Budget 2026: नए टैक्स रिजीम में होम लोन और हेल्थ इंश्योरेंस शामिल होंगे? मिडिल क्लास को मिल सकती है बड़ी राहत
Budget 2026 से पहले टैक्सपेयर्स, खासकर मिडिल क्लास की उम्मीदें तेजी से बढ़ती दिख रही हैं। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि क्या सरकार नई टैक्स रिजीम (New Tax Regime) को और ज्यादा attractive बनाएगी। प्रमुख मांग यह है कि होम लोन के ब्याज और मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर मिलने वाली डिडक्शन, खासतौर पर सेक्शन 80D, को भी नई टैक्स रिजीम में शामिल किया जाए।
फिलहाल स्थिति यह है कि नई टैक्स रिजीम में टैक्स रेट भले ही कम हैं, लेकिन जरूरी डिडक्शन न मिलने के कारण कई टैक्सपेयर्स अब भी पुरानी टैक्स रिजीम को चुनना बेहतर समझते हैं। यही वजह है कि मिडिल क्लास को नई व्यवस्था पूरी तरह रास नहीं आ पा रही है।
अगर Budget 2026 में इन डिडक्शंस को लेकर कोई बड़ा बदलाव किया जाता है, तो नई टैक्स रिजीम मिडिल क्लास के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकती है। इससे न सिर्फ टैक्स प्लानिंग आसान होगी, बल्कि आम परिवारों को सीधी राहत मिलने की उम्मीद भी मजबूत होगी।
नई टैक्स रिजीम में दिक्कत क्या है?
फिलहाल नई टैक्स रिजीम में ज्यादातर डिडक्शन उपलब्ध नहीं हैं।
- न होम लोन ब्याज की छूट
- न हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर फायदा
हालांकि टैक्स स्लैब आसान हैं और रेट्स कम हैं, लेकिन जिन लोगों ने घर खरीदा है या हेल्थ इंश्योरेंस लिया है, उन्हें पुरानी रिजीम ज्यादा फायदेमंद लगती है।
हेल्थ इंश्योरेंस पर क्यों जरूरी है डिडक्शन?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि मेडिकल महंगाई 12–14% सालाना बढ़ रही है। ऐसे में हेल्थ इंश्योरेंस अब लग्जरी नहीं, बल्कि जरूरत बन चुका है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट नियति शाह के अनुसार, नई टैक्स रिजीम में हेल्थ इंश्योरेंस पर ₹25,000 से ₹50,000 तक की कैप्ड डिडक्शन दी जानी चाहिए। ICAI (चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्था) ने भी सरकार को यह सुझाव दिया है कि सेक्शन 80D को नई रिजीम में शामिल किया जाए, ताकि हेल्थ इंश्योरेंस आम लोगों के लिए और अफोर्डेबल बन सके।
होम लोन पर राहत की भी मांग
प्रॉपर्टी की कीमतें और EMI लगातार बढ़ रही हैं। इसी वजह से एक्सपर्ट्स होम लोन इंटरेस्ट डिडक्शन को मौजूदा ₹2 लाख से बढ़ाकर ₹3–5 लाख तक करने की मांग कर रहे हैं।
फाइनेंशियल एक्सप्रेस और अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार होम लोन पर बड़ी राहत दे सकती है, साथ ही GST बेनिफिट्स पर भी विचार हो रहा है।
अगर बदलाव हुए तो कितना फायदा होगा?
मान लीजिए आपकी सालाना इनकम ₹15 लाख है।
मौजूदा नई टैक्स रिजीम में
- स्टैंडर्ड डिडक्शन: ₹75,000
- टैक्स लगभग: ₹1.56 लाख
अगर ये डिडक्शन मिल जाएं
- होम लोन ब्याज: ₹2 लाख
- हेल्थ इंश्योरेंस: ₹25,000
तो टैक्सेबल इनकम घटकर ₹12.75 लाख रह जाएगी और टैक्स लगभग ₹1.17 लाख हो सकता है।
यानी करीब ₹39,000 की सीधी बचत।
अगर होम लोन की लिमिट ₹5 लाख तक बढ़ी, तो 30% स्लैब में टैक्स बचत ₹1.5 लाख तक पहुंच सकती है।
क्या ₹17 लाख तक इनकम टैक्स-फ्री हो सकती है?
सोशल मीडिया और एक्सपर्ट्स के बीच चर्चा है कि अगर
- स्टैंडर्ड डिडक्शन
- 80D हेल्थ इंश्योरेंस
- होम लोन इंटरेस्ट
तीनों को नई टैक्स रिजीम में शामिल कर लिया गया, तो प्रभावी टैक्स-फ्री इनकम 15–17 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। हालांकि अभी यह सिर्फ अनुमान और मांगें हैं।
अभी क्या है सच्चाई?
फिलहाल (FY 2025-26) में:
- नई टैक्स रिजीम में होम लोन और 80D डिडक्शन नहीं हैं
- 12 लाख तक इनकम पर सेक्शन 87A के तहत टैक्स छूट है
- स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹75,000 मिलता है
Budget 2026 में ये बदलाव होंगे या नहीं, इसका फैसला सरकार करेगी। लेकिन इतना तय है कि इस बार मिडिल क्लास की आवाज पहले से ज्यादा तेज है।
निष्कर्ष:
अगर बजट 2026 में नई टैक्स रिजीम में सीमित डिडक्शन भी जोड़ दी जाती हैं, तो यह मिडिल क्लास के लिए बड़ी राहत होगी। अब सबकी नजर फरवरी 2026 पर टिकी है।
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