
Donald Trump Tariffs: अमेरिकी कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ़ को बताया ग़ैरक़ानूनी, ट्रंप बोले- यह फ़ैसला देश को तबाह कर देगा
Donald Trump Tariffs: अमेरिका की राजनीति और अर्थव्यवस्था को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। हाल ही में अमेरिकी फेडरल सर्किट की अपीलीय अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए कई टैरिफ़ को अवैध करार दिया है। अदालत के इस फ़ैसले ने एक नए कानूनी और राजनीतिक टकराव को जन्म दे दिया है, जिसका असर सीधे-सीधे अमेरिकी विदेश नीति और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है।
अदालत का फ़ैसला क्या कहता है?
7-4 के बहुमत से सुनाए गए इस फ़ैसले में अदालत ने कहा कि ट्रंप के ‘रेसिप्रोकल टैरिफ़’ कानून के खिलाफ और अमान्य हैं। ये टैरिफ़ दुनिया के कई देशों पर लगाए गए थे, जिनमें चीन, मैक्सिको और कनाडा जैसे बड़े व्यापारिक साझेदार भी शामिल थे।
अदालत ने साफ कहा कि राष्ट्रपति के पास टैरिफ़ लगाने का अधिकार नहीं है। दरअसल, शुल्क और टैक्स तय करना अमेरिकी संसद (कांग्रेस) की मूल शक्ति है। ट्रंप ने इसे अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियाँ अधिनियम (IEEPA) के तहत सही ठहराने की कोशिश की थी, लेकिन अदालत ने उनके इस तर्क को खारिज कर दिया।
टैरिफ़ पर इतना विवाद क्यों?
ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान कई देशों पर भारी टैरिफ़ लगाए थे। उनका तर्क था कि अमेरिकी बाज़ारों में विदेशी सामान की भरमार ने अमेरिका की अर्थव्यवस्था और उद्योगों को कमजोर कर दिया है।
उन्होंने कहा था कि व्यापार में असंतुलन (Trade Imbalance) अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। इसी आधार पर उन्होंने इसे ‘राष्ट्रीय आपातकाल’ घोषित कर टैरिफ़ लगाने का फ़ैसला किया।
लेकिन अब अदालत का कहना है कि यह राष्ट्रपति की शक्तियों के दायरे से बाहर है। इस फ़ैसले का असर सीधे अमेरिकी उद्योग, किसानों और विदेशी संबंधों पर पड़ सकता है।
ट्रंप की नाराज़गी
कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने अपनी नाराज़गी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर जाहिर की। उन्होंने लिखा:
“अगर यह फ़ैसला बरकरार रहा तो यह अमेरिका को सचमुच बर्बाद कर देगा। अगर ये टैरिफ़ हटा दिए गए तो यह देश के लिए पूर्ण आपदा होगी। हम आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएंगे जबकि हमें मजबूत रहना चाहिए।”
ट्रंप ने अदालत को पक्षपाती (biased) बताते हुए कहा कि अंत में अमेरिका ही जीतेगा और ये टैरिफ़ देश के हित में जरूरी हैं।
अगला कदम क्या होगा?
अभी यह फैसला तुरंत लागू नहीं होगा। अदालत ने कहा है कि यह आदेश 14 अक्टूबर से प्रभावी होगा। इसका मतलब है कि ट्रंप प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए वक्त दिया गया है।
अगर यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक जाता है, तो यह न सिर्फ कानूनी लड़ाई बनेगा बल्कि 2024 के अमेरिकी चुनावों में भी बड़ा मुद्दा हो सकता है।
टैरिफ़ का असर अमेरिका पर कैसे पड़ता है?
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि टैरिफ़ लगाने से अक्सर घरेलू उद्योगों को अस्थायी राहत तो मिलती है, लेकिन लंबे समय में इसका बोझ आम नागरिकों पर पड़ता है।
- टैरिफ़ की वजह से विदेशी सामान महंगा हो जाता है।
- उपभोक्ताओं को ज़्यादा कीमत चुकानी पड़ती है।
- कई बार दूसरे देश भी जवाबी टैरिफ़ लगाते हैं, जिससे अमेरिकी निर्यातकों को नुकसान होता है।
ट्रंप का मानना है कि इन टैरिफ़ से अमेरिका की निर्माण और स्टील इंडस्ट्री को फायदा हुआ। लेकिन कई विशेषज्ञ इसे उल्टा असर डालने वाला बताते हैं।
विदेश नीति पर क्या असर होगा?
अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर पहले से ही बड़ा विवाद बना हुआ है। चीन पर लगाए गए टैरिफ़ को अदालत द्वारा अवैध बताना दोनों देशों के रिश्तों में नई जटिलता ला सकता है।
इसी तरह मैक्सिको और कनाडा, जो अमेरिका के पड़ोसी और बड़े व्यापारिक साझेदार हैं, उनके साथ भी यह मामला रिश्तों को प्रभावित कर सकता है।
ट्रंप के लिए राजनीतिक झटका
यह फ़ैसला ट्रंप के लिए केवल कानूनी ही नहीं, बल्कि राजनीतिक झटका भी है।
- ट्रंप हमेशा से ‘अमेरिका फर्स्ट’ (America First) नीति के तहत सख्त व्यापारिक रुख अपनाते रहे हैं।
- उनके समर्थक मानते हैं कि टैरिफ़ अमेरिका को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाते हैं।
- लेकिन अब अदालत का फैसला उनकी इस नीति पर सवाल खड़े करता है।
2024 चुनावी माहौल में ट्रंप इस मुद्दे को अपने राजनीतिक भाषणों में जरूर उठाएंगे और इसे ‘अमेरिका की मजबूती बनाम अदालत का फैसला’ की लड़ाई की तरह पेश करेंगे।
अमेरिकी अदालत का यह फैसला न केवल ट्रंप की नीतियों को चुनौती देता है, बल्कि अमेरिकी विदेश नीति और वैश्विक व्यापार पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा। ट्रंप इसे अपनी राजनीतिक लड़ाई में हथियार बना सकते हैं, लेकिन अदालत ने साफ कर दिया है कि टैरिफ़ लगाना राष्ट्रपति की शक्ति नहीं बल्कि संसद की जिम्मेदारी है।
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