life insurance GST exemption और health insurance GST removal पर बड़ा अपडेट। सरकार जीवन (Life Insurance) और स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) के प्रीमियम से GST हटाने पर विचार कर रही है। अगर यह प्रस्ताव GST Council में पास हो जाता है, तो ग्राहक केवल base premium चुकाएंगे—कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं। इससे पॉलिसी सस्ती होगी और बीमा कवरेज बढ़ेगा।

अभी बीमा प्रीमियम पर कितना GST लगता है?

वर्तमान में नई पॉलिसी खरीदने या रिन्यूअल पर 18% GST देना पड़ता है। उदाहरण: अगर वार्षिक प्रीमियम ₹20,000 है, तो ₹3,600 GST जुड़कर कुल ₹23,600 देय होता है। यह नियम individual policy और family floater—दोनों पर लागू है। कुछ पारंपरिक योजनाओं में पहले वर्ष 4.5% दर का अपवाद दिखता है, लेकिन ज्यादातर रेगुलर पॉलिसीज़ पर प्रभावी दर 18% ही रहती है।

नया प्रस्ताव: life insurance GST exemption

GST Council के तहत बनी GoM (Group of Ministers) ने सुझाव दिया है कि जीवन और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम से GST पूरी तरह हटाया जाए। मंज़ूरी मिलने पर ग्राहक केवल base premium देंगे। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, प्रभावी लागत में लगभग 15% तक कमी संभव है—बशर्ते पूरी राहत पॉलिसीधारकों तक पहुंचे। यह कदम insurance penetration बढ़ाने और वित्तीय सुरक्षा को सुलभ बनाने की दिशा में बड़ा सुधार माना जा रहा है।

सरकार और राज्यों की चिंता

यह प्रस्ताव भले ही आम लोगों के लिए फायदेमंद हो, लेकिन राज्यों की चिंता भी कम नहीं है।

  • 2023-24 में Life और Health Insurance पर GST से ₹8,262 करोड़ और हेल्थ रीइंश्योरेंस से करीब ₹1,500 करोड़ का राजस्व मिला।
  • यानी कुल मिलाकर लगभग ₹10,000 करोड़ की कमाई राज्यों को GST से होती है।
  • अगर यह टैक्स खत्म हुआ, तो यह कमाई बंद हो जाएगी।
    कुछ राज्य जैसे तेलंगाना इस कदम का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ को राजस्व घाटे की चिंता है।

त्वरित तुलना: अभी बनाम प्रस्तावित

मापदंड अभी प्रस्तावित
ग्राहक पर टैक्स 18% GST प्रीमियम पर कोई GST नहीं
कुल देय राशि Base Premium + GST सिर्फ Base Premium
ITC (बीमा कंपनियाँ) उपलब्ध एक्सेम्प्शन में उपलब्ध नहीं
उद्योग पर असर स्थिर लागत संरचना संभावित प्राइस री-बैलेंस

क्या प्रीमियम वास्तव में घटेगा?

कागजों पर तो इसका जवाब ‘हां’ है। लेकिन असली तस्वीर थोड़ी अलग हो सकती है।

  • बीमा कंपनियां अभी GST पर Input Tax Credit (ITC) का दावा करती हैं। यानी बैकएंड खर्च (टेक्नोलॉजी, कस्टमर सर्विस, एजेंट कमीशन) का कुछ हिस्सा टैक्स क्रेडिट से एडजस्ट हो जाता है।
  • अगर GST हटा दिया जाता है तो यह ITC भी खत्म हो जाएगा।
  • ऐसे में कंपनियां अपने खर्च की भरपाई के लिए Base Premium बढ़ा सकती हैं।

इसी वजह से विशेषज्ञों का मानना है कि Insurance को Zero-Rated Category में डालना बेहतर होता। इससे ग्राहकों को GST से राहत भी मिलती और कंपनियां ITC का फायदा भी ले पातीं।

कब आएगा फैसला? संभावित टाइमलाइन

GoM की रिपोर्ट पर चर्चा अगली GST Council Meeting (सितंबर 2025, मध्य) में होनी है।

  • वहां राज्यों की राय और बीमा उद्योग (Insurance Industry) के सुझावों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाएगा।
  • अगर मंजूरी मिल गई तो यह नियम दिवाली 2025 तक लागू हो सकता है।

अभी पॉलिसीधारकों को क्या करना चाहिए?

  • नई पॉलिसी/रिन्यूअल का निर्णय लेते हुए आधिकारिक घोषणा तक प्रतीक्षा पर विचार करें।
  • अगर GST हटता है, तो देखें कि आपका बीमाकर्ता लाभ पास-थ्रू कर रहा है या नहीं—रेट कार्ड/डॉक्यूमेंट्स तुलना करें।
  • टर्म लाइफ, फैमिली फ्लोटर, टॉप-अप/सुपर टॉप-अप जैसे विकल्पों की तुलना करें।
  • नियम/दरों की विश्वसनीय जानकारी के लिए समय-समय पर IRDAI की वेबसाइट देखें।