Earth Rotation Day 2026: धरती अगर न घूमे तो क्या होगा? Earth’s Rotation Day 2026 पर बड़ा सवाल
Earth Rotation Day 2026: हम में से ज़्यादातर लोग यह जानते हैं कि धरती अपनी धुरी पर घूमती है और इसी वजह से हमें दिन और रात मिलते हैं। हर 24 घंटे में धरती एक पूरा चक्कर लगाती है। यह बात हमें स्कूल में पढ़ाई जाती है, इसलिए यह बहुत सामान्य लगती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक समय ऐसा भी था, जब लोग इस बात को मानने के लिए तैयार ही नहीं थे?
हर साल 8 जनवरी को मनाया जाने वाला Earth’s Rotation Day हमें इसी सच्चाई की याद दिलाता है कि हमारी ज़िंदगी का यह सबसे आम दिखने वाला सच कभी सबसे बड़ा सवाल हुआ करता था।
Rotation of the Earth
आज विज्ञान साफ कहता है कि धरती लगातार अपनी धुरी पर घूम रही है। लेकिन सदियों पहले लोगों की धारणा बिल्कुल अलग थी। तब यह माना जाता था कि धरती स्थिर है और सूरज, चांद और तारे उसके चारों ओर घूमते हैं।
प्राचीन यूनान के कुछ दार्शनिकों ने सबसे पहले यह विचार रखा कि शायद धरती खुद भी गति में है। लेकिन उस दौर में न तो तकनीक थी और न ही ऐसे उपकरण, जिनसे इस बात को साबित किया जा सके। इसलिए यह सोच केवल विचारों तक ही सीमित रह गई।
History of Earth Rotation
खगोल विज्ञान: सबसे पुराना विज्ञान
इंसान हजारों सालों से आसमान को देखता आ रहा है। बेबीलोन सभ्यता में तारों और ग्रहों की स्थिति के लिखित रिकॉर्ड मिलते हैं। यूरोप में मिली एक प्राचीन कांस्य डिस्क में सूर्य, चंद्रमा और तारामंडलों के चित्र बने हैं।
इन्हीं अवलोकनों ने खगोल विज्ञान को दुनिया का सबसे पुराना विज्ञान बना दिया। हालांकि, इतने वर्षों तक आकाशीय पिंडों को देखने के बाद भी धरती के घूमने की बात पूरी तरह स्वीकार नहीं की गई।
कोपरनिकस से फूको तक का सफर
16वीं सदी में निकोलस कोपरनिकस ने यह साबित किया कि धरती सूर्य के चारों ओर घूमती है। इससे भूकेंद्रीय सोच को बड़ा झटका लगा। लेकिन फिर भी धरती के अपनी धुरी पर घूमने को लोग सीधे-सीधे देख नहीं पा रहे थे।
यही काम 19वीं सदी में फ्रांसीसी वैज्ञानिक लियोन फूको ने कर दिखाया।
एक पेंडुलम जिसने दुनिया को दिखा दी सच्चाई
8 जनवरी 1851 को लियोन फूको ने एक ऐसा प्रयोग किया, जिसने विज्ञान को आम लोगों के सामने ला खड़ा किया। उन्होंने एक विशाल पेंडुलम लगाया — एक लंबी डोरी के सिरे पर भारी सीसे की गेंद।
जब यह पेंडुलम आगे-पीछे झूलता रहा, तो धीरे-धीरे उसकी दिशा बदलती गई। असल में पेंडुलम नहीं घूम रहा था, बल्कि उसके नीचे मौजूद धरती घूम रही थी। यह पहली बार था, जब पृथ्वी के घूर्णन को आंखों से देखा जा सका।
आज भी दुनिया के कई विज्ञान संग्रहालयों और पेरिस के पैंथियन में फूको का पेंडुलम लोगों को हैरान करता है।
धरती का घूमना: सिर्फ दिन और रात नहीं
धरती का घूर्णन केवल सूरज के उगने और ढलने तक सीमित नहीं है। यही घूर्णन हमारे मौसम, हवाओं और समुद्री धाराओं को नियंत्रित करता है।
धरती के घूमने से पैदा होने वाला कोरिऑलिस प्रभाव यह तय करता है कि हवाएं किस दिशा में बहेंगी और चक्रवात कैसे घूमेंगे। अगर धरती न घूमती, तो न मौसम वैसा होता, न जीवन ऐसा।
अगर धरती घूमना बंद कर दे तो?
Earth’s Rotation Day 2026 पर यह सवाल खुद से पूछना ज़रूरी है — अगर धरती अचानक घूमना बंद कर दे तो क्या होगा?
वैज्ञानिकों के अनुसार, धरती का एक हिस्सा हमेशा दिन में रहेगा और दूसरा हिस्सा हमेशा रात में। तापमान का संतुलन बिगड़ जाएगा और जीवन लगभग असंभव हो जाएगा। यानी धरती का घूमना हमारे लिए हवा और पानी जितना ही ज़रूरी है।
Earth’s Rotation Day 2026 का असली मतलब
यह दिन सिर्फ विज्ञान से जुड़ा एक तथ्य नहीं है, बल्कि इंसानी जिज्ञासा और सवाल पूछने की ताकत का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि जो बात आज सामान्य लगती है, वह कभी एक बड़ा रहस्य भी हो सकती है।
Earth’s Rotation Day 2026 हमें याद दिलाता है कि हम जिस धरती पर खड़े हैं, वह हर पल गति में है — और शायद यही गति जीवन को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
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