महिलाओं में Cervical Cancer के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है।
महिलाओं में Cervical Cancer के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी सबसे बड़ी वजह जागरूकता की कमी है। इसी गंभीर समस्या को लेकर लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से NOVANEO हॉस्पिटल और दिल्ली कैंसर अस्पताल, तेरापंथ के संयुक्त तत्वावधान में एक विशाल सर्वाइकल कैंसर जांच शिविर का आयोजन किया गया।
इस विशेष कैंप में एक साथ 500 महिलाओं की जांच कर एक रिकॉर्ड भी बनाया गया। शिविर में हर आयु वर्ग की महिलाओं का पैप स्मीयर टेस्ट किया गया और साथ ही सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए उपलब्ध वैक्सीन को लेकर भी विस्तृत जानकारी दी गई।
समय पर जांच से पूरी तरह रोका जा सकता है Cervical Cancer
कैंप के दौरान मौजूद डॉ. प्रवीन जैन (सीनियर कैंसर स्पेशलिस्ट, दिल्ली कैंसर अस्पताल) ने बताया कि किसी भी प्रकार के कैंसर में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका समय पर पहचान की होती है।
उन्होंने कहा, “अगर कैंसर के शुरुआती लक्षणों को जल्दी पकड़ लिया जाए, तो इलाज बेहद आसान हो जाता है और मरीज के पूरी तरह ठीक होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।”
सर्वाइकल कैंसर क्या है और कैसे होता है?
सर्वाइकल कैंसर मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के कारण होता है। यह एक ऐसा कैंसर है जो इंफेक्शन से फैलता है।
चौंकाने वाली बात यह है कि करीब 80 प्रतिशत महिलाओं के शरीर में यह वायरस किसी न किसी समय मौजूद रहता है, लेकिन अधिकतर मामलों में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता इसे खुद ही खत्म कर देती है।
समस्या तब शुरू होती है जब यह वायरस शरीर में लंबे समय तक बना रहता है। ऐसी स्थिति में पहले प्री-कैंसरस बदलाव होते हैं और बाद में यही बदलाव सर्वाइकल कैंसर का रूप ले लेते हैं। इसी वजह से नियमित जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।
पैप स्मीयर टेस्ट
सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए पैप स्मीयर टेस्ट सबसे प्रभावी और आसान तरीका है।
यह एक पेनलेस टेस्ट है, जिसमें केवल 5 मिनट का समय लगता है और इससे कैंसर को बहुत शुरुआती अवस्था में ही पहचाना जा सकता है।
डॉक्टरों की सलाह है कि
- 30 साल से अधिक उम्र की हर महिला को
- हर 3 साल में एक बार पैप स्मीयर टेस्ट जरूर कराना चाहिए।
यह जांच 65 साल की उम्र तक नियमित रूप से कराई जानी चाहिए, हालांकि इससे अधिक उम्र की महिलाएं भी इसे करवा सकती हैं।
क्या सर्वाइकल कैंसर जेनेटिक होता है?
विशेषज्ञों के अनुसार सर्वाइकल कैंसर जेनेटिक या हेरिडिटरी नहीं होता।
डॉ. प्रवीन जैन बताते हैं कि यह किसी जीन या पारिवारिक कारण से नहीं, बल्कि HPV संक्रमण के कारण होता है। आमतौर पर यह वायरस सेक्सुअली एक्टिव महिलाओं में पाया जाता है और लंबे समय तक बने रहने पर कैंसर का कारण बन सकता है।
लाइफस्टाइल और सर्वाइकल कैंसर का क्या संबंध?
यह एक आम भ्रम है कि खराब लाइफस्टाइल के कारण सर्वाइकल कैंसर होता है। डॉक्टरों के मुताबिक यह बीमारी सीधे तौर पर मॉडर्न लाइफस्टाइल से जुड़ी नहीं है।
हालांकि, जिन महिलाओं के एक से अधिक सेक्स पार्टनर होते हैं, उनमें HPV संक्रमण का खतरा अधिक पाया जाता है, जबकि एक स्थायी पार्टनर होने पर जोखिम अपेक्षाकृत कम होता है।
सर्वाइकल कैंसर के प्रमुख लक्षण
सर्वाइकल कैंसर के कुछ ऐसे लक्षण हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जैसे—
- संबंध बनाने के बाद ब्लीडिंग
- योनि से बदबूदार या असामान्य डिस्चार्ज
- पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द
- बिना कारण कमजोरी या थकान
इन लक्षणों के दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
सर्वाइकल कैंसर वैक्सीन
भारत सरकार और स्वास्थ्य संगठन HPV वैक्सीनेशन को बढ़ावा दे रहे हैं।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार—
- 9 से 14 साल की उम्र में वैक्सीन लेने पर 2 डोज पर्याप्त हैं
- 15 साल से ऊपर की उम्र में 3 डोज की जरूरत होती है
अगर वैक्सीनेशन 9 से 26 साल की उम्र में कराया जाए, तो यह करीब 95 प्रतिशत तक सुरक्षा प्रदान करता है।
वहीं, 26 से 44 साल की उम्र में वैक्सीन लेने पर भी लगभग 45 प्रतिशत तक जोखिम कम किया जा सकता है।
जागरूकता ही सर्वाइकल कैंसर से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय पर जांच, सही जानकारी और वैक्सीनेशन को जन-आंदोलन बनाया जाए, तो सर्वाइकल कैंसर मुक्त भारत का सपना साकार किया जा सकता है।
इस दिशा में ऐसे जागरूकता कैंप समाज के लिए एक मजबूत कदम साबित हो रहे हैं।
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