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Delhi Excise policy case: अदालत ने 3 आरोपियों को दी जमानत, के कविता की न्यायिक हिरासत बढ़ाई

राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली एक्साइज पॉलिसी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तीन आरोपियों को जमानत दे दी और के कविता की न्यायिक हिरासत 3 जुलाई तक बढ़ा दी.

विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा ने प्रिंस सिंह, दामोदर और अरविंद कुमार के खिलाफ दायर आरोप पत्र पर संज्ञान लेने के बाद उन्हें जमानत दे दी. जांच के दौरान उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया.

कविता और चनप्रीत सिंह की न्यायिक हिरासत 3 जुलाई तक बढ़ी

अदालत ने उन्हें एक-एक लाख रुपये का जमानत बांड और इतनी ही राशि का जमानती बांड भरने पर जमानत दे दी. वही, कोर्ट ने के कविता और चनप्रीत सिंह की न्यायिक हिरासत 3 जुलाई तक बढ़ा दी है.

बीआरएस नेता के कविता को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट ने उसे पेश करने के लिए प्रोडक्शन वारंट जारी किया था. अदालत ने के कविता को अपने परिवार के सदस्यों से मिलने की इजाजत दी जो सुनवाई के दौरान मौजूद थे.

अदालत ने 29 मई को कविता के खिलाफ ईडी के आरोप पत्र पर संज्ञान लिया

इससे पहले 29 मई को राउज एवेन्यू कोर्ट ने उत्पाद शुल्क नीति मनी लॉन्ड्रिंग मामले के संबंध में बीआरएस नेता के कविता और अन्य के खिलाफ दायर प्रवर्तन निदेशालय की पूरक अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) पर संज्ञान लिया था. के कविता को ईडी ने 15 मार्च 2024 को और सीबीआई ने 11 अप्रैल 2024 को गिरफ्तार किया था.

मामले में कविता को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की आवश्यकता- CBI

इससे पहले, सीबीआई ने रिमांड आवेदन के माध्यम से कहा था कि “तत्काल मामले में कविता कल्वाकुंतला को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के लिए उसे गिरफ्तार करने की आवश्यकता है ताकि उसे सबूतों और गवाहों के साथ सामना कराया जा सके ताकि आरोपियों, संदिग्ध व्यक्तियों के बीच रची गई बड़ी साजिश का पता लगाया जा सके और कार्यान्वयन किया जा सके. उत्पाद शुल्क नीति के साथ-साथ गलत तरीके से अर्जित धन का पता लगाने और लोक सेवकों सहित अन्य आरोपी/संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका स्थापित करने के साथ-साथ उन तथ्यों का पता लगाने के लिए जो उसके विशेष ज्ञान में हैं.”

लाइसेंस धारकों को अनुचित लाभ दिया गया- CBI

अधिकारियों ने कहा, जुलाई में दायर दिल्ली के मुख्य सचिव की रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर सीबीआई जांच की सिफारिश की गई थी, जिसमें प्रथम दृष्टया जीएनसीटीडी अधिनियम 1991, लेनदेन व्यवसाय नियम (टीओबीआर) -1993, दिल्ली उत्पाद शुल्क अधिनियम -2009 और दिल्ली उत्पाद शुल्क नियम -2010 का उल्लंघन दिखाया गया था.

ईडी और सीबीआई ने आरोप लगाया था कि उत्पाद शुल्क नीति को संशोधित करते समय अनियमितताएं की गईं, लाइसेंस धारकों को अनुचित लाभ दिया गया, लाइसेंस शुल्क माफ कर दिया गया या कम कर दिया गया और सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बिना एल-1 लाइसेंस बढ़ाया गया.

 

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