Bira 91 Story: Zero से Unicorn बनने का सपना, फिर कर्ज़ और संकट तक कैसे पहुँचा बीरा 91
Bira 91 story: जानिए कैसे India’s coolest beer brand Bira 91 zero से unicorn बना और फिर expansion, debt और regulatory mistakes की वजह से संकट में फंस गया।
एक स्टाइलिश बंदर, शरारती मुस्कान और ट्रेंडी बोतल—
इन्हीं चीज़ों ने Bira 91 को भारत की सबसे “कूल” बीयर बना दिया।
दिल्ली के हौज़ खास से लेकर बेंगलुरु के कोरमंगला तक, पब कल्चर का मतलब एक समय सिर्फ बीरा 91 था।
लेकिन आज वही ब्रांड घाटे, कर्ज़ और कोर्ट-कचहरी की सुर्खियों में है।
सवाल उठता है—
जो कंपनी “India’s Budweiser” बनने चली थी, वह इतनी तेजी से संकट में कैसे घिर गई?
Founder Ankur Jain और Bira 91 की शुरुआत
Bira 91 founder Ankur Jain किसी पारंपरिक शराब कारोबारी परिवार से नहीं आते।
वह एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे, जिन्होंने अमेरिका में पढ़ाई की और न्यूयॉर्क में काम किया।
यहीं उन्होंने Craft Beer Culture को करीब से देखा और समझा कि बीयर सिर्फ नशा नहीं, बल्कि एक lifestyle भी हो सकती है।
भारत लौटने पर उन्होंने देखा कि यहां बीयर का मतलब था—
ज्यादा अल्कोहल, कम कीमत।
अंकुर जैन को लगा कि नया भारत अब कुछ अलग चाहता है।
Branding Strategy जिसने गेम बदल दिया
नाम रखा गया— Bira
मतलब: दोस्त, यार, भाई
और साथ जोड़ा गया— 91, भारत का कंट्री कोड।
मैसेज साफ था— Imagined in India
लोगो में शेर या बाज नहीं, बल्कि एक बंदर रखा गया—
यह दिखाने के लिए कि ब्रांड पुराने नियम तोड़ने आया है।
बीयर बेल्जियम में बनी और बोतल पर लिखा गया— Made in Belgium
इसने शहरी युवाओं में बीरा को तुरंत ट्रेंड बना दिया।
Guerrilla Marketing और Rapid Growth
भारत में शराब के विज्ञापन पर रोक है, इसलिए बीरा ने अपनाया Guerrilla Marketing।
पब के वॉशरूम, टेबल, कूलर— हर जगह बंदर वाला लोगो दिखने लगा, यहां तक कि competitors के कूलर पर भी।
2016 में Sequoia Capital investment आया और बीरा एक बीयर ब्रांड से स्टार्टअप आइकन बन गई।
तेजी से विस्तार शुरू हुआ और कंपनी की valuation हज़ारों करोड़ में पहुंच गई।
Expansion की गलती और Rising Losses
यहीं से असली समस्या शुरू हुई।
अंकुर जैन सिर्फ क्राफ्ट बीयर तक सीमित नहीं रहना चाहते थे।
लक्ष्य था— Mass Market, यानी सीधे मुकाबला Kingfisher और Carlsberg से।
- नई फैक्ट्रियाँ
- हज़ारों कर्मचारी
- महंगे ऑफिस
- तेज़ एक्सपेंशन
लेकिन सच्चाई यह थी कि बीरा हर बोतल पर नुकसान उठा रही थी।
इसके बावजूद खर्च बढ़ता चला गया।
ICC Sponsorship और Cash Burn
एक बड़ा फैसला था— ICC sponsorship deal, जिसकी कीमत करीब ₹250 करोड़ बताई गई।
ब्रांड को global visibility मिली, लेकिन बीयर बेचने पर पाबंदी थी।
नतीजा:
- Branding तो हुई
- Revenue नहीं आया
- Cash burn और तेज़ हो गया
यह कदम बाद में कंपनी की वित्तीय हालत पर भारी पड़ा।
COVID Impact और Weak Balance Sheet
2020 में COVID pandemic आया।
पब और बार बंद हो गए, बिक्री लगभग शून्य हो गई।
लेकिन salaries, rent और operational खर्च जारी रहे।
कंपनी बाहर से चलती दिख रही थी, लेकिन अंदर से कमजोर हो चुकी थी।
IPO Preparation और Fatal Name Change
2024 में बीरा ने IPO plan पर काम शुरू किया।
इस दौरान कंपनी का नाम बदला गया—
B9 Beverages Private Limited से B9 Beverages Limited।
कागज़ों में यह एक छोटा बदलाव था, लेकिन शराब उद्योग के नियमों में इसका मतलब था—
नई कंपनी।
परिणाम बेहद गंभीर थे:
- पुराने liquor licenses अमान्य
- Supply chain ठप
- करीब ₹80 करोड़ का स्टॉक बेकार
- महीनों तक बिक्री बंद
Debt, Salary Crisis और Court Case
कंपनी पहले से ही cash crunch में थी।
इसके बाद:
- कर्मचारियों की salaries रुकीं
- PF और TDS विवाद सामने आए
- कर्मचारियों ने याचिका दायर की
कर्ज़ चुकाने के लिए The Beer Café stake गिरवी रखी गई, लेकिन repayment न होने पर वह हाथ से निकल गई।
कोर्ट में सवाल उठा—
“क्या कंपनी ₹25 करोड़ जमा कर सकती है?”
जवाब था— नहीं।
Valuation Crash और Founder Exit Pressure
एक समय बीरा 91 की valuation करीब ₹5000 करोड़ बताई जाती थी।
आज इसमें 70% से ज्यादा गिरावट आ चुकी है।
Unlisted shares:
- पहले ₹1000
- अब करीब ₹300
निवेशकों के दबाव में Founder Ankur Jain के इस्तीफे की चर्चा भी तेज़ हो गई।







