Meesho Share Price: निवेशकों का पैसा क्यों डूबा? Meesho शेयर क्रैश की पूरी कहानी
Meesho Share Price: शेयर बाजार में हाल के दिनों में अगर किसी एक स्टॉक ने निवेशकों की नींद उड़ा दी है, तो वह है ई-कॉमर्स कंपनी Meesho। करीब एक महीने पहले ही शानदार प्रीमियम के साथ लिस्ट हुई मीशो के शेयर लगातार दूसरे दिन लोअर सर्किट पर आ गए हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि एक महीने से भी कम समय में निवेशकों के करीब ₹40 हजार करोड़ स्वाहा हो चुके हैं।
लगातार दूसरा दिन लोअर सर्किट
बुधवार को भी मीशो के शेयरों में 5% का लोअर सर्किट लगा और यह बीएसई पर ₹164.55 तक फिसल गया। दिन के आखिरी समय में थोड़ी रिकवरी जरूर दिखी, लेकिन इसके बावजूद शेयर 4.71% गिरकर ₹165.05 पर बंद हुआ। यह गिरावट कोई मामूली नहीं है—कंपनी का शेयर अपने रिकॉर्ड हाई से 35% से ज्यादा टूट चुका है।
निवेशकों की चिंता की पहली वजह: लॉक-इन पीरियड खत्म
मीशो के शेयरों में गिरावट की पहली बड़ी वजह सामने आई थी एक दिन पहले। दरअसल, कंपनी के करीब 10.99 करोड़ शेयरों यानी लगभग 2% आउटस्टैंडिंग इक्विटी का 1 महीने का लॉक-इन पीरियड खत्म हो गया।
नुवामा अल्टरनेटिव एंड क्वांटिटेटिव रिसर्च के मुताबिक, 6 जनवरी के क्लोजिंग प्राइस ₹182.30 के हिसाब से इन शेयरों की वैल्यू करीब ₹2000 करोड़ बैठती है।
लॉक-इन खत्म होने का मतलब यह नहीं कि सारे शेयर तुरंत बिक जाएंगे, लेकिन बाजार में यह डर जरूर बैठ जाता है कि बड़े निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं। इसी आशंका ने शेयर पर दबाव बना दिया।
दूसरी वजह: सीनियर मैनेजमेंट का इस्तीफा
गिरावट की दूसरी और ताजा वजह बनी कंपनी के सीनियर मैनेजमेंट में बड़ा बदलाव। मीशो की जनरल मैनेजर (बिजनेस) और सीनियर मैनेजमेंट पर्सन मेघा अग्रवाल ने इस्तीफा दे दिया।
कंपनी ने खुद एक्सचेंज फाइलिंग में इसकी जानकारी दी, जिसके बाद निवेशकों की चिंता और बढ़ गई। बाजार आमतौर पर लिस्टिंग के तुरंत बाद किसी सीनियर अधिकारी के इस्तीफे को नकारात्मक संकेत मानता है।
IPO से अब तक का सफर
मीशो का ₹5,421 करोड़ का आईपीओ ₹111 प्रति शेयर के भाव पर आया था। स्टॉक मार्केट में इसकी एंट्री करीब 46% प्रीमियम के साथ हुई, जिससे निवेशकों में जबरदस्त उत्साह दिखा।
लिस्टिंग के कुछ ही दिनों बाद 18 दिसंबर को शेयर ₹254.65 के रिकॉर्ड हाई तक पहुंच गया। लेकिन इसके बाद तस्वीर तेजी से बदली।
12 दिसंबर 2025 को यह शेयर ₹153.95 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक फिसल गया और अब दोबारा उसी रेंज के करीब घूम रहा है।
ऑपरेशनल सुधार के बावजूद क्यों टूटा शेयर?
बोनांजा के रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी के मुताबिक, ऑपरेशनल लेवल पर मीशो ने पिछले कुछ सालों में अच्छा सुधार किया है।
कंपनी की प्रति ऑर्डर लॉजिस्टिक्स लागत वित्त वर्ष 2023 में ₹55 थी, जो वित्त वर्ष 2025 में घटकर ₹46 रह गई। यह सुधार इसके इन-हाउस लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म Valmo और डिलीवरी डेंसिटी बढ़ने से आया।
इसके अलावा, कैश ऑन डिलीवरी ऑर्डर्स भी पहले के 90% से घटकर वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में 61% पर आ गए, जिससे फेल डिलीवरी और लागत दोनों में कमी आई। इससे कंपनी का कैश फ्लो मजबूत हुआ और प्रॉफिटेबिलिटी की राह आसान हुई।
फिर भी निवेशक क्यों बेच रहे हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑपरेशनल सुधारों के बावजूद मीशो का वैल्यूएशन अपने कई कंज्यूमर इंटरनेट और रिटेल पियर्स के मुकाबले काफी ऊंचा है।
लॉक-इन खत्म होने, सीनियर मैनेजमेंट के इस्तीफे और हाई वैल्यूएशन—इन तीनों ने मिलकर निवेशकों को मुनाफावसूली की ओर धकेल दिया।
आगे क्या?
अब सवाल यही है कि क्या यह गिरावट यहीं थमेगी या निवेशकों की चिंता और बढ़ेगी। शॉर्ट टर्म में शेयर दबाव में रह सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म निवेशकों की नजर कंपनी के बिजनेस मॉडल, मुनाफावसूली की टाइमलाइन और मैनेजमेंट की स्थिरता पर टिकी रहेगी।
फिलहाल इतना तय है कि मीशो का यह सफर निवेशकों के लिए एक कड़ा सबक बन चुका है—केवल शानदार लिस्टिंग ही सुरक्षित रिटर्न की गारंटी नहीं होती।
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