Mauni Amavasya date 2026: मौनी अमावस्या 2026 पर बन रहे दुर्लभ योग, इन कामों से मिलेगा पुण्य फल
Mauni Amavasya date 2026: माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। हिंदू धर्म और सनातन संस्कृति में इस दिन का विशेष महत्व माना गया है। यह तिथि आत्मशुद्धि, मौन, संयम और पितरों की शांति से जुड़ी होती है। मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने, स्नान-दान करने और पितरों का तर्पण करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मन को शांति मिलती है।
मौनी अमावस्या 2026 की तिथि और उदया तिथि
ज्योतिर्विद पंडित हरिनारायण व्यास मन्नासा के अनुसार, अमावस्या तिथि 17 जनवरी की रात 12:05 बजे शुरू होकर 18 जनवरी की रात 1:22 बजे तक रहेगी।
उदया तिथि के अनुसार अमावस्या 18 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी।
धार्मिक मान्यताओं में उदया तिथि को ही मान्य माना जाता है, इसलिए मौनी अमावस्या 2026 का पर्व 18 जनवरी को श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा।
शुभ योग और नक्षत्र का संयोग
इस वर्ष मौनी अमावस्या पर तीन विशेष योग बन रहे हैं, जो इस दिन को और भी शुभ बनाते हैं—
- सर्वार्थ सिद्ध योग – 18 जनवरी सुबह 10:14 से अगले दिन 7:31 तक
- हर्षण योग – पूरे दिन
- शिव वास योग – पूरे दिन
इसके साथ ही पूर्वाषाढ़ा और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है। ये नक्षत्र स्नान, ध्यान, दान, जप और साधना के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं।
मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व
मौनी अमावस्या को विशेष रूप से पितरों के लिए श्रेष्ठ तिथि माना गया है। इस दिन गंगा, यमुना, प्रयागराज, हरिद्वार और बीकानेर के कोलायत सरोवर जैसे पवित्र जलाशयों में स्नान का विशेष महत्व है।
मान्यता है कि ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन किया गया दान कई गुना फल देता है।
स्नान और तर्पण का शुभ समय
मौनी अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त से सूर्योदय तक का समय स्नान के लिए सर्वोत्तम माना गया है। स्नान के बाद तिल मिश्रित जल से पितरों का तर्पण करना और दान देने से पितरों को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मौनी अमावस्या पर क्या करना चाहिए
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर मौन व्रत का संकल्प लें
- सूर्योदय से पहले स्नान करें
- स्नान करते समय आक का पत्ता सिर पर रखकर मंत्रोच्चार करें
- जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, कंबल का दान करें
- ब्राह्मण भोजन कराएं, संभव न हो तो गरीब को दान दें
- शाम को दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का दीपक जलाएं
- पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करें और दीपक जलाएं
- गाय, कुत्ते और कौवे के लिए अन्न और जल रखें
मौनी अमावस्या पर क्या नहीं करना चाहिए
- मांस, मछली, शराब, लहसुन-प्याज जैसे तामसिक भोजन से बचें
- क्रोध, लोभ और नकारात्मक विचारों से दूर रहें
- किसी का अपमान या झगड़ा न करें
- घर और आसपास गंदगी न रखें
- पशु-पक्षियों को परेशान न करें
मौन व्रत का आध्यात्मिक लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौन व्रत रखने से मन, बुद्धि और आत्मा शुद्ध होती है। अनावश्यक बोलचाल से दूर रहकर ध्यान और साधना करने से मानसिक शांति, एकाग्रता और आत्मबल बढ़ता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन नए संकल्प, आत्मचिंतन और सकारात्मक बदलाव के लिए अत्यंत अनुकूल माना गया है।
निष्कर्ष
मौनी अमावस्या 2026 केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और जीवन को सही दिशा देने का अवसर है। इस दिन श्रद्धा, संयम और सेवा भाव के साथ किए गए कर्म जीवन में शांति, स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
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