PCS अफसर Alankar Agnihotri
उत्तर प्रदेश के बरेली में सोमवार को उस वक्त बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया, जब सिटी मजिस्ट्रेट पद पर तैनात पीसीएस अधिकारी Alankar Agnihotri ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इस्तीफे की वजह सरकारी नीतियों से गहरे मतभेद, खासकर UGC Equity Regulations 2026 और प्रदेश में कथित तौर पर चल रहे “ब्राह्मण विरोधी माहौल” को बताया। मामला यहीं नहीं रुका—इस्तीफे के कुछ ही घंटों बाद उन्होंने जिलाधिकारी आवास में बंधक बनाए जाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए।
हालांकि, प्रदेश सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अलंकार अग्निहोत्री को निलंबित कर दिया और उन्हें शामली कलेक्टर कार्यालय से अटैच कर दिया गया है। पूरे प्रकरण की जांच बरेली मंडलायुक्त को सौंपी गई है।
गणतंत्र दिवस पर दिया इस्तीफा
Alankar Agnihotri ने 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस के दिन अपना इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया। उन्होंने राज्यपाल को संबोधित सात पेज का इस्तीफा पत्र लिखा, जिसकी भाषा बेहद तीखी और राजनीतिक टिप्पणियों से भरी हुई है। पत्र में उन्होंने साफ लिखा कि “देश में अब न जनतंत्र है, न गणतंत्र, केवल भ्रमतंत्र रह गया है।”
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था में ब्राह्मणों, साधु-संतों और सामान्य श्रेणी के नागरिकों को योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।
Alankar Agnihotri के इस्तीफे की बड़ी वजह क्या है
अपने इस्तीफे में अलंकार अग्निहोत्री ने प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के दिन ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज और उनके शिष्यों के साथ कथित मारपीट का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि स्थानीय प्रशासन द्वारा बटुक ब्राह्मणों को जमीन पर गिराकर पीटा गया और उनकी चोटी पकड़कर घसीटा गया, जो धार्मिक और सांस्कृतिक अपमान है।
उन्होंने यह भी कहा कि चोटी या शिखा ब्राह्मण और साधु-संतों की धार्मिक पहचान है, और उस पर हमला पूरे समुदाय की अस्मिता पर हमला है। अग्निहोत्री ने खुद को ब्राह्मण बताते हुए कहा कि इस घटना ने “एक सामान्य ब्राह्मण की आत्मा को झकझोर दिया है।”
ब्राह्मण विरोध के गंभीर आरोप
Alankar Agnihotri ने उत्तर प्रदेश सरकार पर “लंबे समय से ब्राह्मण विरोधी अभियान” चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने हाल की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि एक डिप्टी जेलर द्वारा एक ब्राह्मण कैदी को पीट-पीटकर मारने और एक दिव्यांग ब्राह्मण की पुलिस थाने में हत्या जैसी घटनाएं इसी मानसिकता का नतीजा हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ब्राह्मण समाज के सांसद और विधायक मूकदर्शक बने हुए हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से समुदाय के समर्थन में खड़े होने या इस्तीफा देने की अपील तक कर डाली।
UGC इक्विटी नियम 2026 पर खुला विरोध
अलंकार अग्निहोत्री ने UGC के नए इक्विटी नियम 2026 को लेकर भी कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने 13 जनवरी 2026 को जारी केंद्र सरकार के गजट का हवाला देते हुए कहा कि नए नियमों के तहत सामान्य श्रेणी के छात्रों को अपराधी की तरह देखा जा रहा है।
उन्होंने आशंका जताई कि इन नियमों के तहत उनके जैसे सामान्य वर्ग के लोगों और उनके बच्चों के खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज कराई जा सकती हैं। सोशल मीडिया पर सामने आई एक तस्वीर में अलंकार अग्निहोत्री हाथ में पोस्टर लिए नजर आए, जिस पर लिखा था—
“#UGC Rollback, काला कानून वापस लो”
डीएम आवास में बंधक बनाए जाने का आरोप
इस्तीफे के बाद सोमवार शाम को अलंकार अग्निहोत्री जिलाधिकारी आवास पहुंचे। करीब एक घंटे बाद बाहर निकलकर उन्होंने मीडिया के सामने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें 45 मिनट तक डीएम आवास में बंधक बनाकर रखा गया।
उनका दावा है कि डीएम ने बातचीत के बहाने बुलाया और वहां उन्हें रोके रखा गया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने इस दौरान सचिव दीपक पांडेय को फोन कर बताया कि उन्हें बंधक बनाया गया है। इसके बाद ही उन्हें छोड़ा गया।
Alankar Agnihotri ने यह भी आरोप लगाया कि लखनऊ से एक अधिकारी का फोन आया, जिसने स्पीकर पर अपशब्द कहे। उन्होंने कहा कि पूरी कोशिश थी कि उन्हें रातभर वहीं रोके रखा जाए।
आधी रात सरकारी आवास छोड़ा
बंधक बनाने के आरोपों के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने आधी रात को ही अपना सरकारी आवास खाली कर दिया और बिना चार्ज हैंडओवर किए बरेली छोड़ दिया। उन्होंने ऐसा करने की वजह डर और असुरक्षा बताई। साथ ही संकेत दिए कि वह इस पूरे मामले को लेकर हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं।
प्रशासन का पलटवार
दूसरी ओर, बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने अलंकार अग्निहोत्री के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। डीएम ने कहा कि बंधक बनाए जाने का आरोप पूरी तरह निराधार और भ्रामक है, जिसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।
इसी बीच प्रदेश सरकार ने अलंकार अग्निहोत्री को निलंबित कर दिया और मामले की जांच के आदेश दे दिए।
धर्म के रास्ते की ओर?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज द्वारा अलंकार अग्निहोत्री से बातचीत और उन्हें धर्म क्षेत्र में बड़ा दायित्व देने के प्रस्ताव की भी चर्चा सामने आई है।
कुल मिलाकर क्या है मामला?
एक तरफ एक पीसीएस अधिकारी का इस्तीफा, दूसरी ओर सरकार पर गंभीर आरोप, UGC नियमों का विरोध और बंधक बनाए जाने जैसे दावे—अलंकार अग्निहोत्री का मामला प्रशासनिक विवाद से आगे बढ़कर राजनीतिक, सामाजिक और वैचारिक बहस का रूप ले चुका है। अब सबकी नजरें जांच रिपोर्ट और अदालत के अगले कदम पर टिकी हैं।
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