International Mother Language Day 2026: मातृभाषा के लिए बहा था खून… आज उसे बचाने की जिम्मेदारी हमारी
International Mother Language Day 2026: हर इंसान की पहली आवाज, पहला शब्द और पहली सीख उसकी मातृभाषा में होती है। यही भाषा हमें सोचने, समझने और अपनी भावनाएँ व्यक्त करने की ताकत देती है। इसलिए मातृभाषा केवल संवाद का साधन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, इतिहास और पहचान की आत्मा है। इसी महत्व को याद दिलाने के लिए हर साल 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाता है।
कैसे हुई इस दिन की शुरुआत?
अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की घोषणा यूनेस्को ने 17 नवंबर 1999 को की थी और वर्ष 2000 से इसे विश्वभर में मनाया जा रहा है। इस दिन के पीछे एक भावनात्मक और ऐतिहासिक घटना जुड़ी है।
साल 1952 में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में लोगों ने अपनी मातृभाषा बंगाली को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा दिलाने के लिए आंदोलन किया। 21 फरवरी 1952 को ढाका विश्वविद्यालय में छात्रों पर गोली चलाई गई, जिसमें कई युवाओं ने अपनी जान गंवा दी। यह दुनिया के इतिहास की दुर्लभ घटना थी, जब लोगों ने अपनी भाषा के लिए बलिदान दिया।
उन्हीं शहीदों की स्मृति में 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
2026 की थीम क्या है?
अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2026 की थीम है –
“बहुभाषी शिक्षा पर युवाओं की आवाज” (Youth voices on multilingualism)
यह थीम इस बात पर जोर देती है कि युवाओं की भागीदारी के बिना भाषा और संस्कृति का संरक्षण संभव नहीं है। शिक्षा, समाज और संस्कृति में मातृभाषा की भूमिका को मजबूत करने के लिए युवाओं को आगे आना होगा।
मातृभाषा क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?
- मातृभाषा में सीखने से बच्चों की समझ और आत्मविश्वास बढ़ता है।
- यह हमारी परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाने का माध्यम है।
- बहुभाषी शिक्षा से रचनात्मकता और सोचने की क्षमता विकसित होती है।
- भाषा विविधता आपसी समझ, सहिष्णुता और संवाद को मजबूत करती है।
यूनेस्को के अनुसार दुनिया में करीब 7,000 से अधिक भाषाएँ बोली जाती हैं। लेकिन औपचारिक शिक्षा में सिर्फ लगभग 351 भाषाओं का ही उपयोग होता है। इसका मतलब है कि लाखों बच्चे ऐसी भाषा में पढ़ाई करते हैं जो उनकी मातृभाषा नहीं होती। इससे सीखने की प्रक्रिया प्रभावित होती है।
भारत और मातृभाषा
भारत भाषाई विविधता का अद्भुत उदाहरण है। यहां संविधान की 22 अनुसूचित भाषाएं हैं और सैकड़ों बोलियाँ जीवित हैं। डिजिटल इंडिया पहल के तहत कई भारतीय भाषाओं में डिजिटल सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि भाषा और तकनीक का संतुलन बना रहे।
बांग्लादेश में विशेष महत्व
बांग्लादेश में 21 फरवरी को राष्ट्रीय अवकाश होता है। लोग शहीद मीनार पर फूल चढ़ाकर भाषा आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं। पूरे फरवरी महीने में साहित्यिक कार्यक्रम और पुस्तक मेले आयोजित किए जाते हैं।
भाषा बचाना क्यों जरूरी है?
आज वैश्वीकरण और शहरीकरण के कारण कई भाषाएं विलुप्ति के कगार पर हैं। भाषा खत्म होने का मतलब है एक पूरी संस्कृति और इतिहास का खो जाना।
मातृभाषा का संरक्षण केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। हमें अपनी भाषा में पढ़ना, लिखना और संवाद करना चाहिए। बच्चों को अपनी मातृभाषा सिखाना और उसे सम्मान देना बेहद जरूरी है।
निष्कर्ष
अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस हमें यह याद दिलाता है कि भाषा केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि हमारी आत्मा का हिस्सा है। जब हम अपनी मातृभाषा का सम्मान करते हैं, तो हम अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं।
आइए, इस 21 फरवरी को संकल्प लें कि हम अपनी मातृभाषा को सहेजेंगे, सीखेंगे और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएंगे।
क्योंकि भाषा बचेगी तो संस्कृति बचेगी, और संस्कृति बचेगी तो हमारी पहचान अमर रहेगी।
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