Land for Job scam में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के परिवार को बड़ा कानूनी झटका लगा है।
Land for Job scam में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के परिवार को बड़ा कानूनी झटका लगा है। दिल्ली की राउस एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में लालू यादव समेत 40 से अधिक आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।
कोर्ट ने कहा कि Land for Job scam में उपलब्ध साक्ष्य ट्रायल चलाने के लिए पर्याप्त हैं। इसके साथ ही अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में नियमित सुनवाई शुरू होगी, जिसमें सीबीआई गवाहों और दस्तावेजी सबूतों को अदालत के सामने पेश करेगी। अगली सुनवाई की तारीख 29 जनवरी तय की गई है।
लालू यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती पर आरोप
अदालत ने लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, सांसद मीसा भारती सहित अन्य पारिवारिक सदस्यों और सहयोगियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं।
कोर्ट के अनुसार, आरोपियों पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप हैं, जिनकी विस्तृत सुनवाई आवश्यक है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “आपराधिक सिंडिकेट की तरह किया काम”
राउस एवेन्यू कोर्ट ने अपने आदेश में तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रारंभिक तौर पर यह संकेत मिलते हैं कि आरोपियों ने एक “आपराधिक सिंडिकेट” की तरह काम किया। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद तथ्यों से व्यापक आपराधिक साजिश के संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
अदालत ने यह भी माना कि आरोप केवल प्रशासनिक अनियमितताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें सत्ता के दुरुपयोग और निजी लाभ के लिए सरकारी नौकरियों का इस्तेमाल किए जाने के आरोप शामिल हैं।
सीबीआई का दावा: नौकरी के बदले ली गई जमीन
सीबीआई के मुताबिक, Land for Job scam 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि इस दौरान रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र, खासकर जबलपुर जोन में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन ली गई।
जांच एजेंसी का कहना है कि यह जमीन बेहद कम कीमत पर या गिफ्ट के रूप में लालू यादव के परिवार के सदस्यों और उनके करीबी लोगों के नाम कराई गई।
कैसे हुआ ‘Land for Job scam’ का खेल?
सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार, कई लोगों को रेलवे में नौकरी तभी मिली, जब उन्होंने अपनी जमीन लालू परिवार या उनसे जुड़ी संस्थाओं को ट्रांसफर की। यह जमीनें अक्सर बाजार मूल्य से एक-चौथाई या एक-पांचवें हिस्से की कीमत पर ली गईं।
जांच में सामने आया है कि करीब एक लाख वर्ग फीट जमीन मात्र 26 लाख रुपये में हासिल की गई, जबकि उसकी सरकारी कीमत 4.39 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।
राबड़ी देवी और कंपनियों के नाम ट्रांसफर
एजेंसियों के मुताबिक, पटना और उसके आसपास की कई कीमती जमीनें राबड़ी देवी, उनके बच्चों या बाद में उनके नियंत्रण वाली कंपनियों के नाम पर ट्रांसफर की गईं। आरोप है कि इन संपत्तियों को गिफ्ट डीड या कम कीमत दिखाकर हासिल किया गया।
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में इन जमीनों को अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) माना गया है।
AK Infosystems का मामला
जांच एजेंसियों ने AK Infosystems नामक कंपनी का भी जिक्र किया है, जिसके पास बहुमूल्य जमीन थी। आरोप है कि इस कंपनी के शेयर बेहद कम कीमत पर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के नाम ट्रांसफर किए गए, ताकि असली स्वामित्व छुपाया जा सके।
ईडी का दावा है कि यह कदम मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम देने और संपत्तियों के असली स्रोत को छिपाने के लिए उठाया गया।
आरोपियों का पक्ष: राजनीतिक बदले की कार्रवाई
इस मामले में सभी आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया है। लालू यादव और उनके परिवार का कहना है कि यह पूरा मामला राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है। उनका दावा है कि केंद्र सरकार की एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।
हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आरोप तय करने का मतलब दोष सिद्ध होना नहीं है, बल्कि यह तय किया गया है कि मामले में ट्रायल चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं।
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