आज Falgun Amavasya 2026 और सूर्य ग्रहण का महासंयोग! जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पितृ तर्पण की पूरी विधि
Falgun Amavasya 2026: आज 17 फरवरी 2026 को फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है। हिंदू पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि आज शाम 5 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। यह दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। खास बात यह है कि आज सूर्य ग्रहण भी लग रहा है, हालांकि यह भारत में दिखाई नहीं देगा। फिर भी इस दिन की आध्यात्मिक ऊर्जा को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
आज का ग्रह-नक्षत्र योग क्या कहता है?
आज सूर्यदेव कुंभ राशि में विराजमान हैं और उनके साथ बुध, शुक्र और राहु का विशेष संयोग बना हुआ है। यह योग आपकी जिज्ञासा बढ़ाने, नई चीजें सीखने और रचनात्मक सोच को मजबूत करने का संकेत देता है।
चंद्रदेव मकर राशि के धनिष्ठा नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं। धनिष्ठा नक्षत्र आत्मविश्वास, धैर्य और परिश्रम का प्रतीक माना जाता है। सूर्य, मंगल और चंद्रमा – तीनों ग्रह धनिष्ठा नक्षत्र में सक्रिय हैं, जिससे साहस और लक्ष्य प्राप्ति की शक्ति बढ़ती है।
आज परिघ योग भी बन रहा है, जो शत्रुओं पर विजय और अधूरे कार्यों में सफलता दिलाने वाला माना जाता है। अगर लंबे समय से कोई काम अटका हुआ है, तो आज मानसिक रूप से उसकी योजना बनाना शुभ रहेगा।
आज के प्रमुख शुभ मुहूर्त
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 से 12:58 बजे तक
- अमृत काल: सुबह 10:39 से 12:17 बजे तक
इन समयों में किए गए कार्यों का फल शुभ माना जाता है। अगर कोई जरूरी निर्णय लेना हो, तो इन मुहूर्तों का ध्यान रखें।
आज के अशुभ समय
- राहुकाल: दोपहर 03:24 से 04:48 बजे तक
- गुलिकाल: दोपहर 12:35 से 02:00 बजे तक
- यमगण्ड: सुबह 09:47 से 11:11 बजे तक
इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचें और विवादों से दूर रहें।
Surya Grahan 17 February 2026: क्या है खास?
आज दोपहर 03:26 बजे से शाम 07:57 बजे तक सूर्य ग्रहण रहेगा। यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण है, जिसमें चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता और सूर्य एक चमकती अंगूठी की तरह दिखाई देता है।
यह ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका क्षेत्र में दिखाई देगा। भारत में यह दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा। फिर भी सावधानी और आध्यात्मिक चिंतन करना लाभदायक माना जाता है।
ग्रहण के दौरान क्या करें?
- इष्ट देव का ध्यान करें और मंत्र जाप करें।
- “ॐ सूर्याय नम:” मंत्र का जप विशेष फलदायी माना जाता है।
- ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें।
- जरूरतमंदों को अन्न, तिल या वस्त्र दान करें।
- घर के भोजन में तुलसी के पत्ते डाल दें।
फाल्गुन अमावस्या का धार्मिक महत्व
फाल्गुन अमावस्या पितरों को समर्पित मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन पूर्वज धरती पर आते हैं और अपने वंशजों का आशीर्वाद देते हैं। अगर जीवन में बार-बार बाधाएं आ रही हैं या परिवार में अशांति बनी रहती है, तो इस दिन पितृ तर्पण करना विशेष लाभकारी माना गया है।
पितृ तर्पण की सरल विधि
- तांबे या पीतल के पात्र में जल भरें।
- उसमें गंगाजल, कच्चा दूध, काले तिल और जौ मिलाएं।
- कुशा की अंगूठी पहनकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करें।
- दोनों हथेलियों से जल अर्पित करते हुए पितरों का स्मरण करें।
- तर्पण के बाद पीपल के पेड़ के पास दीपक जलाएं।
अमावस्या पर दान का महत्व
इस दिन दान का फल कई गुना बढ़ जाता है। सफेद वस्त्र, चावल, दूध, चांदी या मौसमी फल दान करना शुभ माना जाता है। गाय, कुत्ते और कौवे को भोजन कराना भी पुण्यदायक है। कौवा पितरों का प्रतीक माना जाता है।
ध्यान रखें ये बातें
- घर में सात्विक वातावरण बनाए रखें।
- मांस-मदिरा का सेवन न करें।
- बुजुर्गों और जरूरतमंदों का सम्मान करें।
- घर की दक्षिण दिशा में दीपक जलाएं।
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