Babur Sexuality Truth: क्या बाबर सच में Bisexual था? जानिए इतिहासकारों की राय और बाबरनामा क्या कहता है?
Babur Sexuality Truth: इतिहास की किताबों में Babur को मुगल साम्राज्य के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। 16वीं सदी में भारत आने वाले इस तैमूरी शासक ने न सिर्फ युद्ध लड़े, बल्कि अपनी जिंदगी के अनुभवों को खुद लिखा भी। उनकी आत्मकथा Baburnama को मध्यकालीन इतिहास का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है।
बाबरनामा सिर्फ युद्धों और राजनीतिक घटनाओं का विवरण नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे शासक के मन की झलक भी देता है, जो भावनाओं, असमंजस और निजी संघर्षों से भी गुजर रहा था।
बाबरी के प्रति आकर्षण का उल्लेख
Baburnama Controversy उस हिस्से को लेकर सामने आई, जिसमें बाबर ने अपनी युवावस्था का जिक्र करते हुए “बाबरी” नाम के एक युवक के प्रति अपने आकर्षण का वर्णन किया है। इतिहासकारों के मुताबिक उस समय बाबर की उम्र करीब 17 वर्ष थी।
उन्होंने लिखा कि उस युवक को देखकर वे असहज हो जाते थे, उसकी आंखों में सीधे नहीं देख पाते थे और उसके आने-जाने से उनके मन में हलचल होती थी। बाबर ने इन भावनाओं को “जवानी की नादानी” और “अजीब प्रवृत्ति” जैसे शब्दों में व्यक्त किया है।
कुछ अनुवादों में यह भी उल्लेख मिलता है कि उन्होंने तुर्की भाषा में उस युवक की सुंदरता पर दोहे लिखे थे। इन्हीं अंशों के आधार पर कई आधुनिक इतिहासकारों ने बाबर की यौनिकता को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं और चर्चाएं की हैं।
इतिहासकार क्या कहते हैं?
आज के समय में कुछ विद्वान मानते हैं कि बाबर संभवतः उभयलिंगी (Bisexual) रहे होंगे, क्योंकि उन्होंने पुरुष के प्रति आकर्षण का जिक्र किया और साथ ही उनकी कई पत्नियाँ और संतानें भी थीं।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि 16वीं सदी के सामाजिक मानदंड आज से बिल्कुल अलग थे। उस दौर में दरबारों और साम्राज्यों में भावनाओं की अभिव्यक्ति अलग तरीके से होती थी। कई बार काव्यात्मक भाषा में लिखी गई बातों को शाब्दिक रूप से लेना सही नहीं होता।
कुछ इतिहासकार यह भी मानते हैं कि बाबर का वर्णन युवावस्था के क्षणिक आकर्षण का हो सकता है, जिसे बाद में उन्होंने ईमानदारी से दर्ज कर दिया।
बाबर का वैवाहिक जीवन
इतिहास के अनुसार, बाबर का विवाह कम उम्र में ही आयशा सुल्तान बेगम से हुआ था। बाबरनामा में उन्होंने अपने पहले विवाह के बारे में लिखा है कि वे स्वभाव से शर्मीले थे और पत्नी से मिलने में झिझकते थे।
बाद में उनकी अन्य शादियाँ भी हुईं और उनके कई बच्चे हुए, जिनमें Humayun प्रमुख थे।
इस आधार पर कुछ विद्वान यह तर्क देते हैं कि बाबर को केवल समलैंगिक कहना ऐतिहासिक रूप से सटीक नहीं होगा।
हरम और उस दौर की सामाजिक व्यवस्था
मुगल दरबारों में हरम की व्यवस्था आम थी। उस समय के कई एशियाई और मध्य-पूर्वी साम्राज्यों में भी ऐसी व्यवस्थाएँ थीं। लेकिन यह कहना कि पूरी व्यवस्था केवल यौन शोषण पर आधारित थी, एक अतिशयोक्ति हो सकती है।
इतिहास को समझने के लिए उस समय की सामाजिक संरचना, सत्ता व्यवस्था और सांस्कृतिक संदर्भ को ध्यान में रखना जरूरी है।
एक शासक का मानवीय पक्ष
बाबर को अक्सर केवल एक विजेता या आक्रमणकारी के रूप में देखा जाता है। लेकिन बाबरनामा पढ़ने पर एक अलग तस्वीर भी सामने आती है—एक ऐसा व्यक्ति जो कविता लिखता है, प्रकृति का वर्णन करता है, और अपने मन के उतार-चढ़ाव को खुलकर स्वीकार करता है।
उनके संस्मरणों में ईमानदारी दिखाई देती है। वे अपनी कमजोरियों, भय, आकर्षण और शर्म का भी उल्लेख करते हैं। यही बात बाबरनामा को खास बनाती है।
निष्कर्ष
बाबर के जीवन से जुड़े ये प्रसंग इतिहास के जटिल और मानवीय पहलुओं को उजागर करते हैं। उनकी यौनिकता को लेकर अलग-अलग मत हैं, लेकिन यह तय है कि बाबरनामा हमें एक ऐसे शासक की झलक देता है, जो सिर्फ तलवार का धनी नहीं था, बल्कि भावनाओं का भी इंसान था।
इतिहास को समझते समय संतुलन और संदर्भ दोनों जरूरी हैं। बाबर के जीवन का यह अध्याय हमें यही सिखाता है कि अतीत को आधुनिक नजर से देखने से पहले उसके समय और समाज को समझना जरूरी है।
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