरुण पंवार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन चुप्पी भी सवाल खड़े करती है।
असली सवाल अब भी वही है
क्या दहेज जैसी सामाजिक बुराई
सिर्फ कानून से खत्म हो सकती है?
या फिर
- सोच बदलनी होगी
- दिखावे की शादी छोड़नी होगी
- और यह मानना होगा कि बेटी कोई बोझ नहीं है
सोशल मीडिया पर चल रही यह बहस एक बार फिर साबित करती है कि दहेज आज भी जिंदा है, बस उसका नाम बदल गया है।
और जब तक नाम से ज्यादा नीयत नहीं बदलेगी,
तब तक हर साल कोई न कोई ऐसा विवाद सामने आता रहेगा।
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