ईरान एक बार फिर गंभीर उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है।
Iran unrest 2025: ईरान एक बार फिर गंभीर उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक बदहाली के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब देशव्यापी आंदोलन का रूप ले चुके हैं। बीते 12 दिनों से जारी प्रदर्शनों ने ईरान की सत्ता को हिला कर रख दिया है। राजधानी तेहरान से लेकर छोटे कस्बों तक सड़कों पर उतरे लोग सरकार के खिलाफ खुलकर नारेबाजी कर रहे हैं।
गुरुवार रात हालात और बिगड़ गए, जब कई शहरों में हिंसक झड़पें हुईं। हालात बेकाबू होते देख ईरानी सरकार ने इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दीं, जिससे देश का बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग टूट गया।
12 दिनों में 45 मौतें, नाबालिग भी शामिल
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक इन प्रदर्शनों में 45 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 8 नाबालिग शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, सरकारी आंकड़े कम मौतों की पुष्टि करते हैं। ईरानी प्रशासन का कहना है कि हिंसा के लिए बाहरी ताकतें जिम्मेदार हैं, जबकि प्रदर्शनकारी इसे महंगाई, भ्रष्टाचार और दमनकारी नीतियों के खिलाफ जनआक्रोश बता रहे हैं।
सड़कों पर उतरे लोग सरकार के खिलाफ खुलकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। कई स्थानों पर सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की खबरें सामने आई हैं।
क्यों भड़की हिंसा?
ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से दबाव में है। ईरानी मुद्रा रियाल ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच चुकी है और महंगाई दर 40 प्रतिशत से अधिक बताई जा रही है। रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे आम नागरिकों का जीवन मुश्किल हो गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बेरोजगारी, घटती क्रयशक्ति और सरकारी कुप्रबंधन ने हालात को विस्फोटक बना दिया है। शुरुआत में विरोध प्रदर्शन तेहरान के बाजारों में हड़ताल के रूप में सामने आए, लेकिन कुछ ही दिनों में यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया।
कहा तक फैला आंदोलन?
गुरुवार तक यह आंदोलन ईरान के सभी 31 प्रांतों के 100 से अधिक शहरों और कस्बों तक फैल चुका था। मशहद, तेहरान, शिराज, बंदर अब्बास और ईरानशहर जैसे प्रमुख शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन देखे गए।
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कई जगहों पर दंगा-रोधी वाहनों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछार करते देखा गया। हालांकि, इंटरनेट बंद होने के बाद से ताजा जानकारी मिलना मुश्किल हो गया है।
इंटरनेट ब्लैकआउट, दुनिया से कटा ईरान
हालात की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दी हैं। इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था NetBlocks के मुताबिक, ईरान इस समय लगभग पूर्ण इंटरनेट ब्लैकआउट की स्थिति में है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार ने यह कदम प्रदर्शन की तस्वीरें और सूचनाएं देश से बाहर जाने से रोकने के लिए उठाया है। इससे पहले भी 2019 और 2022 के प्रदर्शनों के दौरान इसी तरह के प्रतिबंध लगाए गए थे।
निर्वासित युवराज की अपील से बढ़ी उग्रता
ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी द्वारा प्रदर्शन जारी रखने की अपील के बाद आंदोलन और तेज हो गया। उनकी अपील के बाद बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और कई जगहों पर सरकारी इमारतों के आसपास प्रदर्शन किए गए।
हालांकि, यह आंदोलन काफी हद तक नेतृत्वहीन माना जा रहा है। विशेषज्ञ इसे सरकार के लिए चुनौती और प्रदर्शनकारियों के लिए कमजोरी दोनों मानते हैं।
अमेरिका की सख्त चेतावनी
इस बीच अमेरिका ने भी ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा करता है, तो अमेरिका “बहुत सख्त कार्रवाई” करेगा।
ट्रंप का बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के संबंध पहले से ही मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनावपूर्ण हैं। ट्रंप की चेतावनी ने इस संकट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और संवेदनशील बना दिया है।
सरकार का आरोप: विदेशी साजिश
ईरानी सरकार का दावा है कि ये प्रदर्शन विदेशी ताकतों की साजिश का हिस्सा हैं। अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका और इजराइल ईरान में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, प्रदर्शनकारी इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे जनसमस्याओं से जुड़ा आंदोलन बता रहे हैं।
2019 और 2022 से बड़ा आंदोलन?
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा प्रदर्शन 2019 और 2022 के आंदोलनों से अधिक व्यापक हो सकते हैं। 2019 में करीब 1500 लोगों की मौत हुई थी, लेकिन मौजूदा हालात में सरकार पहले से ज्यादा दबाव में नजर आ रही है।
कुछ रिपोर्ट्स में सुरक्षा बलों के भीतर असंतोष और विभाजन की भी बातें सामने आ रही हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
आगे क्या?
ईरान इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। अगर प्रदर्शन बड़े शहरों में और संगठित होते हैं, तो सरकार के लिए स्थिति संभालना मुश्किल हो सकता है। वहीं, अमेरिका की चेतावनी ने क्षेत्रीय और वैश्विक तनाव को भी बढ़ा दिया है।
फिलहाल ईरान सरकार इसे आंतरिक मामला बताकर बाहरी हस्तक्षेप को खारिज कर रही है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह आंदोलन सिर्फ विरोध तक सीमित रहेगा या सत्ता परिवर्तन की ओर बढ़ेगा—इसका जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा।
क्यों रद्द हुई Vaishno Devi Medical College की MBBS मान्यता? जानिए पूरा मामला
Earth Rotation Day 2026: धरती अगर न घूमे तो क्या होगा? Earth’s Rotation Day 2026 पर बड़ा सवाल







