Fake sauce in market! आपकी प्लेट तक कैसे पहुंच रहा है मिलावटी सॉस? पहचान और बचाव के आसान तरीके
फूड सेफ्टी विभाग की कार्रवाई में नकली और खराब गुणवत्ता वाले रेड-ग्रीन सॉस की बड़ी खेप पकड़ी गई है।
Fake sauce in market: बीते एक महीने में उत्तर प्रदेश और हरियाणा के अलग-अलग जिलों में Adulterated sauce को लेकर चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। फूड सेफ्टी विभाग की कार्रवाई में नकली और खराब गुणवत्ता वाले रेड-ग्रीन सॉस की बड़ी खेप पकड़ी गई है। ये घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि बाजार में धड़ल्ले से मिलावटी सॉस की सप्लाई हो रही है, जो आम लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है।
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Toggleबागपत से रामपुर और सोनीपत तक कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बड़ौत में फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने Fake sauce in market के बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया। यहां एक गोदाम से मिलावटी मेयोनीज और सॉस से भरे कई ड्रम बरामद किए गए, जिन्हें बाजार और स्ट्रीट वेंडर्स तक सप्लाई किया जा रहा था।
इसके अलावा रामपुर जिले में जांच के दौरान ठेलों और छोटे खाद्य विक्रेताओं से खराब और मिलावटी सॉस जब्त की गई। वहीं हरियाणा के सोनीपत में CM फ्लाइंग टीम ने सॉस बनाने वाली एक फैक्ट्री पर छापा मारकर करीब 600 किलो मिलावटी सॉस नष्ट कराया।
इन लगातार मामलों ने फूड सेफ्टी एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
आखिर सॉस में क्या-क्या मिलाया जा रहा है?
रिटायर्ड चीफ फूड एनालिस्ट एस.एम. भारद्वाज के मुताबिक, रेड और ग्रीन सॉस में लागत कम करने और लंबे समय तक स्टोर करने के लिए कई तरह की मिलावट की जाती है।
आमतौर पर इनमें शामिल होती हैं—
- आर्टिफिशियल कलर
- सिंथेटिक फ्लेवर
- खराब क्वालिटी का विनेगर या एसिटिक एसिड
- मैदा
- ज्यादा प्रिजर्वेटिव
- अरारोट और कॉर्न स्टार्च
- केमिकल थिकनर
- अधिक नमक और चीनी
इन चीजों की मदद से सॉस को गाढ़ा, चमकीला और लंबे समय तक टिकाऊ बनाया जाता है।
Fake sauce से हो सकती हैं गंभीर बीमारियां
डॉ. अरविंद अग्रवाल, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन एंड इंफेक्शियस डिजीज (दिल्ली) बताते हैं कि मिलावटी सॉस में मौजूद केमिकल्स और आर्टिफिशियल तत्व शरीर पर गहरा असर डाल सकते हैं।
इसके नियमित सेवन से—
- पेट दर्द, गैस, एसिडिटी
- उल्टी और दस्त
- एलर्जी और स्किन रैश
- इम्यून सिस्टम कमजोर होना
- हॉर्मोनल असंतुलन
जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक सेवन करने से लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचने का खतरा भी रहता है। बच्चों में इससे फोकस की कमी और ADHD जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
सॉस में मिलावट की पहचान कैसे करें?
कुछ आसान संकेतों से आप मिलावटी सॉस की पहचान कर सकते हैं—
- रंग जरूरत से ज्यादा चमकीला हो
- खुशबू बहुत तेज या केमिकल जैसी लगे
- स्वाद बहुत ज्यादा खट्टा, मीठा या अननेचुरल हो
- सॉस जरूरत से ज्यादा गाढ़ा या चिपचिपा लगे
ऐसी स्थिति में उस सॉस का इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए।
बाजार से सॉस खरीदते समय रखें ये सावधानियां
अगर आप रेड या ग्रीन सॉस खरीदते हैं तो इन बातों का ध्यान रखें—
- हमेशा विश्वसनीय ब्रांड चुनें
- पैकेट पर FSSAI लाइसेंस नंबर देखें
- एक्सपायरी डेट जरूर चेक करें
- बहुत सस्ता सॉस खरीदने से बचें
- खुले या बिना लेबल वाले सॉस से दूरी बनाएं
थोड़ी सी सावधानी आपको बड़ी स्वास्थ्य समस्या से बचा सकती है।
क्या ब्रांडेड टोमैटो कैचअप सुरक्षित है?
डॉ. अरविंद अग्रवाल के अनुसार, विश्वसनीय ब्रांड का टोमैटो कैचअप अगर सही तरीके से पैक्ड हो और एक्सपायरी डेट के भीतर हो, तो इसे कभी-कभार सीमित मात्रा में खाया जा सकता है। हालांकि इसमें भी चीनी, नमक और प्रिजर्वेटिव्स की मात्रा अधिक होती है, इसलिए रोजाना सेवन से बचना चाहिए।
घर पर सॉस बनाना सबसे सुरक्षित विकल्प
एक्सपर्ट्स का कहना है कि घर पर बना सॉस सबसे सुरक्षित होता है। इसके लिए—
- ताजे टमाटर और मिर्च का इस्तेमाल करें
- सामग्री को अच्छी तरह धोकर पकाएं
- किसी भी तरह का फूड कलर या केमिकल प्रिजर्वेटिव न डालें
- साफ कांच की एयरटाइट बोतल में रखें
घर का बना सॉस फ्रिज में 5–7 दिन तक सुरक्षित रहता है।
मिलावटी फूड की शिकायत कहां करें?
अगर आपको मिलावटी सॉस या कोई अन्य खाद्य पदार्थ संदिग्ध लगे तो—
- FSSAI हेल्पलाइन 1800-112-100 पर कॉल करें
- ‘Food Safety Connect’ ऐप से ऑनलाइन शिकायत करें
- जिला फूड सेफ्टी ऑफिसर या प्रशासन से संपर्क करें
सही जानकारी देने से कार्रवाई जल्दी होती है।
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट के तहत मिलावट पाए जाने पर
- भारी जुर्माना
- लाइसेंस रद्द
- आपराधिक मामला
- गंभीर मामलों में जेल की सजा तक का प्रावधान है।
Fake sauce का खतरा भले ही दिखता छोटा हो, लेकिन इसका असर लंबे समय तक सेहत पर पड़ सकता है। ऐसे में सतर्क रहना ही सबसे बड़ा बचाव है।







