शनिवार शाम बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने दीपक के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल ज़िले के Kotdwar कस्बे में एक मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में खड़े हुए युवक ‘Mohammad Deepak’ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शनिवार शाम बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने दीपक के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई। पुलिस प्रशासन का कहना है कि हालात पर तुरंत काबू पा लिया गया और देहरादून से आए कुछ प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ स्वतः संज्ञान लेते हुए प्राथमिकी दर्ज की गई है।
वहीं, दीपक कुमार कश्यप उर्फ़ ‘मोहम्मद दीपक’ ने प्रशासन पर एकतरफ़ा कार्रवाई करने और उन्हें पर्याप्त सुरक्षा न देने के आरोप लगाए हैं।
दीपक कुमार ने खुद को ‘Mohammad Deepak’ क्यों कहा?
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 26 जनवरी को हुई थी। कोटद्वार के पटेल रोड पर स्थित एक 75 वर्षीय मुस्लिम दुकानदार की दुकान ‘बाबा स्कूल ड्रेस एंड मैचिंग सेंटर’ पर उस दिन बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ता पहुंचे थे। आरोप है कि उन्होंने दुकानदार पर दुकान के नाम से ‘बाबा’ शब्द हटाने का दबाव बनाया।
इसी दौरान दीपक कुमार कश्यप दुकानदार के समर्थन में सामने आए। बाद में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें दीपक खुद को ‘Mohammad Deepak’ बताते हुए बुज़ुर्ग दुकानदार के पक्ष में बोलते नजर आए। इसके बाद यह मामला स्थानीय विवाद से निकलकर राज्यस्तरीय राजनीतिक और सामाजिक बहस का मुद्दा बन गया।
शनिवार को बढ़ा तनाव
दीपक का आरोप है कि 31 जनवरी को देहरादून, ऋषिकेश और हरिद्वार से बजरंग दल के करीब 150 कार्यकर्ता कोटद्वार पहुंचे और सीधे उनके जिम के बाहर नारेबाज़ी शुरू कर दी। उनका कहना है कि इस दौरान गाली-गलौज हुई और परिवार को भी निशाना बनाया गया।
दीपक ने दावा किया कि उन्होंने संभावित टकराव को लेकर पहले ही पुलिस को आगाह किया था और सोशल मीडिया पर डाले गए कुछ भड़काऊ संदेशों के स्क्रीनशॉट भी पुलिस को भेजे थे, लेकिन मौके पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
पुलिस का पक्ष
पौड़ी ज़िले के एसएसपी सर्वेश पंवार ने बताया कि शनिवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कोटद्वार दौरा भी था, जिसके चलते पुलिस बल सुरक्षा व्यवस्था में तैनात था। बावजूद इसके, जैसे ही प्रदर्शन की सूचना मिली, पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्थिति को नियंत्रित कर लिया।
एसएसपी के अनुसार, देहरादून से आए कुछ लोगों द्वारा माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई, जिस पर पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज की है। इसके अलावा संबंधित दुकानदार की शिकायत पर भी एक अलग मुकदमा दर्ज किया गया है।
एडिशनल एसपी चंद्र मोहन सिंह ने कहा कि किसी तरह की मारपीट नहीं हुई और एहतियातन पूरे शहर में फ्लैग मार्च भी कराया गया।
SHO का बयान
Kotdwar के थाना प्रभारी प्रदीप नेगी ने बताया कि 26 जनवरी को कुछ लोगों ने दुकान के नाम को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन दुकानदार पिछले 30 वर्षों से उसी नाम से कारोबार कर रहा है। बाद में वायरल वीडियो के कारण मामला और भड़क गया।
उनके मुताबिक, शनिवार को बजरंग दल के कार्यकर्ता ‘बाबा गारमेंट्स’ से अधिक दीपक के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने पहुंचे थे और इसी कारण आमना-सामना होने पर तनाव बढ़ गया।
बजरंग दल का आरोप
बजरंग दल के स्थानीय पदाधिकारी राजेश जदली ने कहा कि 26 जनवरी को बातचीत के दौरान उनके कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी और हाथापाई की गई थी, जिसकी शिकायत पुलिस को दी गई थी। उनका आरोप है कि जब पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, तब विरोध प्रदर्शन किया गया।
उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन पूरी तरह संगठनात्मक था और इसमें देहरादून, ऋषिकेश और हरिद्वार से कार्यकर्ता शामिल हुए।
कांग्रेस का हमला, सुरक्षा की मांग
इस मामले में उत्तराखंड कांग्रेस ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने दीपक को तत्काल और पुख़्ता सुरक्षा देने की मांग की है। उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि लगातार ऐसी घटनाएं उत्तराखंड की छवि को नुकसान पहुंचा रही हैं।
धस्माना ने दावा किया कि उन्होंने मुख्य सचिव आनंद वर्धन से फोन पर बात की है, जिन्होंने मामले में आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
दीपक का दर्द
घटना को याद करते हुए दीपक भावुक हो जाते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने जो किया, वह इंसानियत के नाते किया था, लेकिन इसके बदले उन्हें डर और असुरक्षा मिली। उन्होंने कहा कि अब उन्हें अपने परिवार की सुरक्षा की चिंता सता रही है, फिर भी वे अन्याय के ख़िलाफ़ खड़े रहेंगे।
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