Bollywood Singer Rights: ₹10 हजार में करोड़ों का गाना? बॉलीवुड के सिंगर्स क्यों रह जाते हैं खाली हाथ
Bollywood Singer Rights: बॉलीवुड में जब कोई गाना सुपरहिट होता है, तो उसका जश्न हर तरफ दिखाई देता है। यूट्यूब व्यूज़ करोड़ों में पहुंच जाते हैं, फिल्में बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई करती हैं और म्यूजिक कंपनी मुनाफा गिनती है। लेकिन इस चमक-दमक के पीछे एक ऐसा सच छिपा है, जिस पर बहुत कम बात होती है—उस आवाज़ का सच, जिसने गाने को पहचान दी।
सवाल सीधा है— क्या गाना हिट होने से सिंगर की किस्मत भी बदलती है?
कई मामलों में जवाब है—नहीं।
Ra.One का ‘दिलदारा’: Bollywood Singers Exploitation
साल 2011 में शाहरुख खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म Ra.One रिलीज़ हुई। फिल्म के साथ गाना ‘दिलदारा’ भी लोगों की जुबान पर चढ़ गया। कम ही लोग जानते हैं कि इस गाने को सबसे पहले कृष्णा बेवरा ने रिकॉर्ड किया था।
रिकॉर्डिंग हुई। म्यूजिक डायरेक्टर खुश थे। टीम को पूरा भरोसा था कि गाना सुपरहिट होगा। लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने सिंगर की दुनिया की सच्चाई दिखा दी।
तीन दिन बीत गए—
ना कोई पेमेंट आया,
ना फोन उठाया गया।
फिर अचानक एक कॉल आया— “डायरेक्टर को दूसरी आवाज़ चाहिए।” और बस फोन कट।
कुछ समय बाद पता चला कि वही गाना किसी और सिंगर से दोबारा डब करवा लिया गया। न कोई जानकारी, न कोई सहमति। मेहनत आपकी, रिकॉर्डिंग आपकी—लेकिन पहचान किसी और की।
चक दे इंडिया: सिर्फ 10 हजार रुपए की कीमत
अब बात करते हैं फिल्म चक दे इंडिया के गाने ‘मौला मेरे’ की। यह गाना आज भी लोगों के दिलों में बसा है। आम धारणा यही है कि ऐसे गानों के बदले सिंगर को मोटी रकम मिलती होगी।
लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
इस गाने के लिए कृष्णा बेवरा को मिले— सिर्फ ₹10,000। और हैरानी की बात यह कि इसमें से भी TDS काट लिया गया। इतना ही नहीं, राज़ 2, मोको कहां ढूंढे रे बंदे और मेरा इंतकाम देखेगी जैसे गानों के लिए उन्हें एक रुपया भी नहीं मिला।
यानी गाने हिट हुए, फिल्में चलीं—लेकिन सिंगर खाली हाथ।
फीस मांगी तो अगली बार फोन नहीं आएगा
कृष्णा बेवरा साफ कहते हैं कि बॉलीवुड म्यूजिक इंडस्ट्री में एक अनकहा नियम चलता है। अगर आपने फीस की बात कर दी, तो अगली बार काम का फोन नहीं आएगा।
वह सवाल उठाते हैं—
“क्या किसी सुपरस्टार के पैसे काटने की हिम्मत है?
अगर नहीं, तो सिंगर के साथ ऐसा क्यों?”
यह डर ही सिंगर्स को चुप रहने पर मजबूर कर देता है।
Scratch Recording: मौका या शोषण?
म्यूजिक इंडस्ट्री में एक चलन है जिसे Scratch Recording कहा जाता है। एक ही गाने के लिए 4–5 सिंगर्स बुलाए जाते हैं और सबसे गवाया जाता है। फिर जिस आवाज़ पर टीम रुकती है, वही फाइनल होती है।
बाकी सिंगर्स?
ना पेमेंट,
ना क्रेडिट।
यह ऑडिशन नहीं, बल्कि इस्तेमाल कहा जा रहा है।
बड़े नाम भी उठा चुके हैं सवाल
यह समस्या सिर्फ नए सिंगर्स तक सीमित नहीं है।
अरिजीत सिंह खुलकर कह चुके हैं कि म्यूजिक इंडस्ट्री कलाकारों के दम पर चलती है, लेकिन फैसले बिजनेस करने वालों के हाथ में होते हैं। सिंगर गाने में इतना डूब जाता है कि फीस की बात करना भूल जाता है और इसी कमजोरी का फायदा उठाया जाता है। इसी वजह से अरिजीत चाहते हैं कि सरकार इस पर कानून बनाए।
अरमान मलिक ने भी माना है कि उन्हें कई बार गानों से रिप्लेस किया गया, जिससे उनके मन में खुद को लेकर सवाल उठने लगे।
नेहा कक्कड़ कहती हैं कि बॉलीवुड में कई बार गानों के पैसे ही नहीं मिलते।
कनिका कपूर बताती हैं कि कई सुपरहिट गानों के बदले सिर्फ ₹101 शगुन दिया जाता है।
ना रॉयल्टी, ना पेंशन, ना सुरक्षा
आज की तारीख में बॉलीवुड के ज्यादातर सिंगर्स के पास—
- कोई तय रॉयल्टी सिस्टम नहीं
- कोई पेंशन नहीं
- कोई भविष्य की सुरक्षा नहीं
आवाज़ चली गई, तो करियर भी खत्म।
बड़ा सवाल अब सबके सामने
अगर यही सिस्टम चलता रहा, तो क्या आने वाले समय में और सिंगर्स प्लेबैक सिंगिंग छोड़ देंगे?
क्या बॉलीवुड अपनी सबसे बड़ी ताकत—आवाज़—खो देगा?
यह सवाल अब सिर्फ कलाकारों का नहीं, बल्कि पूरी इंडस्ट्री और दर्शकों का है।
क्योंकि अगर आवाज़ें चुप होती गईं, तो गानों की आत्मा भी खत्म हो जाएगी।
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