India Religious Data 2026: दुनिया में सनातन की गूंज! प्यू रिपोर्ट में हिंदुओं की स्थिर ताकत ने बढ़ाया गर्व
India Religious Data 2026: जब दुनिया में कुछ भी व्यवस्थित नहीं था, तब भी सनातन संस्कृति अपने मूल रूप में विद्यमान थी — ऐसा हिंदू मान्यता में कहा जाता है। हजारों साल पुरानी परंपराओं, वेदों, उपनिषदों और आध्यात्मिक ज्ञान से समृद्ध हिंदू धर्म आज भी दुनिया के सबसे बड़े धर्मों में मजबूती से खड़ा है। हाल ही में आई प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट ने हिंदुओं की वैश्विक स्थिति को लेकर कई दिलचस्प और गर्व करने योग्य तथ्य सामने रखे हैं।
क्या कहती है प्यू की रिपोर्ट?
Hindu Population Growth को लेकर Pew Research Center ने 201 देशों की आबादी का विश्लेषण करते हुए 2010 से 2020 के बीच धार्मिक बदलावों का अध्ययन किया। इस रिपोर्ट में दुनिया की लगभग 99.98% आबादी को शामिल किया गया। अध्ययन के मुताबिक, इस दशक में हिंदू आबादी में संतुलित और स्थिर वृद्धि दर्ज की गई।
साल 2010 में विश्व में हिंदुओं की संख्या करीब 107 करोड़ थी, जो 2020 तक बढ़कर लगभग 120 करोड़ हो गई। यानी एक दशक में करीब 13 करोड़ की बढ़ोतरी हुई। इसके बावजूद वैश्विक आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी लगभग 15% पर स्थिर बनी रही। यह स्थिरता अपने आप में खास है, क्योंकि इसी अवधि में कई अन्य धर्मों की आबादी में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा धार्मिक समूह
रिपोर्ट बताती है कि ईसाई धर्म दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समूह है, जबकि इस्लाम सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला धर्म रहा। हिंदू धर्म दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा धार्मिक समूह है। यह बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हिंदू आबादी का बड़ा हिस्सा एक ही भौगोलिक क्षेत्र — भारत और एशिया-प्रशांत — में केंद्रित है।
करीब 99% हिंदू एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रहते हैं और इनमें से लगभग 95% केवल भारत में ही बसे हुए हैं। नेपाल कभी दुनिया का एकमात्र हिंदू राष्ट्र था, लेकिन आज भी भारत दुनिया की सबसे बड़ी हिंदू आबादी का घर है।
स्थिरता की कहानी
हिंदू धर्म की डेमोग्राफिक कहानी उतार-चढ़ाव या आक्रामक विस्तार की नहीं, बल्कि निरंतरता और संतुलन की है। जहां इस्लाम की आबादी सबसे तेज़ बढ़ी और ईसाई आबादी का प्रतिशत थोड़ा घटा, वहीं हिंदुओं की हिस्सेदारी लगभग समान बनी रही। यही स्थिरता दुनिया के विशेषज्ञों को आकर्षित कर रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2020 तक दुनिया की 75.8% आबादी किसी न किसी धर्म से जुड़ी हुई थी, जबकि 24.2% लोग खुद को किसी धर्म से नहीं जोड़ते। इस बदलते वैश्विक माहौल में भी हिंदू धर्म अपनी जड़ों से जुड़ा और संतुलित बना हुआ है।
धार्मिक विविधता में भारत की भूमिका
प्यू ने एक Religious Diversity Index (RDI) भी तैयार किया है, जिसमें देशों को 0 से 10 के स्कोर पर आंका गया। भारत जैसे देशों में कई धर्मों के लोग साथ रहते हैं — हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध आदि। यही विविधता भारत को दुनिया के सबसे बहु-धार्मिक समाजों में शामिल करती है।
दुनिया के बड़े देशों में अमेरिका सबसे ज्यादा धार्मिक विविधता वाला देश पाया गया, जबकि पाकिस्तान और कुछ मध्य-पूर्वी देशों में धार्मिक विविधता कम है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र को सबसे अधिक विविधता वाला क्षेत्र बताया गया है।
इतिहास की कसौटी पर सनातन
भारत पर सदियों तक कई आक्रमण हुए — अरब, तुर्क, अफगान और मुगल शासकों का दौर रहा। जजिया जैसे कर भी लगाए गए। बावजूद इसके, सनातन परंपरा खत्म नहीं हुई। मंदिर टूटे, लेकिन आस्था नहीं टूटी। यही मजबूती आज भी दिखाई देती है।
आज हिंदू समुदाय सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका की टेक इंडस्ट्री, यूरोप के अकादमिक संस्थान और दुनिया के कई बड़े संगठनों में भारतीय मूल के हिंदू नेतृत्व की भूमिका निभा रहे हैं। यह आधुनिक दौर में सनातन की वैश्विक उपस्थिति का प्रमाण है।
निष्कर्ष
प्यू की यह रिपोर्ट किसी प्रतियोगिता की कहानी नहीं है, बल्कि वैश्विक धार्मिक परिदृश्य की तस्वीर है। हिंदू धर्म की संख्या में संतुलित वृद्धि और 15% हिस्सेदारी का स्थिर रहना यह दिखाता है कि सनातन परंपरा आज भी मजबूती से कायम है।
धर्म की दुनिया में जहां बदलाव तेज़ी से हो रहे हैं, वहां हिंदू डेमोग्राफी की यह स्थिरता अपने आप में एक अनोखी कहानी है — एक ऐसी कहानी, जिस पर गर्व भी होता है और जो दुनिया को सोचने पर मजबूर भी करती है।
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